पाठ्यक्रम: GS3/रक्षा
संदर्भ
- सैन्य कार्य विभाग (DMA), प्रस्तावित एकीकृत थिएटर कमानों को समर्थन प्रदान करने के लिए भारतीय थल सेना, नौसेना और वायु सेना हेतु एक एकीकृत लॉजिस्टिक संरचना विकसित कर रहा है।
- इस पहल का उद्देश्य अलग-अलग सेनाओं की विशिष्ट लॉजिस्टिक प्रणालियों से हटकर एक साझा ढाँचे की ओर बढ़ना है।
सैन्य लॉजिस्टिक्स
- सैन्य लॉजिस्टिक्स से तात्पर्य सैन्य अभियानों के संचालन के लिए सशस्त्र बलों को आवश्यक आपूर्ति, उपकरण, ईंधन, परिवहन, भंडारण और रखरखाव की योजना बनाने तथा उनके प्रबंधन से है।
- उदाहरण के लिए, लद्दाख में तैनात सैनिकों को भोजन, गोला-बारूद, ईंधन, शीतकालीन वस्त्र और अतिरिक्त पुर्जों की आवश्यकता होती है। सैन्य लॉजिस्टिक्स यह सुनिश्चित करता है कि ये सभी आवश्यक वस्तुएँ सही स्थान पर और सही समय पर पहुँचें।
प्रस्तावित ढाँचा
- वर्तमान में, थल सेना, नौसेना और वायु सेना मुख्यतः अपनी अलग-अलग प्रणालियों के माध्यम से लॉजिस्टिक्स का प्रबंधन करती हैं। प्रस्तावित सुधार का उद्देश्य इन प्रणालियों को एकीकृत करना है, ताकि तीनों सेनाएँ अधिक कुशलता से समन्वय स्थापित कर सकें और संसाधनों को साझा कर सकें।
- त्रि-सेवा लॉजिस्टिक्स प्रबंधन अनुप्रयोग (TLMA): इसे विकसित किया जा रहा है, ताकि तीनों सेनाओं के भंडार की वास्तविक समय में जानकारी उपलब्ध हो सके और उनके मौजूदा एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग (ERP) सॉफ्टवेयर को एकीकृत किया जा सके।
- राष्ट्रीय रक्षा संहिताकरण प्रणाली (NDCS): इसका उद्देश्य रक्षा संबंधी वस्तुओं की पहचान और वर्गीकरण को मानकीकृत करना है, जिससे आपूर्ति की पहचान करना, उनका पता लगाना और प्रबंधन करना आसान हो सके।
- संयुक्त लॉजिस्टिक अवसंरचना: योजनाओं में संयुक्त लॉजिस्टिक नोड, संयुक्त गोला-बारूद डिपो, विमानन भंडार, आपूर्ति पार्क और सामग्री संगठन स्थापित करना शामिल है।
- पीएम गति शक्ति रक्षा पोर्टल : इसे तीनों सेनाओं और थिएटर सीमाओं के पार एक साझा लॉजिस्टिक इंटरफेस उपलब्ध कराने के लिए विकसित किया जा रहा है। यह राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति और एकीकृत लॉजिस्टिक्स इंटरफेस प्लेटफॉर्म (ULIP) के अनुरूप होगा।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता-सक्षम लॉजिस्टिक्स : लॉजिस्टिक्स नियोजन में सुधार करने तथा रखरखाव और अतिरिक्त पुर्जों की आवश्यकताओं का पूर्वानुमान लगाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग का उपयोग किया जा रहा है।
एकीकृत थिएटर कमानें (ITCs)
- पृष्ठभूमि: एकीकृत थिएटर कमानों का प्रस्ताव शेकटकर समिति (2016) की सिफारिशों के हिस्से के रूप में रखा गया था। वर्ष 2020 में पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS), जनरल बिपिन रावत की नियुक्ति के बाद इस पहल को महत्त्वपूर्ण गति मिली।
- तीनों सेनाओं के बीच व्यापक सहमति तीन थिएटर कमानों के गठन के पक्ष में है।
- उत्तरी थिएटर कमान: लखनऊ में, जिसका मुख्य ध्यान चीन पर होगा।
- पश्चिमी थिएटर कमान: जयपुर में, जिसका मुख्य ध्यान पाकिस्तान पर होगा।
- समुद्री थिएटर कमान: तिरुवनंतपुरम में।
- यदि इसे स्वीकृति मिल जाती है, तो यह स्वतंत्रता के बाद भारत का सबसे बड़ा सैन्य सुधार होगा। यह ‘एक सीमा, एक बल’ की अवधारणा के अनुरूप होगा।
थिएटर कमान की आवश्यकता
- शत्रुतापूर्ण पड़ोस: चीन और पाकिस्तान के साथ स्थलीय सीमाएँ साझा करने के कारण भारत का पड़ोस सुरक्षा की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण है। परमाणु हथियारों से लैस विरोधियों के बीच उच्च प्रौद्योगिकी-आधारित, बहु-क्षेत्रीय युद्ध की संभावना के लिए तीव्र और गतिशील प्रतिक्रिया आवश्यक है।
