पाठ्यक्रम: GS2/शासन
संदर्भ
- प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना के कार्यान्वयन के दो वर्ष पूर्ण हो गए हैं।
प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना
- घोषणा: केंद्रीय बजट 2024-25 में।
- उद्देश्य: रोजगार की तलाश कर रहे युवाओं को अग्रणी कंपनियों में कार्य करने का वास्तविक अनुभव प्रदान करना।
- कार्यान्वयन एजेंसी: कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय।
- वित्तीय सहायता एवं कार्यानुभव: चयनित 18 से 25 वर्ष की आयु के ऐसे अभ्यर्थी, जो पूर्णकालिक रोजगार में नहीं हैं, उन्हें प्रतिमाह ₹9,000 की सहायता राशि, कार्यग्रहण के समय ₹6,000 की एकमुश्त राशि तथा व्यावहारिक कार्यानुभव प्रदान किया जाता है।
- इंटर्नशिप की अवधि: 6 या 9 महीने।
- शैक्षणिक पात्रता: कक्षा 10वीं, कक्षा 12वीं, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI), डिप्लोमा, स्नातक तथा स्नातकोत्तर सहित विभिन्न शैक्षणिक योग्यताओं वाले अभ्यर्थियों के लिए अवसर उपलब्ध हैं।
- कंपनियों का चयन: अग्रणी कंपनियों की पहचान पिछले तीन वर्षों के औसत कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) व्यय के आधार पर की गई है।
- कंपनियों की भागीदारी: योजना में कंपनियों की भागीदारी स्वैच्छिक है।
- पात्रता: अभ्यर्थी के परिवार का कोई सदस्य प्रतिवर्ष ₹8 लाख से अधिक आय अर्जित न करता हो।
- आयु सीमा: 18 से 25 वर्ष; अन्य पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के अभ्यर्थियों के लिए आयु सीमा में छूट का प्रावधान है।
- औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI): मैट्रिक उत्तीर्ण होने के साथ संबंधित व्यवसाय में औद्योगिक प्रशिक्षण।
- डिप्लोमा: इंटरमीडिएट उत्तीर्ण होने के साथ अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) से मान्यताप्राप्त डिप्लोमा।
- स्नातक उपाधि: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) अथवा अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद से मान्यताप्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक उपाधि।
योजना में किए गए प्रमुख बदलाव
- व्यापक विस्तार: योजना का विस्तार शीर्ष 500 कंपनियों से आगे करते हुए सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) तथा उभरते क्षेत्रों तक किया गया है।
- अधिक मासिक सहायता राशि: मासिक सहायता राशि बढ़ाकर ₹9,000 कर दी गई है।
- लचीली अवधि: इंटर्नशिप की अवधि 12 महीने से घटाकर 6 से 9 महीने कर दी गई है।
- पात्रता में छूट: पात्र आयु सीमा 21–24 वर्ष से बढ़ाकर 18–25 वर्ष कर दी गई है। इसके अतिरिक्त, स्नातकोत्तर उपाधिधारकों तथा स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों को भी शामिल किया गया है।

प्रदर्शन
- योजना में किए गए परिवर्तनों के परिणामस्वरूप तीसरे चरण में योजना से जुड़ने वाले युवाओं की संख्या में लगभग 67% से 100% तक की तीव्र वृद्धि दर्ज की गई।
- तीसरे चरण का शुभारंभ इस वर्ष अप्रैल में किया गया था, जो दिसंबर में समाप्त होगा।
प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना का महत्त्व
- रोजगार के लिए तत्परता में सुधार: उद्योगों में व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होने से शैक्षणिक योग्यता और कार्यस्थल की वास्तविक आवश्यकताओं के बीच के अंतर को कम करने में सहायता मिल सकती है।
- जनसांख्यिकीय लाभांश को साकार करना: यह भारत की विशाल युवा जनसंख्या को उत्पादक एवं कुशल कार्यबल में परिवर्तित करने में सहायक हो सकती है।
- उद्योगों की भागीदारी को प्रोत्साहन: सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों तथा उभरते क्षेत्रों को शामिल करने से बड़ी कंपनियों के अतिरिक्त अन्य क्षेत्रों में भी इंटर्नशिप के अवसरों का विस्तार हो सकता है।
आगे की राह
- इंटर्नशिप की गुणवत्ता में सुधार: इंटर्नशिप के अंतर्गत केवल नियमित एवं दोहराव वाले कार्यों के बजाय सार्थक कार्य, विशिष्ट कौशल विकास तथा मार्गदर्शन पर बल दिया जाना चाहिए।
- पूर्णता एवं परिणामों की निगरानी: सरकार को केवल पंजीकरण की संख्या पर निर्भर रहने के बजाय इंटर्नशिप पूर्ण करने की दर, अर्जित कौशल तथा इसके बाद प्राप्त रोजगार के अवसरों का आकलन करना चाहिए।
- उद्योग एवं शिक्षा के बीच समन्वय: कंपनियों और शैक्षणिक संस्थानों को मिलकर इंटर्नशिप के अवसरों को श्रम बाजार की उभरती आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना चाहिए।
स्रोत: IE
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