जनगणना (संशोधन) नियम, 2026
पाठ्यक्रम: GS2/राजव्यवस्था एवं शासन
संदर्भ
- गृह मंत्रालय (MHA) ने जनगणना (संशोधन) नियम, 2026 अधिसूचित किए हैं, जिनके अंतर्गत जनगणना प्रगणकों के रूप में नियुक्ति के लिए पात्र व्यक्तियों की श्रेणियों का विस्तार किया गया है।
परिचय
- यह संशोधन जनगणना अधिनियम, 1948 के अंतर्गत निर्मित जनगणना नियम, 1990 के नियम 3 में बदलाव करता है। इसके अंतर्गत नियमों की तालिका में उल्लिखित पात्र श्रेणियों को संशोधित किया गया है।
- संशोधित नियमों के अंतर्गत निम्नलिखित श्रेणियों के व्यक्तियों को प्रगणक के रूप में नियुक्त किया जा सकता है:
- शिक्षक: सरकारी, स्थानीय प्राधिकरणों, सहायता प्राप्त या गैर-सहायता प्राप्त निजी शैक्षणिक संस्थानों, समितियों और न्यासों में कार्यरत शिक्षक।
- लिपिक एवं अधिकारी: केंद्र और राज्य सरकारों, स्थानीय प्राधिकरणों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, वैधानिक निकायों, बैंकों, कंपनियों, संस्थानों, समितियों और न्यासों में कार्यरत लिपिक एवं अधिकारी।
- अन्य उपयुक्त व्यक्ति: ऐसे व्यक्ति जिन्हें संबंधित राज्य सरकार या केंद्रशासित प्रदेश प्रशासन उपयुक्त मानता है।
- इन संशोधनों का उद्देश्य प्रगणकों के प्रतिनिधित्व का विस्तार करना तथा जनगणना संबंधी कार्यों के लिए योग्य व्यक्तियों का व्यापक समूह उपलब्ध कराना है।
जनगणना प्रगणकों की भूमिका
- भारत की जनगणना के संचालन में प्रगणक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे घर-घर जाकर जनसांख्यिकीय, सामाजिक और आर्थिक जानकारी एकत्र करते हैं तथा यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रत्येक व्यक्ति की गणना हो।
- वे नागरिकों और जनगणना प्रशासन के बीच प्राथमिक संपर्क कड़ी के रूप में कार्य करते हैं। उनके द्वारा एकत्र किए गए विश्वसनीय आँकड़े सरकारी नियोजन और नीति-निर्माण में सहायता करते हैं।
भारत की जनगणना
- भारत में जनगणना अधिनियम, 1948 के अंतर्गत प्रत्येक 10 वर्ष में एक बार जनसंख्या जनगणना की जाती है।
- विगत जनगणना वर्ष 2011 में आयोजित की गई थी।
- कोविड-19 महामारी के कारण वर्ष 2021 की जनगणना स्थगित कर दी गई थी।
स्रोत: DD
भारतीय प्रेस परिषद (PCI)
पाठ्यक्रम: GS2/राजव्यवस्था एवं शासन
संदर्भ
- भारतीय प्रेस परिषद (PCI) ने विरोध प्रदर्शनों और धरनों की “व्यवस्थित एवं प्रभावी कवरेज” को सुगम बनाने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
दिशा-निर्देश
- पत्रकारों को अपने मीडिया संगठन द्वारा जारी वैध प्रेस पहचान-पत्र स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करना चाहिए।
- तटस्थता और व्यावसायिकता बनाए रखनी चाहिए।
- सम्मानजनक व्यवहार करना चाहिए, पुलिस के आदेशों का पालन करना चाहिए, तनावपूर्ण परिस्थितियों में बहस से बचना चाहिए तथा वैध निर्देशों का अनुपालन करना चाहिए।
- पत्रकारों को टकराव वाली परिस्थितियों से उचित और सुरक्षित दूरी बनाए रखने की परामर्श दी गई है।
