पाठ्यक्रम: GS1/समाज; GS3/रक्षा
संदर्भ
- भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने सशस्त्र बलों में महिला अधिकारियों को स्थायी आयोग (Permanent Commission – PC) और समान करियर अवसरों का अधिकार प्रदान किया।
पृष्ठभूमि
- महिलाओं को ऐतिहासिक रूप से सशस्त्र बलों में अल्पकालिक सेवा आयोग (Short Service Commission – SSC) के माध्यम से शामिल किया गया था, जिसमें सीमित कार्यकाल और प्रतिबंधित करियर उन्नति होती थी।
- पूर्ववर्ती निर्णयों में, जैसे 2020 के बबीता पुनिया मामले में, सर्वोच्च न्यायालय ने निर्देश दिया कि महिला अधिकारियों को स्थायी आयोग (PC) और सभी सेवाओं में कमांड पदस्थापन दिए जाएँ, सिवाय युद्धक भूमिकाओं के।
- हालाँकि, कार्यान्वयन संबंधी समस्याएँ बनी रहीं और मूल्यांकन, प्रशिक्षण तथा पदोन्नति प्रणालियों में संरचनात्मक पक्षपात महिलाओं के लिए बाधा बने रहे।
- सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणियाँ: करियर उन्नति में समान अवसर अनुच्छेद 14 और 16 के अंतर्गत संवैधानिक दायित्व है।
स्थायी आयोग और अल्पकालिक सेवा आयोग
- स्थायी आयोग (PC): सशस्त्र बलों में सेवानिवृत्ति आयु तक पूर्णकालिक करियर, साथ ही पेंशन और सेवानिवृत्ति उपरांत लाभ।
- अल्पकालिक सेवा आयोग (SSC): सेवा अवधि 10–14 वर्ष तक सीमित होती है, जिसके बाद अधिकारियों को बाहर होना पड़ता है यदि PC प्रदान न किया जाए। SSC पूरा करने के बाद अधिकारी पेंशन के पात्र नहीं होते।
महिलाओं के लिए स्थायी आयोग (PC) की स्थिति
- भारतीय वायु सेना: वायु सेना ने महिलाओं को लगभग सभी शाखाओं में PC प्रदान कर सबसे प्रगतिशील सेवा के रूप में पहचान बनाई है। इसमें युद्धक भूमिकाओं जैसे लड़ाकू पायलटों में भी महिलाओं को शामिल किया गया है, जिससे लैंगिक एकीकरण का मानक स्थापित हुआ।
- भारतीय नौसेना: नौसेना ने महिलाओं के लिए PC को कई कैडरों में विस्तारित किया है और उन्हें युद्धपोतों तथा अग्रिम पंक्ति की भूमिकाओं में नियुक्त किया है, जो परिचालन समावेशन की दिशा में महत्वपूर्ण परिवर्तन है।
- भारतीय थल सेना: महिला अधिकारियों को 12 शाखाओं और सेवाओं में स्थायी आयोग प्रदान किया जा रहा है, साथ ही आर्मी मेडिकल कॉर्प्स, आर्मी डेंटल कॉर्प्स एवं मिलिट्री नर्सिंग सेवा में भी।
सशस्त्र बलों में महिलाओं का महत्व
- आदर्श और प्रेरणा: महिला सैनिक भावी पीढ़ियों के लिए आदर्श और प्रेरणा का स्रोत हैं, जो सैन्य करियर अपनाने की आकांक्षा रखती हैं।
- वैश्विक छवि और सॉफ्ट पावर: यह भारत की लैंगिक समावेशिता और प्रगतिशील सुधारों की प्रतिबद्धता को दर्शाता है तथा संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में विश्वसनीयता बढ़ाता है।
- परिचालन प्रभावशीलता: महिलाएँ विविध दृष्टिकोण, नेतृत्व शैली और समस्या-समाधान दृष्टिकोण लाती हैं, जो शांति स्थापना, खुफिया, चिकित्सा सेवाओं एवं मानवीय मिशनों जैसी भूमिकाओं में उपयोगी हैं।
महिलाओं द्वारा सामना की जाने वाली चुनौतियाँ
- सीमित सुविधाएँ: भारतीय सेना में महिलाओं को महिला-विशिष्ट बैरक, शौचालय और अन्य सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ता है।
- उत्पीड़न और भेदभाव: सशस्त्र बलों में महिलाओं ने लैंगिक आधार पर उत्पीड़न और भेदभाव का अनुभव होने की रिपोर्ट दी है।
- सांस्कृतिक और सामाजिक मानदंड: पारंपरिक लैंगिक भूमिकाएँ और अपेक्षाएँ प्रायः महिलाओं को सैन्य करियर अपनाने से हतोत्साहित करती हैं या उनके उन्नति अवसरों को सीमित करती हैं।
निष्कर्ष
- रक्षा बलों में महिलाओं का समावेश केवल समानता का प्रश्न नहीं है, बल्कि आधुनिक युद्ध में परिचालन आवश्यकता भी है।
- संरचनात्मक चुनौतियों का समाधान सशस्त्र बलों को अधिक समावेशी, प्रभावी और भविष्य के लिए तैयार बनाएगा।
स्रोत: TH