भारत में एक समग्र देखभाल प्रणाली का निर्माण 

पाठ्यक्रम: GS1/ समाज, GS3/ अर्थव्यवस्था

संदर्भ 

  • महिलाओं की कार्यबल में भागीदारी, मानव विकास तथा वृद्ध होती जनसंख्या को सहायता प्रदान करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका के बावजूद, भारत की देखभाल अर्थव्यवस्था अभी भी विखंडित एवं असंगठित बनी हुई है।

देखभाल अर्थव्यवस्था क्या है?

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, देखभाल कार्य में उन व्यक्तियों को शारीरिक, भावनात्मक एवं सामाजिक सहायता प्रदान करना शामिल है, जो आयु, बीमारी अथवा दिव्यांगता के कारण दैनिक गतिविधियों को स्वतंत्र रूप से करने में असमर्थ होते हैं।
  • – वर्ष 2023 में भारत के देखभाल सेवा बाजार का मूल्य 29.62 अरब अमेरिकी डॉलर था। इसके वर्ष 2030 तक 13.76 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बढ़कर 72.31 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है।

भारत की देखभाल अर्थव्यवस्था के घटक

  • अवैतनिक देखभाल कार्य : इसमें बाल देखभाल, वृद्धजनों की देखभाल, खाना बनाना, साफ-सफाई, घरेलू प्रबंधन तथा बीमार परिवार के सदस्यों की देखभाल जैसी गतिविधियाँ शामिल हैं। ये गतिविधियाँ पारिवारिक कल्याण के लिए अत्यंत आवश्यक हैं, किंतु इन्हें मुख्यतः अवैतनिक एवं अपरिचित श्रम के रूप में देखा जाता है।
  • सवैतनिक देखभाल कार्य: इसमें स्वास्थ्यकर्मियों, नर्सों, चिकित्सकों, आशा कार्यकर्ताओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, घरेलू कामगारों, बाल देखभाल प्रदाताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा देखभालकर्ताओं द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाएँ शामिल हैं।
    • ये सेवाएँ भारत के सामाजिक एवं आर्थिक आधारभूत ढाँचे का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा हैं।
  • सामुदायिक देखभाल सेवाएँ : सामुदायिक स्तर पर प्रदान की जाने वाली देखभाल सेवाओं में स्वयं सहायता समूहों (SHGs), सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं तथा कल्याणकारी कार्यक्रमों के माध्यम से संचालित सहायता प्रणालियाँ शामिल हैं, जो समाज के कमजोर एवं संवेदनशील वर्गों को सहायता प्रदान करती हैं।

भारत को एक समग्र देखभाल प्रणाली की आवश्यकता क्यों है?

  • महिलाओं की श्रमबल में भागीदारी : आवधिक श्रमबल सर्वेक्षण (PLFS), 2025 के अनुसार, श्रमबल से बाहर रहने वाली 44.4 प्रतिशत महिलाओं ने बाल देखभाल एवं घरेलू कार्यों को इसका प्रमुख कारण बताया।
  • अवैतनिक देखभाल कार्य का असमान भार:भारत के समय उपयोग सर्वेक्षण , 2024 के अनुसार, 15–59 वर्ष आयु वर्ग की 41 प्रतिशत महिलाएँ अवैतनिक देखभाल कार्यों में संलग्न थीं।
  • जनसांख्यिकीय संक्रमण : भारत में वृद्ध जनसंख्या के निरंतर विस्तार के कारण दीर्घकालिक वृद्धजन देखभाल सेवाओं की आवश्यकता बढ़ रही है।
  • शहरीकरण एवं प्रवासन : तीव्र शहरीकरण एवं प्रवासन के कारण संयुक्त परिवार व्यवस्था का क्षरण हो रहा है। एकल परिवारों में सामान्यतः देखभाल एवं सहायता प्रदान करने वाले अनौपचारिक पारिवारिक एवं सामाजिक नेटवर्क का अभाव होता है।

देखभाल अर्थव्यवस्था से संबंधित सरकारी पहलें 

  • SHATAYU (आपकी सुविधा के लिए वरिष्ठ होलिस्टिक केयर सहायता और प्रशिक्षण) डैशबोर्ड: वर्ष 2026 में आयोजित ‘एक सुव्यवस्थित देखभाल अर्थव्यवस्था का निर्माण’ विषयक राष्ट्रीय कार्यशाला के दौरान इस डैशबोर्ड का शुभारंभ किया गया।
    • इसका उद्देश्य देशभर में वरिष्ठ नागरिकों के लिए देखभाल सेवाओं को सहायता प्रदान करना तथा उन्हें सुदृढ़ बनाना है।
  • JEEVAN (संयुक्त बुजुर्ग सशक्तिकरण एवं वर्चुअल सहायता नेटवर्क)एप्लिकेशन: यह एक सुलभ एवं नागरिक-केंद्रित मोबाइल एप्लिकेशन है, जिसे वरिष्ठ नागरिकों के लिए एकल-खिड़की सहायता प्रणाली के रूप में विकसित किया गया है।
    • यह एप्लिकेशन सरकारी कल्याणकारी योजनाओं, वृद्धाश्रमों तथा सहायता सेवाओं से संबंधित जानकारी को एक ही मंच पर उपलब्ध कराता है।
  • वयो मानस संजीवनी : यह वरिष्ठ नागरिकों में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सहायता को बढ़ावा देने तथा स्वस्थ वृद्धावस्था सुनिश्चित करने के लिए जागरूकता एवं ऑनलाइन शिक्षा प्रदान करने की एक पहल है।
  • सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0 : यह आंगनवाड़ी नेटवर्क के माध्यम से प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल, विकास एवं पोषण संबंधी सहायता प्रदान करता है।
  • पालना योजना : इस योजना के अंतर्गत शिशुगृह (Crèche) सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाती हैं, ताकि विशेष रूप से कामकाजी माताओं को बाल देखभाल में सहायता मिल सके।

