- भारत का परोपकार परिदृश्य संरचनात्मक परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है, क्योंकि घरेलू निजी दान अब विदेशी परोपकारी प्रवाह से अधिक हो गया है।
- इसका आशय ऐसी व्यवस्था से है, जिसमें सामाजिक विकास का वित्तपोषण, संचालन और नेतृत्व मुख्यतः भारतीय नागरिकों, व्यवसायों, उद्यमियों तथा संस्थानों द्वारा किया जाए, जबकि विदेशी परोपकार पूरक भूमिका निभाए।
- उदाहरण: अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन, शिव नादर फाउंडेशन आदि। Read More
आत्मनिर्भर परोपकार पारितंत्र का निर्माण
सन्दर्भ
आत्मनिर्भर परोपकार पारितंत्र