पाठ्यक्रम: GS2/अंतरराष्ट्रीय संगठन
संदर्भ
- संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के चल रहे सत्र में फ्रांस ने संयुक्त राष्ट्र के कार्यकरण को बेहतर बनाने के लिए एक प्रस्ताव रखा है, विशेष रूप से सामूहिक सुरक्षा तथा वीटो के प्रयोग से संबंधित मामलों से निपटने के लिए।
संयुक्त राष्ट्र के बारे में
- संयुक्त राष्ट्र एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जिसकी स्थापना वर्ष 1945 में हुई थी।
- संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख अंग हैं—महासभा, सुरक्षा परिषद, आर्थिक एवं सामाजिक परिषद, न्यास परिषद, अंतरराष्ट्रीय न्यायालय और संयुक्त राष्ट्र सचिवालय।
- इन सभी अंगों की स्थापना वर्ष 1945 में संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के समय संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत की गई थी।
- सदस्य: वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य राष्ट्र हैं और इसका कार्य इसके संस्थापक चार्टर में निहित उद्देश्यों एवं सिद्धांतों द्वारा निर्देशित होता है।
- संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य राष्ट्र महासभा के सदस्य हैं।
- सदस्यता: राज्यों को सुरक्षा परिषद की सिफारिश के आधार पर महासभा के निर्णय द्वारा संयुक्त राष्ट्र की सदस्यता प्रदान की जाती है।
- सुरक्षा परिषद संयुक्त राष्ट्र की प्रमुख निर्णय लेने वाली संस्था है।
- इसमें 15 सदस्य होते हैं, जिनमें 5 स्थायी और 10 अस्थायी सदस्य होते हैं।
- पाँच स्थायी सदस्य—चीन, फ्रांस, रूस, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका—वीटो शक्ति रखते हैं। अस्थायी सदस्यों का चुनाव महासभा द्वारा दो वर्ष की अवधि के लिए किया जाता है।
- सुरक्षा परिषद की प्राथमिक जिम्मेदारी अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखना है।
- महासचिव संयुक्त राष्ट्र के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी होते हैं।
- महासचिव की नियुक्ति महासभा द्वारा सुरक्षा परिषद की सिफारिश पर पाँच वर्ष के नवीकरणीय कार्यकाल के लिए की जाती है।
अस्थायी सदस्यों का चुनाव
- प्रत्येक वर्ष महासभा कुल 10 अस्थायी सदस्यों में से पाँच का चुनाव दो वर्ष के कार्यकाल के लिए करती है।
- 10 अस्थायी सीटों का क्षेत्रीय आधार पर वितरण इस प्रकार है:
- अफ्रीकी और एशियाई देशों के लिए पाँच सीटें;
- पूर्वी यूरोपीय देशों के लिए एक सीट;
- लैटिन अमेरिकी और कैरेबियाई देशों के लिए दो सीटें;
- पश्चिमी यूरोपीय एवं अन्य देशों के लिए दो सीटें।
- परिषद के लिए निर्वाचित होने हेतु उम्मीदवार देशों को महासभा में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्य देशों के दो-तिहाई मत प्राप्त करना आवश्यक होता है।
- चुनाव के दौरान संयुक्त राष्ट्र के सभी 193 सदस्य राष्ट्र गुप्त मतदान के माध्यम से अपना मत देते हैं।
- संयुक्त राष्ट्र के 50 से अधिक सदस्य राष्ट्र ऐसे हैं, जो कभी भी सुरक्षा परिषद के सदस्य नहीं रहे हैं।
- भारत ने वर्ष 2021-22 में अंतिम बार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अस्थायी सदस्य के रूप में प्रतिनिधित्व किया था।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधारों की आवश्यकता
- वर्तमान संरचना: सुरक्षा परिषद की वर्तमान संरचना में प्रमुख क्षेत्रों का अपर्याप्त प्रतिनिधित्व तथा कुछ क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व न होना एक प्रमुख समस्या है।
