मंत्रिमंडल द्वारा अग्निवीरों के लिए दो वर्ष की सेवा-विस्तार अवधि को स्वीकृति

पाठ्यक्रम: GS3/रक्षा

संदर्भ

  • केंद्रीय मंत्रिमंडल ने उन 75% अग्निवीरों के लिए अतिरिक्त दो वर्ष की सेवा अवधि को स्वीकृति दी है, जिन्हें अपनी प्रारंभिक चार वर्ष की सेवा अवधि पूरी होने के बाद नियमित सेवा के लिए चयनित नहीं किया जाता है।

अग्निपथ योजना के बारे में

  • इसे वर्ष 2022 में शुरू किया गया था और इसे टूर ऑफ ड्यूटी योजना भी कहा जाता है।
  • यह भारतीय थल सेना, भारतीय नौसेना और भारतीय वायु सेना में अल्पकालिक भर्ती की योजना है।
  • इस नीति के अंतर्गत, अधिकारी रैंक से नीचे के कार्मिक संवर्ग (PBOR) में ‘अग्निवीरों’ की चार वर्ष के लिए भर्ती की जाती है। इस अवधि के अंत में प्रत्येक बैच के केवल 25% भर्ती किए गए अग्निवीरों को 15 वर्ष की नियमित सेवा के लिए बनाए रखा जाता है।
  • आयु सीमा: 17.5 वर्ष से 21 वर्ष की आयु के अभ्यर्थी अग्निपथ योजना के अंतर्गत भर्ती के लिए पात्र हैं।
  • वेतन, भत्ते एवं अन्य लाभ:
    • प्रथम वर्ष: अनुकूलित वेतन पैकेज – ₹30,000/- + भत्ते।
    • द्वितीय वर्ष: अनुकूलित वेतन पैकेज – ₹33,000/- + भत्ते।
    • तृतीय वर्ष: अनुकूलित वेतन पैकेज – ₹36,500/- + भत्ते।
    • चतुर्थ वर्ष: अनुकूलित वेतन पैकेज – ₹40,000/- + भत्ते।
    • उपर्युक्त वेतन पैकेज का 30% प्रत्येक माह अनिवार्य रूप से एक निधि में जमा किया जाएगा, जिसमें भारत सरकार भी समान राशि का योगदान करेगी।
    • सेवा निधि पैकेज: चार वर्ष की सेवा पूरी होने पर कार्यमुक्त किए जाने के समय, निधि में जमा ₹5.02 लाख की राशि के बराबर योगदान भारत सरकार द्वारा किया जाएगा। इस प्रकार, अग्निवीरों को ₹10.04 लाख की राशि और उस पर अर्जित ब्याज प्रदान किया जाएगा। सेवा निधि को आयकर से छूट प्राप्त है।
  • अग्निवीरों को उनकी सेवा अवधि के दौरान ₹48 लाख का अंशदान-रहित जीवन बीमा कवर प्रदान किया जाता है।
    • वे सेना समूह बीमा निधि (AGIF) की योजनाओं एवं लाभों के लिए पात्र नहीं हैं।
  • यह योजना देश की सेवा करने के इच्छुक भारतीय युवाओं को अल्प अवधि के लिए सशस्त्र बलों में भर्ती होने का अवसर प्रदान करती है।
    • यह योजना सशस्त्र बलों के युवा स्वरूप को सुदृढ़ करती है।

अतिरिक्त सेवा अवधि

  • योग्यता के आधार पर 25% अग्निवीरों को नियमित सेवा में शामिल करने का वर्तमान प्रावधान जारी रहेगा।
  • शेष 75% अग्निवीरों को अतिरिक्त दो वर्ष की सेवा का अवसर दिया जाएगा।
  • इस अवधि को पूरा करने के बाद वे नियमित सैनिकों के रूप में भर्ती होने के पात्र होंगे, बशर्ते वे इसके लिए इच्छुक हों और चयन मानदंडों को पूरा करते हों।
  • उद्देश्य: अग्निवीरों की आकांक्षाओं को सशस्त्र बलों की परिचालन संबंधी आवश्यकताओं और संगठनात्मक दक्षता के अनुरूप बनाना।
  • सेवा संबंधी शर्तें: दूसरी सेवा अवधि में अधिक पारिश्रमिक, उन्नत सेवा निधि पैकेज और वरिष्ठता संबंधी लाभ प्रदान किए जाएँगे।

