पाठ्यक्रम: जीएस-3/अर्थव्यवस्था
सन्दर्भ
- प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कथित 3.5 करोड़ अमेरिकी डॉलर के क्रिप्टोकरेंसी ओवर-द-काउंटर (OTC) ट्रेडिंग घोटाले से जुड़े धन शोधन के मामले में जाँच शुरू की है।
धन शोधन (Money Laundering)
- धन शोधन वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से अवैध गतिविधियों से अर्जित धन या वित्तीय परिसंपत्तियों के वास्तविक स्रोत को छिपाकर उन्हें वैध प्रतीत कराया जाता है, साथ ही उस अवैध गतिविधि को भी संरक्षण दिया जाता है जिससे यह धन प्राप्त हुआ हो।
- धन शोधन की रोकथाम अब एक अंतर्राष्ट्रीय प्रयास बन चुकी है, जिसके प्रमुख उद्देश्यों में आतंकवाद के वित्तपोषण पर रोक लगाना भी शामिल है।
धन शोधन के 3 चरण:
- स्थापन (Placement)
- स्तरीकरण (Layering)
- एकीकरण (Integration)

धन शोधन का प्रभाव
- अर्थव्यवस्था पर प्रभाव: धन शोधन औपचारिक वित्तीय प्रणाली में अवैध एवं बेहिसाबी धन को शामिल करके उसकी विश्वसनीयता और पारदर्शिता को कमजोर करता है।
- इससे ब्याज दरों, विनिमय दरों तथा पूंजी बाज़ार में विकृतियाँ उत्पन्न हो सकती हैं।
- इससे प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) भी हतोत्साहित होता है, क्योंकि निवेशक कमजोर वित्तीय पारदर्शिता वाली अर्थव्यवस्थाओं को अधिक जोखिमपूर्ण मानते हैं।
- जनकल्याण पर प्रभाव: धन शोधन के कारण सरकार को कर राजस्व का भारी नुकसान होता है, जिससे राजकोषीय दबाव बढ़ता है और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों के लिए उपलब्ध संसाधन कम हो जाते हैं।
- अवैध धन से पोषित भ्रष्टाचार लोकतांत्रिक संस्थाओं तथा शासन व्यवस्था में जनता के विश्वास को कमजोर करता है।
- अवैध धन प्रायः अचल संपत्ति (रियल एस्टेट) जैसे क्षेत्रों में निवेश किया जाता है, जिससे परिसंपत्तियों की कीमतों में कृत्रिम वृद्धि होती है और वास्तविक खरीदारों के लिए आवास खरीदना कठिन हो जाता है।
- अपराध और भ्रष्टाचार में भूमिका: धन शोधन संगठित अपराध, मादक पदार्थों की तस्करी, आतंकवाद के वित्तपोषण तथा बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देता है।
- यह अपराधी नेटवर्कों को अपनी गतिविधियों का विस्तार करने तथा अधिक वित्तीय शक्ति के साथ संचालित होने में सक्षम बनाता है।
उभरती चुनौतियाँ
- डिजिटल बैंकिंग: ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल भुगतान मंचों तथा व्यक्ति-से-व्यक्ति (Peer-to-Peer) लेन-देन के बढ़ते उपयोग के कारण अवैध वित्तीय गतिविधियों का पता लगाना अधिक कठिन हो गया है।
- जैसे-जैसे वित्तीय सेवाएँ अधिक तेज़ और परस्पर जुड़ी हुई होती जा रही हैं, संदिग्ध गतिविधियों की पहचान के लिए केवल व्यक्तिगत लेन-देन नहीं, बल्कि विभिन्न माध्यमों में लेन-देन के पैटर्न की निगरानी आवश्यक हो गई है।
- क्रिप्टोकरेंसी: क्रिप्टोकरेंसी पूरी तरह गुमनाम नहीं होती, किन्तु यह पारंपरिक भुगतान प्रणालियों की तुलना में अधिक गोपनीयता प्रदान कर सकती है।
- इसी कारण नियामक संस्थाओं ने डिजिटल परिसंपत्ति सेवा प्रदाताओं के लिए निगरानी तथा प्रतिवेदन संबंधी नियमों को कड़ा किया है, ताकि दुरुपयोग को रोका जा सके और वैध नवाचार को भी प्रोत्साहन मिलता रहे।
धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA)
- धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (PMLA) संविधान के अनुच्छेद 253 के अंतर्गत अधिनियमित किया गया था। इसका उद्देश्य धन शोधन की रोकथाम करना तथा धन शोधन से प्राप्त या उसमें प्रयुक्त संपत्तियों की जब्ती का प्रावधान करना है।
- यह अधिनियम वर्ष 2005 से लागू हुआ तथा इसमें 2009 और 2012 में संशोधन किए गए।
PMLA के अंतर्गत अपराध मुख्यतः आपराधिक गतिविधियों से प्राप्त धन के शोधन से संबंधित है, जैसे—
- मादक पदार्थों की तस्करी
- आतंकवाद
- भ्रष्टाचार
प्रवर्तन निदेशालय (ED)
- स्थापना: इसकी स्थापना वर्ष 1956 में आर्थिक कार्य विभाग के अंतर्गत प्रवर्तन इकाई (Enforcement Unit) के रूप में की गई थी। इसका कार्य विदेशी विनिमय विनियमन अधिनियम, 1947 (FERA) के अंतर्गत विदेशी विनिमय नियंत्रण संबंधी उल्लंघनों से निपटना था।
- एक वर्ष बाद प्रवर्तन इकाई का नाम बदलकर प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) कर दिया गया।
- यह एक बहु-विषयक संगठन है, जिसे धन शोधन के अपराधों तथा विदेशी विनिमय कानूनों के उल्लंघन की जाँच का दायित्व सौंपा गया है।
प्रवर्तन निदेशालय के वैधानिक कार्य
प्रवर्तन निदेशालय निम्नलिखित अधिनियमों को लागू करता है—
- धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (PMLA): यह धन शोधन की रोकथाम हेतु बनाया गया एक आपराधिक कानून है। इसके प्रावधानों के प्रवर्तन की जिम्मेदारी प्रवर्तन निदेशालय को सौंपी गई है।
- विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 (FEMA): यह एक दीवानी कानून है, जिसे विदेशी व्यापार एवं भुगतान को सुगम बनाने से संबंधित कानूनों को समेकित एवं संशोधित करने के लिए बनाया गया है।
- भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018 (FEOA): यह अधिनियम आर्थिक अपराधियों को भारतीय न्यायालयों के अधिकार क्षेत्र से बाहर रहकर भारतीय कानून की प्रक्रिया से बचने से रोकने के उद्देश्य से बनाया गया है।
निष्कर्ष
- भारत ने धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (PMLA) तथा प्रवर्तन निदेशालय जैसी प्रवर्तन एजेंसियों के माध्यम से धन शोधन की रोकथाम हेतु महत्त्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
- इसके बावजूद जटिल वित्तीय संरचनाएँ, सीमा-पार लेन-देन, लंबी न्यायिक प्रक्रियाएँ तथा अपेक्षाकृत कम दोषसिद्धि दर जैसी चुनौतियाँ अभी भी बनी हुई हैं।
- इन कमियों को दूर करने के लिए जाँच तंत्र को सुदृढ़ करना, विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाना तथा न्यायिक प्रक्रिया की दक्षता में सुधार करना अत्यंत आवश्यक है।
स्रोत: TH
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