पाठ्यक्रम: GS2/ शासन; GS3/ अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- कॉर्पोरेट विधि (संशोधन) विधेयक, 2026 लोकसभा में प्रस्तुत किया गया है और विस्तृत परीक्षण हेतु इसे संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेजा गया है।
- यह विधेयक कंपनी अधिनियम, 2013 और लिमिटेड लाइबिलिटी पार्टनरशिप अधिनियम, 2008 में संशोधन करने का प्रयास करता है ताकि व्यापार करने में सुगमता को बढ़ावा दिया जा सके और कॉर्पोरेट प्रशासन में सुधार हो।
विधेयक के प्रमुख प्रावधान
- कॉर्पोरेट अपराधों का अपराधमुक्तिकरण: विधेयक कई छोटे प्रक्रियात्मक उल्लंघनों को आपराधिक दायित्व से हटाकर मौद्रिक दंड में परिवर्तित करने का प्रस्ताव करता है। इसका उद्देश्य मुकदमेबाजी का भार कम करना और व्यापारिक वातावरण को बेहतर बनाना है।
- दंड का युक्तिकरण: दंड को उल्लंघन की प्रकृति और गंभीरता के अनुरूप बनाने का प्रस्ताव है।
- नियामक प्रक्रियाओं का सरलीकरण: विधेयक कॉर्पोरेट कानूनों के अंतर्गत प्रक्रियाओं को सरल बनाने का प्रयास करता है। इसका उद्देश्य दक्षता बढ़ाना, विलंब कम करना और निवेशकों का विश्वास बढ़ाना है।
- ये परिवर्तन कंपनी विधि समिति (CLC) 2022 की रिपोर्ट की सिफारिशों पर आधारित हैं। इस प्रक्रिया में उद्योग संगठनों, विधि विशेषज्ञों और हितधारकों से परामर्श शामिल था।
- CSR प्रावधानों से संबंधित परिवर्तन: विधेयक कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) हेतु शुद्ध लाभ की गणना में संशोधन का प्रस्ताव करता है। हालाँकि, कंपनी अधिनियम, 2013 के अंतर्गत अनिवार्य 2% CSR व्यय की आवश्यकता को समाप्त नहीं करता।
संयुक्त संसदीय समिति (JPC) क्या है?
- संयुक्त संसदीय समिति एक एड-हॉक समिति होती है जिसे संसद किसी विशेष विधेयक या मुद्दे की विस्तृत जाँच के लिए गठित करती है।
- इसमें लोकसभा और राज्यसभा दोनों के सदस्य शामिल होते हैं, जिससे व्यापक राजनीतिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होता है।
- इसे एक सदन द्वारा पारित प्रस्ताव और दूसरे सदन द्वारा सहमति के माध्यम से गठित किया जाता है।
स्रोत: AIR
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संक्षिप्त समाचार 25-03-2026