पाठ्यक्रम: GS3/आपदा प्रबंधन
सन्दर्भ
- नेपाल में हाल की आपदा प्रतिक्रिया पहलों ने आपदा प्रबंधन की गति और सटीकता को बढ़ाने में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और भीड़-स्रोतित जानकारी की क्षमता को उजागर किया है।
आपदा प्रबंधन में AI की भूमिका
- प्रारंभिक चेतावनी और पूर्वानुमान: AI ऐतिहासिक मौसम संबंधी अभिलेखों और वर्तमान मौसम संबंधी अवलोकनों के विशाल आँकड़ों को संसाधित करके ऐसे पूर्वानुमान उपलब्ध करा सकता है, जो अधिक तेज और किसी विशेष स्थान के लिए अधिक विशिष्ट होते हैं।
- गूगल फ्लड हब बाढ़ के खतरों के बारे में अग्रिम जानकारी प्रदान करने के लिए मौसम और जल-विज्ञान संबंधी सूचनाओं का उपयोग करता है।
- जोखिम मानचित्रण: AI उपग्रह चित्रों, भौगोलिक आँकड़ों, मौसम संबंधी जानकारी, मानचित्रों और प्रशासनिक डेटाबेस को एकीकृत करके उन क्षेत्रों की पहचान कर सकता है, जो कुछ विशेष खतरों से जोखिम में हैं।
- प्रतिक्रिया, राहत और बचाव: आपदाएँ स्मार्टफोन, सोशल मीडिया, आपातकालीन कॉल, ड्रोन और सरकारी डेटाबेस से भारी मात्रा में जानकारी उत्पन्न करती हैं।
- AI इस असंरचित आँकड़ों का प्रबंधन कर सकता है और मैनुअल प्रणालियों की तुलना में बहुत तेजी से उपयोगी पैटर्न की पहचान कर सकता है।
- नेपाल की आपदा में, AI-संचालित एक वेबपेज ने लापता व्यक्तियों से संबंधित भीड़-स्रोतित जानकारी को मृत या घायल लोगों के आधिकारिक अभिलेखों से जोड़ने में सहायता की।
- तापीय इमेजिंग वाले ड्रोन मलबे के नीचे मानव शरीर से निकलने वाले ऊष्मा संकेतों का पता लगा सकते हैं और बचाव दल को संभावित पीड़ितों तक पहुँचने में मार्गदर्शन कर सकते हैं।
- आपदा के बाद पुनर्प्राप्ति: AI और उपग्रह-आधारित तकनीकें अलग-थलग पड़े गाँवों, नष्ट हुए बुनियादी ढाँचे, अवरुद्ध राजमार्गों और आपातकालीन हेलीकॉप्टर संचालन के लिए उपयुक्त क्षेत्रों की पहचान करने में सहायता कर सकती हैं।
- अधिकारी इस जानकारी का उपयोग भोजन, दवाइयों, आश्रय और अन्य राहत सामग्री के वितरण को प्राथमिकता देने के लिए कर सकते हैं।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के प्रमुख अनुप्रयोग
- GraphCast: AI-संचालित मौसम पूर्वानुमान प्रणाली, जो तेजी से विश्वभर के मौसम के पूर्वानुमान तैयार कर सकती है।
- Google Flood Hub: AI-आधारित बाढ़ पूर्वानुमान और प्रारंभिक चेतावनी संबंधी जानकारी प्रदान करता है।
- DisasterAWARE: जोखिम की निगरानी और जोखिम आकलन को सक्षम बनाने के लिए भौगोलिक और आपदा संबंधी जानकारी का उपयोग करता है।
- SKAI: आपदा से हुए नुकसान का तेजी से विश्लेषण करने में सहायता के लिए उपग्रह चित्रों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करता है।
चुनौतियाँ क्या हैं?
- AI मॉडल पर्याप्त मात्रा में ऐसे आँकड़ों पर निर्भर करते हैं, जो सटीक और विश्वसनीय हों; लेकिन आपदाओं के दौरान ऐसे आँकड़े उपलब्ध नहीं हो सकते हैं।
- जिन समुदायों की स्मार्टफोन, इंटरनेट संपर्क या डिजिटल सेवाओं तक सीमित पहुँच है, उनका AI द्वारा तैयार आकलनों में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं हो सकता है।
- सोशल मीडिया और भीड़-स्रोतित मंच बड़ी मात्रा में गलत, दोहराई गई या भ्रामक जानकारी उत्पन्न कर सकते हैं।
- किसी एक भौगोलिक क्षेत्र के आँकड़ों पर प्रशिक्षित कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रणालियाँ अलग भू-भाग, जलवायु और बस्तियों के स्वरूप वाले दूसरे क्षेत्र में उतनी प्रभावी ढंग से काम नहीं कर सकती हैं।
- लापता व्यक्तियों, स्थानों और घटना से प्रभावित समूहों से संबंधित जानकारी डेटा संरक्षण से जुड़े प्रश्न उठाती है।
- यदि AI के परिणामों का उपयोग निकासी, बचाव या राहत संबंधी निर्णय लेने के लिए किया जाता है, तो AI द्वारा की गई गलतियाँ गंभीर हो सकती हैं।
आगे की राह
- AI को मानव निर्णय लेने के विकल्प के रूप में देखने के बजाय मौजूदा आपदा-प्रबंधन संस्थानों के साथ एकीकृत किया जाए।
- मौसम, भू-भाग, बुनियादी ढाँचे, संवेदनशीलता और पिछली आपदाओं से संबंधित भारत-केंद्रित अति-स्थानीय आँकड़ों का निर्माण किया जाए।
- आपातकाल के दौरान पहुँच को सुगम बनाने के लिए क्षेत्रीय और स्थानीय भाषाओं में स्वचालित प्रणालियाँ विकसित की जाएँ।
- IMD, ISRO, NDMA, राज्य आपदा-प्रबंधन प्राधिकरणों, दूरसंचार सेवा प्रदाताओं और स्थानीय प्रशासन के बीच अंतर-संचालनीयता को मजबूत किया जाए।
स्रोत: IE
Previous article
सहायता-प्राप्त मृत्यु
Next article
संक्षिप्त समाचार 30-09-2026