पाठ्यक्रम: GS2/भारतीय राजव्यवस्था
संदर्भ
- राज्यसभा ने केरल का नाम परिवर्तित कर ‘केरलम’ करने संबंधी विधेयक पारित कर दिया है।
परिचय
- केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 के माध्यम से राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने का प्रावधान किया गया है। इसके लिए संविधान में, विशेष रूप से प्रथम अनुसूची, में आवश्यक संशोधन किए जाएंगे।
- केरल विधानसभा ने वर्ष 2024 में एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के लिए कानून बनाने का आग्रह किया था।
पृष्ठभूमि
- नाम की उत्पत्ति: केरल का उल्लेख करने वाला सबसे प्रारंभिक अभिलेखीय साक्ष्य सम्राट अशोक के 257 ईसा पूर्व के शिलालेख II में मिलता है।
- इस अभिलेख में स्थानीय शासक के लिए ‘केरलपुत्र’ (“केरल का पुत्र”) शब्द का प्रयोग किया गया है। इसमें चेर वंश के संदर्भ में “चेर का पुत्र” का भी उल्लेख मिलता है।
- वर्तमान में संविधान की प्रथम अनुसूची में भी राज्य का नाम ‘केरल’ निर्धारित किया गया है।
आधुनिक राज्य का गठन
- मलयालम भाषी लोगों पर इस क्षेत्र में विभिन्न राजाओं और देशी रियासतों का शासन रहा था।
- 1920 के दशक में ऐक्य (एकीकृत) केरल आंदोलन ने गति पकड़ी और मलयालम भाषी लोगों के लिए एक पृथक राज्य की माँग उठने लगी।
- इस आंदोलन का उद्देश्य मालाबार, कोचीन और त्रावणकोर को एक ही क्षेत्र में एकीकृत करना था।
- स्वतंत्रता के बाद देशी रियासतों का विलय एवं एकीकरण केरल राज्य के गठन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था।
- 1 जुलाई 1949 को त्रावणकोर और कोचीन नामक दोनों राज्यों का एकीकरण किया गया।
- जब राज्यों के पुनर्गठन को भाषाई आधार पर करने का निर्णय लिया गया, तब केंद्र सरकार के राज्य पुनर्गठन आयोग ने केरल राज्य के गठन की सिफारिश की।
- 1 नवंबर 1956 को केरल राज्य अस्तित्व में आया। मलयालम भाषा में राज्य को ‘केरलम’ कहा जाता था, जबकि अंग्रेजी में इसका नाम ‘Kerala’ था।
भारत में किसी राज्य का नाम परिवर्तित करने की प्रक्रिया
- अनुच्छेद 3 संसद को निम्नलिखित अधिकार प्रदान करता है:
- किसी राज्य से उसके क्षेत्र को अलग करके अथवा दो या अधिक राज्यों या राज्यों के कुछ भागों को मिलाकर या किसी राज्य के किसी भाग के साथ किसी क्षेत्र को मिलाकर नया राज्य गठित करना;
- किसी राज्य के क्षेत्रफल में वृद्धि करना;
- किसी राज्य के क्षेत्रफल में कमी करना;
- किसी राज्य की सीमाओं में परिवर्तन करना; तथा
- किसी राज्य के नाम में परिवर्तन करना।
- हालाँकि, अनुच्छेद 3 इस संबंध में दो शर्तें निर्धारित करता है:
- उपर्युक्त परिवर्तनों से संबंधित विधेयक संसद में केवल राष्ट्रपति की पूर्व अनुशंसा से ही प्रस्तुत किया जा सकता है।
- विधेयक की अनुशंसा करने से पहले राष्ट्रपति को उसे संबंधित राज्य विधानमंडल के पास उसके विचार व्यक्त करने के लिए एक निर्धारित अवधि के अंदर प्रेषित करना होता है।
- राष्ट्रपति अथवा संसद राज्य विधानमंडल द्वारा व्यक्त किए गए विचारों से बाध्य नहीं होते। वे इन विचारों को स्वीकार या अस्वीकार कर सकते हैं।
- भारतीय संविधान का अनुच्छेद 4 स्वयं यह स्पष्ट करता है कि अनुच्छेद 3 के अंतर्गत वर्तमान राज्यों के नाम में परिवर्तन के लिए बनाए गए कानूनों को अनुच्छेद 368 के अंतर्गत संविधान संशोधन नहीं माना जाता है।
- ऐसे कानून साधारण बहुमत से तथा सामान्य विधायी प्रक्रिया के माध्यम से पारित किए जा सकते हैं।
स्रोत: TH
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