दूरसंचार अवसंरचना की आपदा-सहनीयता

पाठ्यक्रम: GS3/आपदा प्रबंधन, बुनियादी ढांचा

संदर्भ

  • आपदा-सहनीय अवसंरचना गठबंधन (CDRI) तथा राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) द्वारा किए गए एक अध्ययन में भारत के पाँच उच्च जोखिम वाले राज्यों—असम, गुजरात, ओडिशा, तमिलनाडु और उत्तराखंड—में दूरसंचार टावरों की विभिन्न आपदाओं के प्रति संवेदनशीलता की पहचान की गई है।

रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष

  • तमिलनाडु: अध्ययन में तमिलनाडु के 48,416 दूरसंचार टावरों का मानचित्रण किया गया। इनमें से 57% टावर चक्रवाती हवाओं के उच्च अथवा अत्यधिक उच्च जोखिम का सामना कर रहे हैं।
  • गुजरात एवं उत्तराखंड: गुजरात में 28% तथा उत्तराखंड में 25% दूरसंचार टावर अत्यधिक तीव्र चक्रवाती हवाओं के जोखिम के संपर्क में हैं।
  • बाढ़ एवं भूस्खलन का जोखिम: गुजरात के 12% दूरसंचार टावर बाढ़ के जोखिम से प्रभावित होने की आशंका वाले क्षेत्रों में स्थित हैं, जबकि उत्तराखंड के 10% टावर ऐसे क्षेत्रों में हैं, जहाँ भूस्खलन की संभावना अधिक है।
  • भूकंपीय जोखिम: असम एवं उत्तराखंड के सभी दूरसंचार टावर तथा गुजरात के 12% टावर उच्च एवं अत्यधिक उच्च भूकंपीय जोखिम वाले क्षेत्रों (जोन IV एवं V) में स्थित हैं।

आपदा-सहनीय अवसंरचना गठबंधन (CDRI)

  • स्थापना: इसकी स्थापना वर्ष 2019 में भारत सरकार के नेतृत्व में तथा आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए संयुक्त राष्ट्र कार्यालय (UNDRR) के सहयोग से न्यूयॉर्क में आयोजित संयुक्त राष्ट्र जलवायु कार्रवाई शिखर सम्मेलन के दौरान की गई थी।
  • सदस्य: यह राष्ट्रीय सरकारों, संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों एवं कार्यक्रमों, बहुपक्षीय विकास बैंकों, निजी क्षेत्र तथा शैक्षणिक संस्थानों की बहु-हितधारक वैश्विक साझेदारी है।
  • सचिवालय: नई दिल्ली।
  • उद्देश्य: जलवायु परिवर्तन एवं आपदाओं से उत्पन्न जोखिमों के प्रति अवसंरचना प्रणालियों की सहनीयता बढ़ाना, ताकि सतत विकास सुनिश्चित किया जा सके।
  • प्रमुख भूमिका: यह देशों को वर्तमान तथा भविष्य में विकसित होने वाली अवसंरचना को आपदाओं एवं जलवायु संबंधी जोखिमों के प्रति अधिक सक्षम बनाने हेतु अपनी प्रणालियों में सुधार करने में सहायता प्रदान करता है।

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA)

  • यह भारत में आपदा प्रबंधन के लिए सर्वोच्च वैधानिक निकाय है, जिसकी स्थापना आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत की गई थी।
  • इस अधिनियम में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण तथा संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की अध्यक्षता में राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों (SDMAs) के गठन की परिकल्पना की गई है।
  • इन प्राधिकरणों का उद्देश्य भारत में आपदा प्रबंधन के लिए समग्र एवं एकीकृत दृष्टिकोण को आगे बढ़ाना और उसका कार्यान्वयन सुनिश्चित करना है।
  • कार्य एवं उत्तरदायित्व:
  • आपदा प्रबंधन संबंधी नीतियाँ निर्धारित करना।
  • राष्ट्रीय योजना के अनुरूप भारत सरकार के मंत्रालयों एवं विभागों द्वारा तैयार की गई योजनाओं को स्वीकृति प्रदान करना।
  • राज्य आपदा प्रबंधन योजनाएँ तैयार करने के लिए राज्य प्राधिकरणों हेतु दिशा-निर्देश निर्धारित करना।
  • आपदा प्रबंधन संबंधी नीतियों एवं योजनाओं के प्रवर्तन और कार्यान्वयन में समन्वय स्थापित करना।
  • आपदा जोखिम न्यूनीकरण सहित अन्य संबंधित उद्देश्यों के लिए धनराशि उपलब्ध कराने की अनुशंसा करना।

