त्वरित विशेष न्यायालय योजना का विस्तार
पाठ्यक्रम: GS2/शासन
समाचार में
- केंद्रीय मंत्रिमंडल ने विशेष पॉक्सो न्यायालयों सहित त्वरित विशेष न्यायालयों (FTSCs) के लिए केंद्र प्रायोजित योजना (CSS) को आगामी पाँच वर्षों तक जारी रखने की स्वीकृति दी है।
त्वरित विशेष न्यायालय योजना
- त्वरित विशेष न्यायालयों के लिए केंद्र प्रायोजित योजना की शुरुआत वर्ष 2019 में आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम, 2018 के अनुसरण में तथा भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में की गई थी।
- सर्वोच्च न्यायालय ने निर्देश दिया था कि पॉक्सो अधिनियम, 2012 के अंतर्गत 100 से अधिक लंबित मामलों वाले जिलों में विशेष न्यायालयों की स्थापना की जाए।
- इस योजना को प्रारंभ में एक वर्ष की अवधि के लिए शुरू किया गया था तथा बाद में इसे 31 मार्च, 2026 तक विस्तारित किया गया।
- वर्तमान स्वीकृति के अंतर्गत योजना को आगामी पाँच वर्षों अर्थात् 31 मार्च, 2031 तक जारी रखा जाएगा।
स्वीकृत योजना की प्रमुख विशेषताएँ
- इस योजना का कार्यान्वयन न्याय विभाग द्वारा संबंधित राज्य सरकारों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रशासनों के समन्वय से किया जाएगा।
- इस योजना के अंतर्गत विभिन्न भाग लेने वाले राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में विशेष पॉक्सो न्यायालयों सहित 850 त्वरित विशेष न्यायालयों (FTSCs) को क्रियाशील बनाने का प्रावधान है।
- बलात्कार तथा लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम, 2012 के अंतर्गत आने वाले अपराधों से संबंधित लंबित मामलों का शीघ्र निपटारा सुनिश्चित करने के लिए एक समर्पित न्यायिक अधिकारी, विशेष लोक अभियोजक और 6 सहायक कर्मचारियों की व्यवस्था की जाएगी।
- केंद्र प्रायोजित योजना के वित्तपोषण प्रारूप के अनुसार, भाग लेने वाले राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को त्वरित विशेष न्यायालयों के परिचालन व्यय की पूर्ति हेतु वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
प्रभाव
- त्वरित न्याय की उपलब्धता: यौन अपराधों के पीड़ितों के लिए शीघ्र सुनवाई और समयबद्ध न्याय सुनिश्चित करना।
- लंबित मामलों में कमी: बलात्कार और पॉक्सो अधिनियम से संबंधित लंबित मामलों की संख्या कम करना।
- बाल-अनुकूल एवं पीड़ित-केंद्रित वातावरण: यह योजना संवेदनशील साक्षी बयान केंद्रों (VWDCs) और बाल-अनुकूल न्यायालयीन स्थानों की स्थापना को प्रोत्साहित करती है, ताकि पीड़ितों को अतिरिक्त मानसिक कष्ट पहुँचाए बिना उनकी गवाही दर्ज की जा सके।
- असमानता में कमी: महिलाओं और बच्चों जैसे संवेदनशील समूहों से संबंधित मामलों को प्राथमिकता देकर न्याय तक पहुँच में असमानताओं को कम करना।
स्रोत: PIB
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) चरण-II
पाठ्यक्रम: GS2/शासन
संदर्भ
- केंद्र सरकार ने स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) चरण-II को मार्च 2028 तक विस्तारित कर दिया है।
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण)
- इसे वर्ष 2014 में वर्ष 2019 तक देशव्यापी खुले में शौच से मुक्त (ODF) स्थिति प्राप्त करने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। वर्ष 2019–20 तक सभी जिलों को ODF घोषित कर दिया गया था।
- 31 दिसंबर, 2025 तक स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत 96% से अधिक गाँवों ने ODF प्लस का दर्जा प्राप्त कर लिया है।
- ODF प्लस गाँव वह है, जो अपनी खुले में शौच से मुक्त स्थिति को बनाए रखता है, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन सुनिश्चित करता है तथा दृश्य रूप से स्वच्छ बना रहता है।
- स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) चरण-II का कार्यान्वयन वर्ष 2020–21 से 2025–26 तक मिशन मोड में किया जा रहा था।
- स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) चरण-II का प्रमुख उद्देश्य गाँवों की ODF स्थिति को बनाए रखना तथा ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन संबंधी गतिविधियों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता के स्तर में सुधार करना है, जिससे गाँवों को ODF प्लस बनाया जा सके। इसमें निम्नलिखित शामिल हैं:
