कृत्रिम बुद्धिमत्ता और कार्य का भविष्य: एंथ्रॉपिक का श्रम बाज़ार अध्ययन

पाठ्यक्रम: GS3/IT की भूमिका

संदर्भ  

  • एंथ्रॉपिक द्वारा हाल ही में किए गए श्रम बाज़ार अध्ययन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की सैद्धांतिक क्षमताओं और उसके वास्तविक कार्यस्थल उपयोग के बीच बढ़ते अंतर को उजागर किया गया है तथा रोजगार में संरचनात्मक परिवर्तनों के प्रारंभिक संकेतों को सामने रखा गया है।

एंथ्रॉपिक के श्रम बाज़ार अध्ययन की प्रमुख विशेषताएँ

  • नए मापदंड का परिचय: ‘ऑब्ज़र्व्ड एक्सपोज़र’ नामक एक नया मापदंड प्रस्तुत किया गया है, जो रोजगारों पर AI के प्रभाव का आकलन करता है।
    • यह कार्य-स्तर पर व्यवसायिक आँकड़े, AI क्षमता के शैक्षणिक अनुमान और क्लाउड AI प्रणाली से प्राप्त वास्तविक उपयोग डेटा को संयोजित करता है।
  • AI क्षमता और वास्तविक उपयोग के बीच बड़ा अंतर: अध्ययन में पाया गया कि रोजगार कार्यों को करने की AI की सैद्धांतिक क्षमता वास्तविक पेशेवर उपयोग से कहीं अधिक है।
    • उदाहरण के लिए, बड़े भाषा मॉडल (LLMs) कंप्यूटर और गणितीय कार्यकर्ताओं के लगभग 94% कार्य सैद्धांतिक रूप से कर सकते हैं, परंतु वास्तविक उपयोग केवल लगभग 33% कार्यों तक सीमित है।
  • ज्ञान-आधारित व्यवसायों पर सबसे अधिक प्रभाव: डेटा विश्लेषण, कोडिंग, लेखन और दस्तावेज़ीकरण से जुड़े कार्यों में AI का सबसे अधिक प्रभाव देखा गया। प्रमुख व्यवसायों में कंप्यूटर प्रोग्रामर, वित्तीय विश्लेषक, ग्राहक सेवा प्रतिनिधि, विधिक पेशेवर, व्यवसाय विश्लेषक, कार्यालय और प्रशासनिक कर्मचारी शामिल हैं।
  • प्रवेश-स्तर भर्ती में गिरावट: ChatGPT के लॉन्च के बाद से AI-प्रभावित व्यवसायों में भर्ती में उल्लेखनीय परिवर्तन देखा गया।
    • 22–25 वर्ष आयु वर्ग के कर्मचारियों के लिए उच्च-प्रभाव वाले कार्यों में प्रवेश लगभग 14% घटा।
    • कंपनियाँ जूनियर डेवलपर, ग्रेजुएट प्रशिक्षु और विश्लेषक जैसे प्रवेश-स्तर पदों पर भर्ती कम कर रही हैं।
  • AI का प्रभाव भर्ती पर अधिक, छंटनी पर कम: बड़े पैमाने पर छंटनी के बजाय कंपनियाँ नई भर्ती धीमी कर रही हैं और मूल्यांकन कर रही हैं कि AI प्रणालियाँ कितना कार्य कर सकती हैं।
    • यह संकेत देता है कि AI का प्रारंभिक प्रभाव श्रम बाज़ार में प्रवेश पर है, न कि वर्तमान रोजगार पर।
  • वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के लिए निहितार्थ: यद्यपि अध्ययन अमेरिका पर केंद्रित है, इसके निष्कर्ष वैश्विक स्तर पर प्रासंगिक हैं।
    • भारत जैसे देशों, जहाँ आईटी, व्यवसाय सेवाएँ और ज्ञान-आधारित कार्य क्षेत्र बड़े पैमाने पर हैं, AI-प्रेरित स्वचालन के कारण श्रम बाज़ार में महत्वपूर्ण बदलाव हो सकते हैं।
  • AI-प्रेरित श्रम बाज़ार परिवर्तन का प्रारंभिक चरण: रिपोर्ट निष्कर्ष निकालती है कि यद्यपि AI में कार्य को रूपांतरित करने की सुदृढ़ क्षमता है, वर्तमान अपनापन सीमित है।
    • हालाँकि, भर्ती पैटर्न में प्रवृत्तियाँ प्रारंभिक संरचनात्मक परिवर्तनों का संकेत देती हैं, जो भविष्य के रोजगार बाज़ार को पुनः आकार दे सकती हैं।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता और कार्य का भविष्य