- संसाधनों का इष्टतम उपयोग: सेनाएँ अपने संसाधनों को प्रभावी ढंग से एकत्रित और साझा कर सकेंगी, जिससे सैन्य प्लेटफॉर्म, हथियार प्रणालियों और परिसंपत्तियों का सर्वोत्तम उपयोग संभव होगा। इससे तीनों सेनाओं द्वारा एक ही प्रकार की वस्तुओं की दोहरावपूर्ण खरीद भी रोकी जा सकेगी।
- बेहतर समन्वय: वर्तमान में, भारत की विभिन्न सैन्य कमानें अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों में स्थित हैं। इसके कारण कभी-कभी संयुक्त अभियानों और सैन्य अभ्यासों के दौरान संचार में बाधाएँ उत्पन्न होती हैं।
- एकीकृत कमान संरचना के माध्यम से संचार प्रक्रियाओं को अधिक सरल और प्रभावी बनाया जा सकता है।
- अन्य देशों में प्रचलित व्यवस्था: अमेरिका, ब्रिटेन, रूस, चीन और फ्रांस सहित प्रमुख सैन्य शक्तियों के सशस्त्र बल थिएटर कमान प्रणाली के अंतर्गत कार्य करते हैं।
- कुशल नियोजन: तीनों सेनाओं के प्रतिनिधियों वाली एकीकृत कमान संरचना से शांतिकालीन और युद्धकालीन रणनीतियों की अधिक प्रभावी योजना बनाने में सहायता मिलेगी।
कार्यान्वयन के लिए उठाए गए कदम
- सैन्य कार्य विभाग (DMA): संसाधनों के इष्टतम उपयोग को सुगम बनाने और तीनों सेनाओं के बीच संयुक्तता को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2020 में सैन्य कार्य विभाग की स्थापना की गई। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) इसका सचिव है।
- अंतर-सेवा संगठन (कमांड, नियंत्रण एवं अनुशासन) अधिनियम, 2023): यह अधिनियम त्रि-सेवा सैन्य संरचनाओं के कमांडरों को तीनों सेनाओं के कर्मियों पर अधिकार प्रदान करके भारतीय सशस्त्र बलों में संयुक्तता को बढ़ावा देता है।
- इससे अनुशासनात्मक व्यवस्था एकीकृत होती है, निर्णय लेने की प्रक्रिया तीव्र होती है तथा परिचालन और सांस्कृतिक एकीकरण को प्रोत्साहन मिलता है।
- तीन संयुक्त लॉजिस्टिक नोड (JLNs): तीनों सेनाओं के बीच लॉजिस्टिक एकीकरण के लिए वर्ष 2021 से मुंबई, गुवाहाटी और पोर्ट ब्लेयर में तीन संयुक्त लॉजिस्टिक नोड स्थापित किए गए हैं, जो परिचालन में हैं।
- त्रि-सेवा भविष्य के युद्ध संबंधी पाठ्यक्रम : इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य अधिकारियों को आधुनिक युद्ध के परिचालन और तकनीकी पहलुओं से परिचित कराना है।
- संयुक्त सैन्य अभ्यास: भारतीय सशस्त्र बल समन्वित अभियानों पर केंद्रित त्रि-सेवा, एकीकृत और बहु-क्षेत्रीय सैन्य अभ्यास आयोजित करते हैं। इनमें थल सेना, वायु सेना और नौसेना की भागीदारी होती है। उदाहरण के लिए, अभ्यास प्रचंड प्रहार और अभ्यास डेजर्ट हंट।
- रक्षा संचार नेटवर्क (DCN): यह नेटवर्क सुरक्षित प्रणालियों और पर्याप्त वैकल्पिक व्यवस्था के आधार पर तीनों सेनाओं को एकीकृत वॉयस, डेटा एवं वीडियो संचार सेवाएँ उपलब्ध कराता है।
- एकीकृत वायु कमान एवं नियंत्रण प्रणाली (IACCS): यह वास्तविक समय में समन्वय स्थापित करने के लिए आधारभूत संरचना प्रदान करती है, जिससे थल सेना, नौसेना और वायु सेना की विभिन्न इकाइयों के बीच समन्वित प्रतिक्रिया संभव होती है।
निष्कर्ष
- एकीकृत थिएटर कमानें भारत की रक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से किया जाने वाला एक परिवर्तनकारी सुधार हैं।
- यद्यपि इनके कार्यान्वयन में कुछ चुनौतियाँ विद्यमान हैं, फिर भी प्रभावी थिएटरकरण से भारत की युद्धक तत्परता, अंतर-सेवा तालमेल और रणनीतिक प्रभावशीलता में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। चीन एवं पाकिस्तान से उभरते सुरक्षा खतरों के संदर्भ में इसका विशेष महत्त्व है।
स्रोत: IE
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