- विश्व व्यवस्था में परिवर्तन: वर्ष 1945 के बाद से विश्व में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं और नई वैश्विक वास्तविकताओं को स्थायी सदस्यता में प्रतिबिंबित किए जाने की आवश्यकता है।
- वीटो शक्ति: वर्तमान में केवल पाँच स्थायी सदस्यों के पास वीटो शक्ति है। इसके प्रयोग के माध्यम से परिषद में यूक्रेन और गाजा जैसे वैश्विक संकटों एवं संघर्षों से निपटने के लिए कार्रवाई को बाधित किया गया है।
- परिषद के शेष 10 सदस्य देशों का चुनाव दो वर्ष के कार्यकाल के लिए अस्थायी सदस्यों के रूप में किया जाता है और उन्हें वीटो शक्ति प्राप्त नहीं है।
- वैधता: पाँच स्थायी सदस्यों के पास असमान रूप से केंद्रित शक्ति, विशेषकर उनकी वीटो शक्ति, व्यवस्था को अनुचित मानने तथा उसकी वैधता पर प्रश्न उठने की धारणा को बढ़ावा देती है।
- प्रासंगिकता और विश्वसनीयता में कमी: प्रमुख वैश्विक संकटों में संयुक्त राष्ट्र की भूमिका लगातार सीमित होती जा रही है। सामूहिक निर्णयों को प्रभावी ढंग से लागू करने में इसकी विफलता ने बहुपक्षवाद में विश्वास को कमजोर किया है।
- वैश्विक शक्ति संरचना में परिवर्तन: संयुक्त राष्ट्र 21वीं सदी की वास्तविकताओं के बजाय वर्ष 1945 की शक्ति-संरचना को प्रतिबिंबित करता है। भारत, ब्राजील, जर्मनी, जापान और दक्षिण अफ्रीका जैसी उभरती शक्तियाँ स्थायी प्रतिनिधित्व की पात्रता रखती हैं।
- उभरती वैश्विक चुनौतियों का समाधान: जलवायु परिवर्तन, साइबर युद्ध, महामारी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के शासन जैसे मुद्दों के लिए अधिक उत्तरदायी और आधुनिक संयुक्त राष्ट्र संरचना की आवश्यकता है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार लागू करने की सीमाएँ
- स्थायी सदस्यों की वीटो शक्ति: सुरक्षा परिषद की संरचना या कार्यप्रणाली में किसी भी सुधार के लिए पाँचों स्थायी सदस्यों की स्वीकृति आवश्यक होती है।
- इन देशों के हित अलग-अलग हैं और वे ऐसे परिवर्तनों का समर्थन करने के प्रति अनिच्छुक रहते हैं, जिनसे परिषद के अंदर उनका प्रभाव कम हो सकता है।
- क्षेत्रीय गतिशीलता: क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्विताएँ और भू-राजनीतिक तनाव सुरक्षा परिषद में सुधार के प्रयासों को जटिल बनाते हैं।
- सुधार प्रक्रिया की जटिलता: सुधारों को लागू करने के लिए संयुक्त राष्ट्र चार्टर में संशोधन आवश्यक है। इसके लिए एक लंबी और जटिल प्रक्रिया अपनानी पड़ती है, जिसमें बड़ी संख्या में सदस्य देशों द्वारा अनुसमर्थन शामिल है। इससे व्यापक एवं प्रभावी सुधार लागू करना कठिन हो जाता है।
- नए सदस्यों के लिए वीटो का प्रश्न: इस बात पर कोई सर्वसम्मति नहीं है कि विस्तारित स्थायी सदस्यता प्राप्त करने वाले नए देशों को भी वीटो का अधिकार दिया जाना चाहिए या नहीं।
आगे की राह
- सुधार की मांग संयुक्त राष्ट्र की घटती विश्वसनीयता और उसकी प्राचीन संरचना से प्रेरित है।
- हालाँकि, इसकी संस्थापक संरचना में लोकतांत्रिक सिद्धांतों और महाशक्तियों के विशेषाधिकारों के बीच गहरे अंतर्विरोध विद्यमान हैं, जो वास्तविक सुधार को अत्यंत कठिन बनाते हैं।
- इसलिए, जहाँ क्रमिक सुधार—जैसे पारदर्शिता में वृद्धि और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को सशक्त बनाना—व्यावहारिक हो सकते हैं, वहीं बहुध्रुवीय विश्व के अनुरूप एक नए वैश्विक बहुपक्षीय ढाँचे की आवश्यकता अंततः उत्पन्न हो सकती है।
स्रोत: TH
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