भारत का दूरसंचार क्षेत्र

  • वैश्विक स्थिति: वर्ष 2026 तक भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा दूरसंचार बाजार है। अप्रैल 2026 तक देश में कुल 1,337.54 मिलियन टेलीफोन ग्राहक थे तथा टेली-घनत्व 93.69% था।
  • अर्थव्यवस्था में योगदान:विगत दशक में इस क्षेत्र ने वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 15% योगदान दिया है। वर्ष 2030 तक इसके 2.8 ट्रिलियन डॉलर के बाजार में परिवर्तित होने का अनुमान है।
  • इंटरनेट ग्राहक: मार्च 2026 के अंत तक देश में इंटरनेट ग्राहकों की कुल संख्या 1.09 अरब तक पहुँच गई।
  • ब्रॉडबैंड बाजार में संकेंद्रण: अप्रैल 2026 तक भारत के ब्रॉडबैंड बाजार में पाँच प्रमुख सेवा प्रदाताओं—रिलायंस जियो इन्फोकॉम लिमिटेड, भारती एयरटेल लिमिटेड, वोडाफोन आइडिया लिमिटेड, भारत संचार निगम लिमिटेड तथा एट्रिया कन्वर्जेंस टेक्नोलॉजीज लिमिटेड—की संयुक्त हिस्सेदारी कुल ग्राहक आधार का 98.61% थी।

सरकार द्वारा की गई प्रमुख पहलें

  • गतिशक्ति संचार पोर्टल: यह एकल-खिड़की स्वीकृति मंच है, जो विभिन्न राज्यों में ऑप्टिकल फाइबर बिछाने तथा दूरसंचार टावर स्थापित करने के लिए मार्गाधिकार (RoW) संबंधी अनुमतियाँ शीघ्र प्राप्त करने में सहायता करता है।
  • भारतनेट परियोजना: इसका उद्देश्य सभी ग्राम पंचायतों तथा ग्रामीण बस्तियों को उच्च गति वाले ऑप्टिकल फाइबर ब्रॉडबैंड से जोड़ना है। इसे अद्यतन डिजिटल भारत निधि व्यवस्था का समर्थन प्राप्त है।
  • उत्पादन-संबद्ध प्रोत्साहन (PLI) योजना: यह दूरसंचार एवं नेटवर्किंग उत्पादों के घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहित करती है, ताकि आयात पर निर्भरता कम हो और स्थानीय निर्यात को बढ़ावा मिले।
  • भारत 6G दृष्टिकोण: इसका उद्देश्य भारत को दूरसंचार प्रौद्योगिकी के उपभोक्ता से आगे बढ़ाकर किफायती एवं उन्नत संचार प्रणालियों के अग्रणी वैश्विक प्रदाता, विकासकर्ता तथा निर्यातक के रूप में स्थापित करना है।
  • दूरसंचार अधिनियम, 2023: इसने भारतीय तार अधिनियम, 1885 का स्थान लिया। इसका उद्देश्य स्पेक्ट्रम प्रबंधन का आधुनिकीकरण, सार्वजनिक सुरक्षा को सुदृढ़ करना तथा अनुज्ञापन संबंधी नियमों को सरल बनाना है।

आगे की राह

  • स्थानीय स्तर पर जोखिम मानचित्रण में सुधार: जिला एवं उप-जिला स्तर पर संवेदनशील स्थलों की पहचान की जानी चाहिए। विभिन्न आपदाओं के संयुक्त जोखिम वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता देते हुए निवेश किया जाना चाहिए।
  • विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाना: दूरसंचार सेवा प्रदाताओं, विद्युत वितरण कंपनियों, सड़क निर्माण एजेंसियों तथा आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों को शामिल करते हुए संयुक्त पुनर्बहाली प्रक्रियाएँ विकसित की जानी चाहिए।
  • पुनर्स्थापित क्षमता को सुदृढ़ करना: आपदाओं के बाद दूरसंचार सेवाओं को शीघ्र पुनर्स्थापित करने के लिए ईंधन का पर्याप्त भंडार, आपातकालीन उपकरण तथा प्रशिक्षित स्थानीय दल उपलब्ध रखे जाने चाहिए।

स्रोत: TH

 

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