राज्य सरकारों द्वारा की गई पहलें

  • द्धजन देखभालकर्ता प्रशिक्षण कार्यक्रम: ओडिशा सरकार द्वारा तीन माह का प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम संचालित किया जाता है, जिसके अंतर्गत वृद्धजनों को शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सहायता प्रदान करने के लिए प्रशिक्षण दिया जाता है।
  • अवैतनिक देखभालकर्ताओं के लिए मासिक भत्ता : कर्नाटक भारत का प्रथम राज्य बना, जिसने ‘केयरर मासिक भत्ता योजना’ प्रारंभ की।
    • इस योजना के अंतर्गत सेरेब्रल पाल्सी, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, पार्किंसन रोग तथा मल्टीपल स्क्लेरोसिस जैसी गंभीर दिव्यांगताओं से ग्रस्त व्यक्तियों के माता-पिता को प्रतिमाह 1,000 रुपये का भत्ता प्रदान किया जाता है।

देखभाल अर्थव्यवस्था संबंधी सुधारों के क्रियान्वयन में चुनौतियाँ 

  • वित्तीय बाधाएँ : देखभाल संबंधी आधारभूत संरचना के विस्तार तथा कर्मचारियों के प्रशिक्षण के लिए पर्याप्त सार्वजनिक निवेश और दीर्घकालिक वित्तीय प्रतिबद्धता की आवश्यकता होगी।
  • संस्थागत समन्वय का अभाव : देखभाल संबंधी कार्य महिला एवं बाल विकास मंत्रालय से लेकर आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय तक अनेक मंत्रालयों में विभाजित हैं। प्रत्येक मंत्रालय महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम संचालित करता है, किंतु इनके बीच एक साझा नीतिगत ढाँचे का अभाव है।
  • देखभाल कार्य के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण : देखभाल कार्य को अभी भी सार्वजनिक नीतिगत विषय के बजाय परिवार की निजी जिम्मेदारी के रूप में देखा जाता है।
    • समाज में गहराई से व्याप्त पितृसत्तात्मक परंपराएँ अवैतनिक देखभाल कार्य के महत्त्व को मान्यता देने में बाधा उत्पन्न करती हैं।
  • कमजोर नियामक क्षमता : देशभर में देखभाल संस्थानों के लिए गुणवत्ता मानकों को सुनिश्चित करना तथा उनकी निगरानी करना एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती है।
  • कुशल देखभाल कार्यबल का अभाव : भारत में विशेष रूप से वृद्धजन देखभाल, दिव्यांगजन देखभाल तथा प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल के क्षेत्रों में पर्याप्त रूप से प्रशिक्षित कार्यबल का अभाव है।

अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाएँ 

  • कोलंबिया : वर्ष 2025 की राष्ट्रीय देखभाल नीति के अंतर्गत 34 सरकारी संस्थाओं को एक साझा नीतिगत ढाँचे के अंतर्गत लाया गया है।
  • ब्राज़ील : वर्ष 2024 की राष्ट्रीय देखभाल नीति तथा वर्ष 2025 की राष्ट्रीय देखभाल योजना के अंतर्गत इनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अंतर-मंत्रालयी समितियों की स्थापना की गई है।
  • नेपाल : नेपाल में भौगोलिक सूचना प्रणाली एवं जनसांख्यिकीय देखभाल मानचित्रण का उपयोग करके बाल देखभाल, वृद्धजन देखभाल तथा दिव्यांगजन सहायता सेवाओं में वर्तमान कमियों की पहचान की गई।
    • इस प्रक्रिया के माध्यम से आँकड़ों को स्थानीय सेवा प्रारूपों में परिवर्तित किया गया तथा देखभाल संबंधी प्रायोगिक परियोजनाओं के लिए वित्तपोषण की व्यवस्था की गई।

आगे की राह 

  • नीति आयोग की सिफारिशें: नीति आयोग की रिपोर्ट ‘देखभाल की नई परिकल्पना: विकसित भारत@2047 में देखभाल करने वालों को सशक्त बनाने की रणनीतियाँ’ में समन्वय को सुदृढ़ बनाने के लिए राष्ट्रीय देखभाल परिषद की स्थापना का प्रस्ताव दिया गया है।
  • देखभाल संबंधी आवश्यकताओं का मानचित्रण: राज्यों को बाल देखभाल, वृद्धजन देखभाल तथा दिव्यांगजन सहायता सेवाओं में विद्यमान कमियों की पहचान करने के लिए देखभाल संबंधी आवश्यकताओं, वर्तमान सुविधाओं तथा जनसांख्यिकीय रुझानों का मानचित्रण करना चाहिए।
  • देखभाल कार्यबल का व्यावसायीकरण : देखभालकर्ताओं के लिए मानकीकृत प्रशिक्षण, प्रमाणन तथा कौशल विकास कार्यक्रम प्रारंभ किए जाने चाहिए, ताकि एक कुशल, प्रशिक्षित एवं पेशेवर देखभाल कार्यबल का निर्माण किया जा सके।

स्रोत: TH

 

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