AI प्रभाव में जनसांख्यिकीय पैटर्न 

  • लिंग: सबसे अधिक AI-प्रभावित व्यवसायों में 54.4% कर्मचारी महिलाएँ हैं, जबकि कम-प्रभावित भूमिकाओं में यह अनुपात 38.8% है।
    • यह प्रशासन, व्यवसाय सेवाओं और ज्ञान-आधारित कार्यों में महिलाओं की अधिकता को दर्शाता है, जहाँ AI उपकरण तेजी से विस्तार कर रहे हैं।
  • शिक्षा: स्नातक या परास्नातक डिग्री वाले कर्मचारी उच्च-प्रभाव वाले कार्यों में असमान रूप से अधिक हैं।
    • परास्नातक डिग्री धारक कर्मचारियों के उच्च-प्रभाव वाले व्यवसायों में होने की संभावना लगभग चार गुना अधिक है।
    • यह संकेत देता है कि AI व्यवधान प्रारंभ में उच्च-कौशल वाले ज्ञान कार्यकर्ताओं को प्रभावित कर सकता है, न कि श्रम-प्रधान क्षेत्रों को।
  • एथनिसिटी: आँकड़े जनसांख्यिकीय विविधता को दर्शाते हैं।
    • उच्च-प्रभाव वाले समूह में श्वेत कर्मचारी लगभग 65.1% हैं।
    • एशियाई कर्मचारी उच्च-प्रभाव वाले व्यवसायों में लगभग दो गुना अधिक हैं।
    • अश्वेत और हिस्पैनिक कर्मचारी इन श्रेणियों में अपेक्षाकृत कम प्रतिनिधित्व रखते हैं।

AI से अपेक्षाकृत सुरक्षित क्षेत्र  

  • शारीरिक श्रम, हाथों की दक्षता या वास्तविक दुनिया की सहभागिता की आवश्यकता वाले व्यवसाय कम प्रभावित हैं।
  • इसमें निर्माण, कृषि, सुरक्षा सेवाएँ, व्यक्तिगत देखभाल सेवाएँ और कुशल व्यवसाय शामिल हैं।
  • ये भूमिकाएँ शारीरिक उपस्थिति, परिस्थितिजन्य जागरूकता और मानवीय सहभागिता पर अत्यधिक निर्भर हैं, जिससे वर्तमान AI तकनीकों के लिए इन्हें स्वचालित करना कठिन है।

भारत के लिए निहितार्थ 

  • आईटी सेवाओं क्षेत्र पर जोखिम: भारत का आईटी सेवाओं उद्योग, जो TCS, इन्फोसिस, विप्रो जैसी कंपनियों द्वारा संचालित है, डेटा प्रोसेसिंग, अनुबंध विश्लेषण, अनुपालन निगरानी और ग्राहक समर्थन जैसी सेवाओं पर निर्भर है।
  • ये वही क्षेत्र हैं जहाँ AI उपकरण तेजी से प्रगति कर रहे हैं।
  • हालिया चिंताएँ:
    • निफ्टी आईटी सूचकांक और प्रमुख आईटी शेयर विगत वर्ष में लगभग 20% गिर गए।
    • मोतीलाल ओसवाल के विश्लेषकों का अनुमान है कि आगामी चार वर्षों में आईटी सेवाओं की आय का 9–12% समाप्त हो सकता है, जिससे लगभग 2% वार्षिक राजस्व वृद्धि का नुकसान होगा।
    • एंथ्रॉपिक द्वारा अनुबंध समीक्षा, विधिक अनुपालन निगरानी, वित्तीय विश्लेषण और बिक्री डेटा विश्लेषण जैसे कार्य करने में सक्षम AI उपकरणों के लॉन्च के बाद चिंताएँ और बढ़ गईं।
    • ऐसे उपकरण भारत के आईटी क्षेत्र के आउटसोर्सिंग-आधारित सेवा मॉडल को चुनौती देते हैं।
  • भारत के लिए संरचनात्मक चुनौतियाँ:
    • कौशल अंतराल: जनसंख्या का बड़ा हिस्सा सुदृढ़ गणितीय और वैज्ञानिक कौशल से वंचित है।
    • कम R&D निवेश: भारत का अनुसंधान एवं विकास पर व्यय अमेरिका और चीन की तुलना में बहुत कम है।
  • शिक्षा प्रणाली की सीमाएँ: उन्नत प्रौद्योगिकी प्रशिक्षण और नवाचार पर अपर्याप्त बल।
    • यदि इन क्षेत्रों में महत्वपूर्ण सुधार नहीं किए गए, तो भारत वैश्विक AI-प्रेरित आर्थिक संक्रमण में पीछे रह सकता है।

आगे की राह 

  • AI कुछ रोजगार श्रेणियों के लिए जोखिम प्रस्तुत करता है, परंतु इसका अर्थ व्यापक बेरोज़गारी नहीं है। बल्कि यह कार्य की प्रकृति में संरचनात्मक बदलाव का संकेत है।
  • भारत जैसे देशों और नीति-निर्माताओं के लिए प्रमुख प्राथमिकताएँ हैं:
    • कौशल विकास और पुनःकौशल कार्यक्रम;
    • AI अनुसंधान और नवाचार में निवेश;
    • STEM और डिजिटल कौशल पर केंद्रित शिक्षा सुधार;
    • AI-प्रेरित उद्यमिता को प्रोत्साहन;
  • इन परिवर्तनों को शीघ्र अपनाना आवश्यक होगा ताकि AI उत्पादकता और विकास का साधन बने, न कि आर्थिक व्यवधान का स्रोत।

स्रोत: IE

 

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