पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- चीन ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), जैवचिकित्सा और सौर फोटोवोल्टिक (PV) विनिर्माण से संबंधित 40 से अधिक उन्नत प्रौद्योगिकियों के निर्यात को विनियमित करने के लिए घोषणा संख्या 48 (Announcement No. 48) शीर्षक से एक मसौदा योजना की घोषणा की।
- 14 प्रौद्योगिकियाँ: इनके निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है।
- 26 प्रौद्योगिकियाँ: इनके निर्यात पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है, जिसके अंतर्गत सरकारी लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा।
चीन नियंत्रणों को सख्त क्यों कर रहा है?
- रणनीतिक बढ़त: सौर विनिर्माण और उन्नत प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में अपनी स्थिति सुरक्षित रखना।
- राष्ट्रीय सुरक्षा: सैन्य या साइबर सुरक्षा संबंधी संभावित उपयोग वाली प्रौद्योगिकियों के हस्तांतरण को सीमित करना।
- भू-राजनीतिक प्रभाव: उन्नत अर्धचालकों और संबंधित प्रौद्योगिकियों पर पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बीच संभावित सौदेबाजी के साधन के रूप में इसका उपयोग करना।
प्रमुख प्रावधान
- सौर प्रौद्योगिकी: उन्नत पेरोव्स्काइट और टैंडम सौर विनिर्माण प्रौद्योगिकियों के हस्तांतरण के साथ-साथ चयनित पॉलीसिलिकॉन प्रसंस्करण और वेफर विनिर्माण प्रौद्योगिकियों पर प्रतिबंध लगाना।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता: दुर्भावनापूर्ण साइबर कोड तैयार करने, आधारभूत मॉडल के पैरामीटर, बुद्धिमान एजेंट और विशिष्ट कंप्यूटिंग प्रणालियों से संबंधित प्रौद्योगिकियों को लक्षित करना।
- जैवचिकित्सा: निर्धारित जीन-संपादन प्लेटफॉर्म, कोशिका-चिकित्सा प्रक्रियाओं और न्यूक्लिक अम्ल-आधारित उपचारों को शामिल करना।
भारत के लिए निहितार्थ
- आपूर्ति शृंखला पर चीन का नियंत्रण: चीन वैश्विक सौर फोटोवोल्टिक (PV) आपूर्ति शृंखला के 75–95% हिस्से को नियंत्रित करता है। इसमें पॉलीसिलिकॉन का 91% और वेफर का 97% से अधिक उत्पादन शामिल है। इससे चीन विश्व स्तर पर सौर घटकों का प्रमुख आपूर्तिकर्ता बन जाता है।
- चीन पर भारत की निर्भरता: निर्भरता में कुछ कमी आने के बावजूद, भारत अब भी अपने 50% से अधिक सौर सेल और मॉड्यूल चीन से आयात करता है। वित्त वर्ष 2024 में इनका आयात लगभग 4 अरब डॉलर का था।
- भारत में पॉलीसिलिकॉन और सिलिकॉन इंगट जैसे प्रारंभिक चरण के घटकों के विनिर्माण की क्षमता सीमित है। घरेलू उत्पादन क्षमता विकसित करने के प्रयासों को लागत और प्रौद्योगिकी संबंधी बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है।
- यह स्थिति आयातित पूंजीगत उपकरणों और महत्त्वपूर्ण तकनीकी जानकारी के लिए भारत की निर्भरता को उजागर करती है।
- भारत घरेलू सौर विनिर्माण को विकसित करने का प्रयास कर रहा है। ऐसे में चीनी विनिर्माण प्रौद्योगिकी तक पहुँच पर प्रतिबंध इस प्रक्रिया को और अधिक कठिन बना सकते हैं।
- ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और लचीलापन सुनिश्चित करने के लिए भारत को अपनी आपूर्ति शृंखला में विविधता लानी चाहिए, अनुसंधान एवं विकास (R&D) में निवेश बढ़ाना चाहिए, अमेरिका, यूरोपीय संघ और जापान जैसे देशों एवं क्षेत्रों के साथ वैश्विक साझेदारियाँ स्थापित करनी चाहिए तथा घरेलू विनिर्माण क्षमता को सुदृढ़ करना चाहिए।
स्रोत: TH
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