योजना का महत्त्व

  • सैन्य बलों में औसत आयु कम करना: विशेष रूप से थल सेना में सैनिकों की औसत आयु कम करने पर 1980 के दशक से सैन्य बलों के अंदर ध्यान दिया जाता रहा है।
  • रक्षा व्यय में कमी: यह वेतन, पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों से संबंधित दीर्घकालिक वित्तीय भार को कम करने में सहायता करती है। इससे रक्षा क्षेत्र के आधुनिकीकरण के लिए अधिक राजकोषीय गुंजाइश उपलब्ध होती है।
  • तकनीकी रूप से उन्नत भविष्य: भविष्य के युद्ध कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वायत्त प्रणालियों, साइबर स्पेस और अंतरिक्ष-आधारित खुफिया, निगरानी एवं टोही (ISR) तकनीकों के माध्यम से लड़े जाएँगे।
    • भारत में अग्निपथ योजना सशस्त्र बलों को युवा और तकनीकी रूप से दक्ष स्वरूप प्रदान करना सुनिश्चित करेगी।
  • रोजगार: यह योजना रोजगार के अवसरों में वृद्धि करेगी। चार वर्ष की सेवा के दौरान अर्जित कौशल और अनुभव के कारण ऐसे सैनिकों को विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार प्राप्त हो सकेगा।
    • इससे अर्थव्यवस्था को अधिक कौशलयुक्त कार्यबल उपलब्ध होगा, जो उत्पादकता में वृद्धि और समग्र सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि में सहायक होगा।
  • आपदा प्रबंधन: सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त युवा प्राकृतिक आपदाओं के दौरान आपदा प्रतिक्रिया, बचाव कार्यों और आपातकालीन प्रबंधन में सहायता कर सकते हैं।

चिंताएँ एवं चुनौतियाँ

  • करियर संबंधी अनिश्चितता: नियमित सेवा में भर्ती अब भी योग्यता, रिक्तियों और चयन मानदंडों पर निर्भर रहेगी।
  • रैंक में असमानता: छह वर्ष की सेवा के बाद नियमित सेवा में शामिल होने वाले अग्निवीरों को उन अग्निवीरों की तुलना में एक रैंक नीचे रखा जाएगा, जिन्हें चार वर्ष बाद ही नियमित सेवा के लिए बनाए रखा गया था।
  • राजकोषीय समझौता: अधिक वेतन, बड़ी सेवा निधि और लंबी सेवा अवधि से प्रति व्यक्ति व्यय बढ़ता है। दीर्घकाल में पेंशन संबंधी देनदारी भी पुनः उत्पन्न होती है।
  • कौशल विकास का अनसुलझा प्रश्न: 22 वर्ष के बजाय 24 वर्ष की आयु में सेवा से बाहर होना सहायक है, लेकिन प्रमाणन और अन्य सेवाओं में पार्श्व प्रवेश के माध्यम से पूर्व अग्निवीरों का नागरिक कार्यक्षेत्र में समावेशन अभी भी सीमित है।
  • जनशक्ति नियोजन: सशस्त्र बलों को युवावस्था, अनुभव और दीर्घकालिक संस्थागत आवश्यकताओं के बीच संतुलन बनाए रखना होगा।

निष्कर्ष

  • अतिरिक्त सेवा अवधि का निर्णय अग्निपथ योजना के प्रथम चार वर्षों के विस्तृत आकलन और सशस्त्र बलों की सिफारिशों के आधार पर लिया गया है।
  • यह निर्णय रक्षा बलों में दीर्घकालिक संरचनात्मक सुधारों की निरंतरता है, जिसका उद्देश्य एक युवा, अधिक सक्षम, तकनीकी रूप से सुसज्जित और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार सैन्य बल का निर्माण करना है।

स्रोत: TH

 

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