पाठ्यक्रम: GS2/ सामाजिक न्याय
संदर्भ
- सर्वोच्च न्यायालय ने दिव्यांग व्यक्तियों (PwDs) को हवाई यात्रा के दौरान विभिन्न चरणों में होने वाली व्यवस्थित सुगम्यता संबंधी समस्याओं का आरोप लगाने वाली एक याचिका पर केंद्र सरकार तथा प्रमुख विमानन प्राधिकरणों से जवाब मांगा है।
भारत में दिव्यांगता की स्थिति
- दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अनुसार, दिव्यांग व्यक्ति वह है, जिसमें दीर्घकालिक शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक अथवा संवेदी अक्षमता हो, जो विभिन्न बाधाओं के साथ अंतःक्रिया करने पर अन्य व्यक्तियों के समान समाज में उसकी पूर्ण एवं प्रभावी भागीदारी में अवरोध उत्पन्न करती है।
- जनगणना 2011 के अनुसार, भारत में 2.68 करोड़ दिव्यांग व्यक्ति हैं, जो देश की कुल जनसंख्या का 2.21 प्रतिशत हैं।
दिव्यांग व्यक्तियों के समक्ष आने वाली समस्याएँ (PwDs)
- गतिशीलता में बाधा : विशेष बैटरी-संचालित व्हीलचेयर सहित आवश्यक व्यक्तिगत सहायक उपकरणों को विमान के ग्राउंड हैंडलिंग कर्मचारियों द्वारा नियमित रूप से क्षतिग्रस्त किए जाने, गुम कर दिए जाने अथवा विमान में लादने से इनकार किए जाने की घटनाएँ सामने आती हैं।
- उड़ान के दौरान सुगम्यता संबंधी व्यवस्थाओं का अभाव: विमान के अंदर उपलब्ध प्रणालियों में सुगम्यता संबंधी सुविधाओं का समुचित समावेश नहीं होता। इसके कारण अंतरराष्ट्रीय निर्धारित हवाई सेवाओं में दृष्टिबाधित यात्री केबिन क्रू को बुलाने अथवा बुनियादी सुरक्षा संबंधी जानकारी प्राप्त करने में असमर्थ हो सकते हैं।
- डिजिटल बहिष्करण : सुगम्यता के अनुकूल न होने वाली एयरलाइन वेबसाइटें, मोबाइल एप्लिकेशन तथा भुगतान प्रणालियाँ दृष्टिबाधित यात्रियों को स्वतंत्र रूप से टिकट बुक करने, चेक-इन करने अथवा सहायता का अनुरोध करने से रोकती हैं।
- संचार संबंधी कमियाँ : केवल ध्वनि-आधारित घोषणाएँ श्रवणबाधित यात्रियों को आवश्यक जानकारी से वंचित कर देती हैं, जबकि केवल दृश्य संकेत दृष्टिबाधित यात्रियों के लिए अनुपयोगी होते हैं। यह समस्या विशेष रूप से बोर्डिंग गेट में परिवर्तन तथा आपातकालीन परिस्थितियों के दौरान गंभीर हो जाती है।
- शिकायत निवारण : सुगम्यता से संबंधित शिकायतों को प्रायः सामान्य ग्राहक सेवा प्रणाली में शामिल कर लिया जाता है, जिससे उनका विशेषीकृत एवं समयबद्ध समाधान प्राप्त करना कठिन हो जाता है।
संवैधानिक प्रावधान
- अनुच्छेद 14: कानून के समक्ष समानता तथा कानूनों के समान संरक्षण की गारंटी प्रदान करता है।
- अनुच्छेद 21: जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार की रक्षा करता है। न्यायिक व्याख्या के माध्यम से इसमें गरिमापूर्ण जीवन जीने के अधिकार को भी शामिल किया गया है।
- अनुच्छेद 19(1)(d): नागरिकों को उचित प्रतिबंधों के अधीन भारत के संपूर्ण क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से आवागमन करने का अधिकार प्रदान करता है।
प्रमुख न्यायिक हस्तक्षेप
- जीजा घोष बनाम भारत संघ, 2016 : सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि उचित चिकित्सीय मूल्यांकन अथवा वैधानिक औचित्य के बिना किसी दिव्यांग व्यक्ति को बलपूर्वक विमान से उतारना उसके मौलिक अधिकारों, समानता तथा गरिमा का उल्लंघन है।
