- गृह मंत्रालय के अनुसार, 1 जनवरी, 2027 से नए आपराधिक कानूनों के अंतर्गत होने वाली सभी जाँचों एवं न्यायिक ट्रायल से संबंधित प्रक्रियाओं का डिजिटल रूप से अभिलेखन किया जाएगा।
- अंतर-संचालनीय आपराधिक न्याय प्रणाली की स्थापना पुलिस (CCTNS), न्यायालय (e-Courts), कारागार (e-Prisons), विधि विज्ञान प्रयोगशालाओं (e-Forensics) तथा अभियोजन (e-Prosecution) प्रणालियों को एकीकृत करके की गई है।
- राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) इस परियोजना के क्रियान्वयन हेतु नोडल एजेंसी है, जबकि राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) प्रौद्योगिकी साझेदार के रूप में कार्य कर रहा है। Read More
भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली के डिजिटलीकरण को प्रोत्साहन
संदर्भ
परिचय