प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) द्वारा जारी एक कार्यपत्र में भारत की "केयर इकोनॉमी" को सुदृढ़ करने हेतु एक रोडमैप प्रस्तुत किया गया है। इस क्षेत्र में बाल देखभाल, वृद्ध देखभाल तथा दिव्यांगजन सहायता जैसी सेवाएँ सम्मिलित हैं।
केयर इकोनॉमी क्या है?
केयर इकोनॉमी उन सभी भुगतान और अप्रदत्त गतिविधियों को संदर्भित करती है जो बच्चों, वृद्धजनों एवं दिव्यांग व्यक्तियों की देखभाल से जुड़ी होती हैं।
यह कार्य मानव विकास, श्रम उत्पादकता और आधुनिक समाजों की सामाजिक कल्याण प्रणाली का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।
हाल ही में वियतनाम के राष्ट्रपति की भारत यात्रा के दौरान भारत और वियतनाम ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को "उन्नत व्यापक सामरिक साझेदारी" के स्तर तक ऊँचा किया।
भारत–वियतनाम संबंध
ऐतिहासिक विकास :भारत और वियतनाम के बीच प्राचीन सांस्कृतिक संबंध हैं, जिनमें बौद्ध धर्म, चंपा सभ्यता में हिंदू प्रभाव एवं समुद्री व्यापार संबंध शामिल हैं।
आधुनिक राजनयिक संबंध : 1972 में राजनयिक संबंध स्थापित हुए।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) द्वारा जारी आँकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में महिलाओं के विरुद्ध अपराधों के 13,396 मामले तथा बच्चों के विरुद्ध अपराधों के 7,662 मामले दर्ज किए गए।
प्रमुख निष्कर्ष
समग्र अपराध दर: 2023 की तुलना में 2024 में भारत की कुल अपराध दर में 6% की कमी आई, किंतु साइबर अपराध मामलों में 17% से अधिक वृद्धि दर्ज की गई।
महिलाओं के विरुद्ध अपराध: 1.5% की कमी, दर 66.2 से घटकर 64.6 प्रति लाख जनसंख्या।
अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने अपनी रिपोर्ट में सरकारों से आग्रह किया है कि वे श्रम बाज़ारों में तीव्र तकनीकी और संरचनात्मक परिवर्तनों के बीच आजीवन शिक्षा को आर्थिक एवं सामाजिक नीति का केंद्रीय स्तंभ बनाएँ।
आजीवन अधिगम क्या है?
आजीवन अधिगम का अर्थ है व्यक्ति के जीवनभर ज्ञान, कौशल और दक्षताओं का सतत् अर्जन। इसमें शामिल हैं:
हाल ही में गाज़ा, लेबनान और ईरान में हुए युद्धों सहित विभिन्न संघर्षों के दौरान बड़े पैमाने पर पर्यावरण क्षति के आरोपों के बीच "पर्यावरण संहार (Ecocide)" शब्द ने पुनः ध्यान आकर्षित किया है।
पर्यावरण संहार क्या है?
पर्यावरण संहार का अर्थ है मानव क्रियाओं से उत्पन्न गंभीर, व्यापक या दीर्घकालिक पर्यावरणीय क्षति।
यह शब्द 1970 में आर्थर डब्ल्यू. गैल्स्टन द्वारा वियतनाम युद्ध में एजेंट ऑरेंज से हुई पर्यावरणीय विध्वंश पर हुई परिचर्चा के दौरान दिया गया।
तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने चुनावी हार के बाद मुख्यमंत्री पद से त्येग्पत्र देने से मना कर दिया, परिणाम को षड्यंत्र बताते हुए चुनावों में धांधली और केंद्रीय बलों के दुरुपयोग का आरोप लगाया।
क्या आप जानते हैं?
चुनाव परिणाम घोषित होने के 45 दिनों के अंदर कलकत्ता उच्च न्यायालय में जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 100 के अंतर्गत चुनाव याचिका दायर कर चुनाव को चुनौती दी जा सकती है।