- आरुषि सिंह बनाम भारत संघ, 2024 : सर्वोच्च न्यायालय ने हवाई यात्रा में सुगम्यता से संबंधित मुद्दों, जिनमें सहायता तथा सुरक्षा जाँच शामिल हैं, पर विचार किया। न्यायालय ने व्हीलचेयर की उपलब्धता के संबंध में वास्तविक समय में जानकारी प्रदान करने तथा हवाई अड्डे के कर्मचारियों को संवेदनशील बनाने जैसे उपायों के निर्देश दिए।
भारत द्वारा किए गए उपाय
- दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 : यह अधिनियम दिव्यांगता के प्रति अधिकार-आधारित दृष्टिकोण अपनाता है तथा समानता, गैर-भेदभाव, सुगम्यता और युक्तियुक्त समायोजन का प्रावधान करता है।
- नागरिक उड्डयन के लिए सुगम्यता मानक एवं दिशा-निर्देश, 2022 : इन दिशा-निर्देशों में हवाई अड्डों, एयरलाइनों तथा विमानन क्षेत्र के अन्य हितधारकों के लिए सुगम्यता संबंधी आवश्यकताएँ निर्धारित की गई हैं।
- दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय (UNCRPD): भारत इस अभिसमय का पक्षकार है। यह समान भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सुगम्यता को एक आवश्यक शर्त के रूप में मान्यता प्रदान करता है।
- सुगम्य भारत अभियान : वर्ष 2015 में प्रारंभ किए गए इस अभियान का उद्देश्य दिव्यांग व्यक्तियों के समक्ष लंबे समय से विद्यमान बाधाओं को दूर करना है।
- यह अभियान तीन प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित है—निर्मित अवसंरचना, परिवहन प्रणालियाँ तथा सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT)। इसका उद्देश्य सभी व्यक्तियों के लिए समान पहुँच और भागीदारी सुनिश्चित करना है।
आगे की राह
- अभिकल्पना के प्रारंभिक चरण से ही सुगम्यता : हवाई अड्डों, एयरलाइन वेबसाइटों, मोबाइल एप्लिकेशनों तथा यात्री-प्रसंस्करण प्रणालियों में प्रारंभ से ही सार्वभौमिक अभिकल्पना के सिद्धांतों को अपनाया जाना चाहिए। शिकायतें प्राप्त होने के बाद वर्तमान प्रणालियों में बदलाव करने पर निर्भर रहने के बजाय सुगम्यता को मूल अभिकल्पना का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
- डिजिटल प्लेटफॉर्मों का सुगम्यता परीक्षण: डिजी यात्रा तथा एयरलाइनों के डिजिटल प्लेटफॉर्मों का नियमित सुगम्यता ऑडिट किया जाना चाहिए। इसमें स्क्रीन रीडर के साथ अनुकूलता, सुगम प्रमाणीकरण, भुगतान प्रणालियों तथा सत्यापन के वैकल्पिक तरीकों की उपलब्धता की जाँच शामिल होनी चाहिए।
- शिकायत निवारण तंत्र : हवाई अड्डों और एयरलाइनों को स्पष्ट रूप से पहचाने जा सकने वाले सुगम्यता सहायता केंद्र तथा शिकायत निवारण माध्यम स्थापित करने चाहिए। इन व्यवस्थाओं में समयबद्ध समाधान और संस्थागत जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।
- सुगम्यता ऑडिट : दिव्यांग व्यक्तियों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठनों की भागीदारी के साथ स्वतंत्र सुगम्यता ऑडिट आयोजित किए जाने चाहिए। इससे उन बाधाओं की पहचान की जा सकेगी, जो दिव्यांगता के वास्तविक अनुभवों से अपरिचित प्रशासकों द्वारा तैयार की गई व्यवस्थाओं में अनदेखी रह सकती हैं।
स्रोत: TH