पाठ्यक्रम: GS3/ अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- IDBI बैंक में अपनी हिस्सेदारी की रणनीतिक बिक्री को सरकार की स्वीकृति मिलने से राजकोषीय समेकन तथा अर्थव्यवस्था में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने के साधन के रूप में विनिवेश को लेकर परिचर्चा पुनः प्रारंभ हो गई है।
भारत सरकार की विनिवेश नीति
- विनिवेश संबंधी सरकारी नीति में केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (CPSEs) में रणनीतिक विनिवेश/निजीकरण तथा अल्पांश हिस्सेदारी की बिक्री शामिल है।
- रणनीतिक विनिवेश से तात्पर्य किसी केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम में सरकार की संपूर्ण अथवा पर्याप्त हिस्सेदारी की बिक्री के साथ-साथ प्रबंधन नियंत्रण के हस्तांतरण से है।
- निजीकरण, जो रणनीतिक विनिवेश का ही एक उप-प्रकार है, के अंतर्गत केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम में सरकार की इक्विटी हिस्सेदारी और प्रबंधन नियंत्रण किसी निजी रणनीतिक खरीदार को हस्तांतरित कर दिया जाता है। रणनीतिक विनिवेश के अन्य मामलों में सरकार की इक्विटी हिस्सेदारी और नियंत्रण किसी अन्य केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम को हस्तांतरित किया जाता है।
- कुछ केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों में अल्पांश हिस्सेदारी की बिक्री प्रबंधन नियंत्रण का हस्तांतरण किए बिना, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा अनुमोदित विभिन्न विधियों के माध्यम से की जाती है। इनमें प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO), बिक्री प्रस्ताव (OFS), शेयरों की पुनर्खरीद आदि शामिल हैं।
- ये विधियाँ निम्नलिखित तरीकों से पूँजी बाजार को सुदृढ़ करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं:
- बेहतर प्रदर्शन करने वाले केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों के सार्वजनिक रूप से उपलब्ध शेयरों की संख्या में वृद्धि करना।
- खुदरा निवेशकों को विभिन्न प्रकार के शेयरों में निवेश करने का अवसर प्रदान करना।
- पूँजी बाजार की तरलता और गहराई में वृद्धि करना।
नई सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम (PSE) नीति
- आत्मनिर्भर भारत के लिए नई सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम (PSE) नीति को मंत्रिमंडल की स्वीकृति के बाद वर्ष 2021 में अधिसूचित किया गया था। यह नीति रणनीतिक विनिवेश के संबंध में समग्र मार्गदर्शन प्रदान करती है।
- इस नीति का उद्देश्य अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों में सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों में सरकार की उपस्थिति को न्यूनतम करना है।
- इसके अंतर्गत वर्तमान केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों तथा सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियों को शामिल किया गया है।
- विनिवेश किए जाने वाले क्षेत्रों का द्वि-स्तरीय वर्गीकरण:
- रणनीतिक क्षेत्र: इन क्षेत्रों में सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों की उपस्थिति न्यूनतम रखी जाएगी। शेष उद्यमों का निजीकरण किया जाएगा अथवा उनका अन्य केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों के साथ विलय किया जाएगा, उन्हें सहायक कंपनियों में परिवर्तित किया जाएगा या बंद कर दिया जाएगा।
- इसके अंतर्गत निम्नलिखित चार क्षेत्र शामिल हैं:
- परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष और रक्षा।
- परिवहन और दूरसंचार।
- विद्युत, पेट्रोलियम, कोयला और अन्य खनिज।
- बैंकिंग, बीमा और वित्तीय सेवाएँ।
- इसके अंतर्गत निम्नलिखित चार क्षेत्र शामिल हैं:
- गैर-रणनीतिक क्षेत्र: इस क्षेत्र के केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों का निजीकरण किया जाएगा। अन्यथा उन्हें बंद कर दिया जाएगा।
निवेश एवं सार्वजनिक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM)
- विनिवेश विभाग की स्थापना वर्ष 1999 में एक अलग विभाग के रूप में की गई थी।
- वर्ष 2016 से इसका नाम बदलकर निवेश एवं सार्वजनिक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) कर दिया गया।
