पाठ्यक्रम: GS3/विज्ञान और प्रौद्योगिकी/ऊर्जा
संदर्भ
- केंद्र सरकार ‘स्मार्ट मीटर राष्ट्रीय कार्यक्रम’ (SMNP) के अंतर्गत वर्ष 2028 के मध्य तक स्मार्ट मीटरों में देश में डिजाइन की गई चिप का उपयोग अनिवार्य करने की योजना बना रही है। इसका उद्देश्य साइबर सुरक्षा को सुदृढ़ करना तथा मीटर निर्माण की लागत को कम करना है।
स्मार्ट मीटर के बारे में
- स्मार्ट मीटर एक उन्नत विद्युत मीटर है, जो उपभोक्ताओं को विद्युत उपयोग की वास्तविक समय की जानकारी उपलब्ध कराकर विद्युत खपत को अनुकूलित करने और बिजली के बिल को कम करने में सक्षम बनाता है।

- स्मार्ट मीटर के घटक:
- मापन इकाई : यह विद्युत खपत का सटीक मापन करती है तथा वोल्टेज, विद्युत धारा और ऊर्जा खपत जैसे मापदंडों को दर्ज करती है।
- माइक्रोकंट्रोलर और चिप : यह विद्युत खपत से संबंधित डेटा को संसाधित और संग्रहीत करती है तथा मीटर के इलेक्ट्रॉनिक कार्यों को नियंत्रित करती है।
- संचार मॉड्यूल : यह स्मार्ट मीटर और विद्युत वितरण कंपनियों (DISCOMs) के बीच दो-तरफा संचार को सक्षम बनाता है। इसके माध्यम से खपत संबंधी डेटा स्वतः भेजा जा सकता है और निर्देश प्राप्त किए जा सकते हैं।
- सुरक्षा प्रणाली : यह अनधिकृत पहुँच, छेड़छाड़ और साइबर खतरों से मीटर के डेटा तथा संचार माध्यमों की सुरक्षा के लिए प्रमाणीकरण, एन्क्रिप्शन और अन्य सुरक्षा उपायों का उपयोग करती है।

संशोधित वितरण क्षेत्र योजना (RDSS)
- RDSS को वर्ष 2021 में विद्युत वितरण व्यवसायों (DISCOMs) की परिचालन दक्षता और वित्तीय स्थिरता बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू किया गया था।
- इसका उद्देश्य वितरण हानियों को कम करना, विद्युत आपूर्ति की गुणवत्ता एवं विश्वसनीयता में सुधार करना तथा वितरण अवसंरचना का उन्नयन करना है।
- इस कार्यक्रम में स्मार्ट मीटरिंग का एक बड़ा घटक शामिल है, विशेष रूप से उपभोक्ताओं, फीडरों और वितरण ट्रांसफॉर्मरों (DTs) के लिए।
स्रोत: IE
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संक्षिप्त समाचार 25-09-2026