- ODF स्थिति की स्थिरता;
- ठोस अपशिष्ट प्रबंधन;
- तरल अपशिष्ट प्रबंधन;
- दृश्य स्वच्छता।
- केंद्र और राज्य सरकारें सभी घटकों की लागत निम्नलिखित अनुपात में साझा करती हैं:
- पूर्वोत्तर एवं हिमालयी राज्यों, जिनमें जम्मू-कश्मीर भी शामिल है, के लिए 90:10;
- अन्य राज्यों के लिए 60:40;
- केंद्रशासित प्रदेशों के लिए 100:0।
स्रोत: IE
QS एशिया रैंकिंग 2027
पाठ्यक्रम: GS2/शिक्षा; विविध
संदर्भ
- QS एशिया विश्वविद्यालय रैंकिंग 2027 के अनुसार, लगभग 71% भारतीय विश्वविद्यालयों की रैंकिंग में गिरावट दर्ज की गई है।
रैंकिंग के बारे में
- इसे अंतरराष्ट्रीय उच्च शिक्षा विश्लेषण संगठन QS क्वाक्वेरेली साइमंड्स द्वारा जारी किया जाता है। इसके अंतर्गत एशिया के विश्वविद्यालयों का मूल्यांकन किया जाता है।
- वर्ष 2027 के संस्करण में 26 उच्च शिक्षा प्रणालियों के 1,722 विश्वविद्यालय शामिल हैं।
- इस रैंकिंग में विश्वविद्यालयों का मूल्यांकन 11 संकेतकों के आधार पर किया जाता है। इनमें शैक्षणिक प्रतिष्ठा, नियोक्ता प्रतिष्ठा, संकाय-छात्र अनुपात, प्रति शोध-पत्र उद्धरण, प्रति संकाय सदस्य शोध-पत्रों की संख्या, पीएचडी धारक कर्मचारी, अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान नेटवर्क, अंतरराष्ट्रीय संकाय और छात्र गतिशीलता आदि शामिल हैं।
- शैक्षणिक प्रतिष्ठा को सर्वाधिक 30% भारांक दिया गया है, जबकि नियोक्ता प्रतिष्ठा को 20% भारांक दिया गया है।
प्रमुख मुख्य बिंदु: वैश्विक स्तर
- हांगकांग विश्वविद्यालय ने अपना प्रथम स्थान बरकरार रखा, जिसके बाद पेकिंग विश्वविद्यालय दूसरे स्थान पर रहा।
- सिंघुआ विश्वविद्यालय छह स्थान ऊपर चढ़कर तीसरे स्थान पर पहुँच गया।
- शीर्ष 10 में हांगकांग के पाँच, मुख्य भूमि चीन के तीन और सिंगापुर के दो विश्वविद्यालय शामिल रहे।

प्रमुख मुख्य बिंदु: भारत
- भारत के प्रतिनिधित्व में वृद्धि हुई है। विगत वर्ष के 294 संस्थानों की तुलना में इस वर्ष 325 संस्थान शामिल हुए हैं। इस प्रकार, मुख्य भूमि चीन के बाद भारत क्षेत्र की दूसरी सबसे अधिक प्रतिनिधित्व वाली उच्च शिक्षा प्रणाली बन गया है। मुख्य भूमि चीन के संस्थानों की संख्या 395 से बढ़कर 448 हो गई है।
- वर्ष 2016 से भारत का प्रतिनिधित्व 24 संस्थानों से बढ़कर 325 संस्थानों तक पहुँच गया है, अर्थात् इसमें तेरह गुना से अधिक वृद्धि हुई है।
- केवल छह भारतीय संस्थान शीर्ष 100 में स्थान प्राप्त कर सके हैं। नवीनतम संस्करण में इन सभी की रैंकिंग में गिरावट आई है।
- देश के सर्वोच्च रैंकिंग वाले संस्थान IIT दिल्ली की रैंकिंग विगत संस्करण के 59वें स्थान से सात स्थान गिरकर 66वें स्थान पर आ गई है।

स्रोत: IE
सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय गैर-काल्पनिक पुस्तक के लिए शारजाह पुरस्कार
पाठ्यक्रम: विविध
संदर्भ
- निर्मला लक्ष्मण को उनकी पुस्तक ‘द तमिल्स: ए पोर्ट्रेट ऑफ अ कम्युनिटी’ के लिए सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय गैर-काल्पनिक पुस्तक का शारजाह पुरस्कार प्रदान किया गया है।
पुस्तक के बारे में
- ऐतिहासिक शोध और व्यक्तिगत अवलोकनों पर आधारित यह पुस्तक तमिल समुदाय के इतिहास, समाज और संस्कृति का विश्लेषण करती है। इसमें सदियों के दौरान इस समुदाय के विकास तथा भौगोलिक सीमाओं से परे इसके प्रभाव का वर्णन किया गया है।
- तमिल संस्कृति के परिचित प्रतीकों, जैसे चोल वंश, मंदिरों, कर्नाटक संगीत और शास्त्रीय साहित्य से आगे बढ़ते हुए यह पुस्तक तमिल विरासत के कई कम ज्ञात पहलुओं को भी उजागर करती है।
सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय पुस्तक के लिए शारजाह पुरस्कार
- यह पुरस्कार दो श्रेणियों में उत्कृष्ट एवं विशिष्ट अंतरराष्ट्रीय पुस्तकों को सम्मानित करता है:
- सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय काल्पनिक पुस्तक के लिए 50,000 UAE दिरहम का पुरस्कार।
- सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय गैर-काल्पनिक पुस्तक के लिए 50,000 UAE दिरहम का पुरस्कार।
स्रोत: TH
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संक्षिप्त समाचार 05-11-2026