- वर्तमान कार्य आवंटन नियमों के अनुसार, इस विभाग का अधिदेश निम्नलिखित है:
- केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में इक्विटी हिस्सेदारी के विनिवेश सहित, इक्विटी में केंद्र सरकार के निवेश के प्रबंधन से संबंधित सभी मामले।
- पूर्ववर्ती केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में बिक्री प्रस्ताव, निजी नियोजन अथवा किसी अन्य माध्यम से केंद्र सरकार की इक्विटी हिस्सेदारी की बिक्री से संबंधित सभी मामले।
विनिवेश का महत्त्व
- सार्वजनिक परिसंपत्तियों का अधिकतम उपयोग: विनिवेश से सरकारी निवेश का मूल्य प्राप्त करने और पूँजी को अन्य सार्वजनिक उद्देश्यों के लिए उपलब्ध कराने में सहायता मिल सकती है।
- राजस्व का संग्रहण: DIPAM के आँकड़ों के अनुसार, सरकार ने अप्रैल–सितंबर 2026 के दौरान विनिवेश और परिसंपत्ति मौद्रीकरण के माध्यम से 62,124 करोड़ रुपये एकत्रित किए, जिनमें से 55,757 करोड़ रुपये विनिवेश से प्राप्त हुए।
- यह संग्रह पूरे वर्ष के लिए निर्धारित 80,000 करोड़ रुपये के बजटीय लक्ष्य का लगभग 78% था।
- व्यय संबंधी दबावों का प्रबंधन: अप्रैल–अगस्त 2026 के दौरान शुद्ध कर राजस्व में 3.4% की वृद्धि हुई, जबकि पूँजीगत व्यय में 18% से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई।
- विनिवेश से प्राप्तियाँ परस्पर प्रतिस्पर्धी व्यय संबंधी प्रतिबद्धताओं के बीच अतिरिक्त राजकोषीय संसाधन उपलब्ध करा सकती हैं।
- परिचालन दक्षता में सुधार: निजी क्षेत्र की भागीदारी से अधिक प्रभावी व्यावसायिक प्रोत्साहन, पेशेवर प्रबंधन और बेहतर जवाबदेही को बढ़ावा मिल सकता है।
- प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा: जहाँ पर्याप्त सुरक्षा उपाय विद्यमान हों, वहाँ निजी क्षेत्र की भागीदारी से सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार, नवाचार को प्रोत्साहन तथा प्रतिस्पर्धा को सुदृढ़ किया जा सकता है।
भारत में विनिवेश प्रक्रिया की चुनौतियाँ
- बाजार की अनिश्चित परिस्थितियाँ: निवेशकों का कमजोर विश्वास, मूल्यांकन में उतार-चढ़ाव और क्षेत्र-विशिष्ट जोखिम लेन-देन में देरी कर सकते हैं अथवा बिक्री से प्राप्त राशि को कम कर सकते हैं।
- मूल्यांकन संबंधी चिंताएँ: सार्वजनिक परिसंपत्तियों को उनके उचित आर्थिक मूल्य से कम कीमत पर बेचने से सरकारी खजाने को दीर्घकालिक हानि हो सकती है।
- रोजगार संबंधी चिंताएँ: कर्मचारियों को रोजगार की सुरक्षा, सेवा शर्तों और भविष्य में पुनर्गठन को लेकर अनिश्चितता का सामना करना पड़ सकता है।
- राजस्व की अनिश्चितता: विनिवेश प्राप्तियाँ एकमुश्त आय का स्रोत हैं और इनके माध्यम से नियमित कर राजस्व की निरंतर एवं सतत रूप से पूर्ति नहीं की जा सकती।
आगे की राह
- विनिवेश का मार्गदर्शन दीर्घकालिक आर्थिक दक्षता और राज्य की उपयुक्त भूमिका के आधार पर किया जाना चाहिए, न कि केवल वार्षिक राजस्व लक्ष्यों की पूर्ति के उद्देश्य से।
- सरकारी खजाने को उचित प्रतिफल सुनिश्चित करने के लिए मूल्यांकन की विभिन्न विधियों, पारदर्शी बोली प्रक्रिया और पर्याप्त प्रतिस्पर्धा का उपयोग किया जाना चाहिए।
- जहाँ तक संभव हो, विनिवेश से प्राप्त राशि का उपयोग पूँजी निर्माण और उत्पादक सार्वजनिक निवेश के लिए किया जाना चाहिए, न कि इसे टिकाऊ राजकोषीय प्रबंधन के विकल्प के रूप में अपनाया जाना चाहिए।
निष्कर्ष
- विनिवेश सरकार की विकास संबंधी जिम्मेदारियों और अधिक आर्थिक दक्षता तथा निजी क्षेत्र की भागीदारी की आवश्यकता के बीच संतुलन स्थापित करने में सहायता कर सकता है।
- हालाँकि, विनिवेश की दीर्घकालिक सफलता का आकलन केवल राजस्व संग्रह के आधार पर नहीं, बल्कि दक्षता में सुधार, परिसंपत्तियों के बेहतर उपयोग और आर्थिक मूल्य सृजन के आधार पर किया जाना चाहिए।
| दैनिक मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न [प्रश्न: विनिवेश केवल एक राजकोषीय साधन ही नहीं है, बल्कि अर्थव्यवस्था में राज्य की भूमिका के पुनर्गठन का माध्यम भी है। इसके महत्त्व, चुनौतियों तथा भारत की विनिवेश नीति को अधिक प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक उपायों पर चर्चा कीजिए। |
स्रोत: TH
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