- नाबालिगों, संवेदनशील व्यक्तियों, घायलों और संकटग्रस्त निजी नागरिकों का फिल्मांकन करते समय या उनकी पहचान उजागर करते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
भारतीय प्रेस परिषद (PCI)
- यह प्रेस परिषद अधिनियम, 1978 के अंतर्गत स्थापित एक वैधानिक स्वायत्त निकाय है।
- मंत्रालय: सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय।
- उद्देश्य: प्रेस की स्वतंत्रता को संरक्षित करना तथा भारत में समाचार-पत्रों और समाचार एजेंसियों के मानकों को बनाए रखना और उनमें सुधार करना। इसके अतिरिक्त, प्रेस के बीच स्व-नियमन के सिद्धांतों को प्रोत्साहित करना भी इसका उद्देश्य है।
- PCI ने ‘पत्रकारिता आचरण के मानदंड’ निर्धारित किए हैं, जिनका पालन पत्रकारों और समाचार-पत्रों को करना होता है।
- परिषद प्रिंट मीडिया की ऐसी सामग्री का स्वतः संज्ञान लेती है या शिकायतों के आधार पर कार्रवाई करती है, जो ‘पत्रकारिता आचरण के मानदंडों’ का उल्लंघन करती है।
- संरचना: इसका नेतृत्व एक अध्यक्ष करता है, जो परंपरागत रूप से भारत के सर्वोच्च न्यायालय का सेवानिवृत्त न्यायाधीश होता है।
- परिषद में 28 सदस्य होते हैं। इसका पुनर्गठन प्रेस परिषद अधिनियम, 1978 की धारा 5(3) के प्रावधानों के अनुसार किया जाता है।
स्रोत: TH
विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR)
पाठ्यक्रम: GS2/राजव्यवस्था एवं शासन
संदर्भ
- भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR) का कार्यक्रम घोषित किया है। इनमें वे पाँच राज्य भी शामिल हैं, जहाँ वर्ष 2027 की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने निर्धारित हैं।
विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR) क्या है?
- संविधान का अनुच्छेद 324 भारत निर्वाचन आयोग को मतदाता सूचियों की तैयारी तथा चुनावों के संचालन के पर्यवेक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की शक्ति प्रदान करता है।
- मतदाता सूचियों की तैयारी और पुनरीक्षण का विनियमन लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 तथा निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960 के अंतर्गत किया जाता है।
- लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 21 के अंतर्गत, आम चुनावों से पहले तथा भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार प्रतिवर्ष मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण किया जा सकता है।
- SSR वर्तमान मतदाता सूचियों को अद्यतन करने की एक आवधिक प्रक्रिया है। इसके अंतर्गत:
- नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़े जाते हैं।
- मौजूदा प्रविष्टियों में त्रुटियों को सुधारा जाता है।
- निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए मृत, दोहरी प्रविष्टि वाले या स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं।
SSR, SIR से किस प्रकार भिन्न है?
- विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR): इसमें वर्तमान मतदाताओं को मसौदा मतदाता सूची में शामिल किए जाने के लिए गणना प्रपत्र जमा करने होते हैं। कुछ मतदाताओं से अपनी पात्रता, जिसमें नागरिकता भी शामिल है, प्रमाणित करने के लिए दस्तावेज प्रस्तुत करने की अपेक्षा की जा सकती है।
- विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण ( SSR): इसमें सामान्यतः वर्तमान मतदाताओं के नाम बिना नए गणना प्रपत्र जमा कराए स्वतः मसौदा मतदाता सूची में बनाए रखे जाते हैं। इसका मुख्य ध्यान नए पात्र मतदाताओं का पंजीकरण करने और वर्तमान प्रविष्टियों को अद्यतन करने पर होता है।
- SSR के दौरान मृत या दोहरी प्रविष्टि वाले मतदाताओं के नाम हटाने के लिए निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है। इसमें जहाँ आवश्यक हो, नोटिस जारी करना और सुनवाई करना भी शामिल है।
- SIR प्रक्रिया के विपरीत, SSR में प्रस्तुत दस्तावेजों में तार्किक विसंगतियों के आधार पर चिह्नित मतदाताओं को केंद्र स्तर पर तैयार नोटिस जारी करने की वैसी ही प्रक्रिया की परिकल्पना नहीं की गई है।
स्रोत: IE
पफिन्स टेलीस्कोप मिशन
पाठ्यक्रम: GS3/अंतरिक्ष
समाचार में
- बेंगलुरु में जन्मी खगोलशास्त्री डॉ. रम्या अंचे को नासा के 2 करोड़ डॉलर के PUFFINS अंतरिक्ष टेलीस्कोप मिशन का प्रमुख अन्वेषक नियुक्त किया गया है।
PUFFINS (अंतरतारकीय धूल की विशेषताओं का पता लगाने के लिए पराबैंगनी ध्रुवणमिति) के बारे में
- प्रकार: निम्न पृथ्वी कक्षा में संचालित होने वाला लघु उपग्रह मिशन।
- संगठन: यह मिशन नासा के एस्ट्रोफिजिक्स पायनियर्स कार्यक्रम द्वारा वित्तपोषित है। इसका नेतृत्व एरिज़ोना विश्वविद्यालय की स्टीवर्ड वेधशाला कर रही है, जबकि टेक्सास विश्वविद्यालय की मैकडोनाल्ड वेधशाला भी इसमें सहयोग कर रही है।
- उद्देश्य: अंतरतारकीय धूल के कणों की संरचना, संघटन और चुंबकीय संरेखण का अध्ययन करना तथा तारों एवं ग्रहों के निर्माण में उनकी भूमिका को समझना।
- पराबैंगनी स्पेक्ट्रोपोलरिमेट्री : यह तकनीक विभिन्न तरंगदैर्घ्यों पर पराबैंगनी तारकीय प्रकाश के ध्रुवण को मापती है, जिससे धूल के कणों के गुणों का अध्ययन किया जा सकता है।
- धूल के सूक्ष्म कण: यह मिशन लगभग 50 नैनोमीटर से छोटे अंतरतारकीय कणों का अध्ययन करेगा।
महत्त्व
- यह मिशन अंतरतारकीय धूल, आकाशगंगाओं के चुंबकीय क्षेत्रों तथा तारों और ग्रहीय प्रणालियों के निर्माण को नियंत्रित करने वाली प्रक्रियाओं की समझ को बेहतर बनाएगा।
स्रोत: TH
आईएनएस समर्थक
पाठ्यक्रम: GS3/रक्षा
समाचार में
- भारतीय नौसेना ने स्वदेशी रूप से अभिकल्पित बहुउद्देशीय पोतों (MPVs) के प्रमुख पोत आईएनएस समर्थक को नौसेना में शामिल किया है। इससे भारत की नौसैनिक क्षमताओं और स्वदेशी जहाज निर्माण को सुदृढ़ता मिली है।
आईएनएस समर्थक के बारे में
- यह एक बहुउद्देशीय पोत (MPV) है। यह 107 मीटर लंबा सहायक नौसैनिक प्लेटफॉर्म है, जिसका निर्माण तमिलनाडु के कट्टुपल्ली स्थित लार्सन एंड टुब्रो (L&T) शिपयार्ड द्वारा किया गया है।
- यह नौसैनिक बेड़े के अभियानों में सहायता करता है, स्वदेशी हथियारों और सेंसरों का परीक्षण करता है तथा स्वायत्त प्रणालियों के लिए मदरशिप के रूप में कार्य करता है।
- यह निम्नलिखित मानवरहित प्रणालियों के प्रक्षेपण, नियंत्रण और पुनर्प्राप्ति में सहायता करता है:
- मानवरहित हवाई वाहन ( UAVs)
- स्वायत्त जलमग्न वाहन (AUVs)
- मानवरहित सतही वाहन (USVs)
- यह विभिन्न सहायक कार्यों को भी संपन्न करता है, जिससे अग्रिम पंक्ति के युद्धपोतों पर कार्यभार और उनकी मशीनरी का घिसाव कम होता है।
स्रोत: TH
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