वंदे मातरम् और अंतःकरण की स्वतंत्रता
पाठ्यक्रम: GS2/ राजव्यवस्था और शासन
संदर्भ
- सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि सरकार राष्ट्रीय गीत के दायरे और उसकी अवधि निर्धारित कर सकती है, लेकिन वह धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन नहीं कर सकती और न ही ऐसे व्यक्तियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई थोप सकती है, जो अपने अंतःकरण के आधार पर इसे गाने से इनकार करते हैं।
संवैधानिक और कानूनी स्थिति
- संविधान सभा ने वंदे मातरम् को राष्ट्रगान के समान सम्मान के साथ राष्ट्रीय गीत का दर्जा प्रदान किया था, लेकिन दोनों के लिए समान कानूनी व्यवस्था निर्धारित नहीं की गई।
- राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) अधिनियम, 2026: यह राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 में संशोधन करने का प्रयास करता है।
- संशोधन के अंतर्गत राष्ट्रीय गीत के गायन को जानबूझकर रोकना या इसके गायन में संलग्न सभा में व्यवधान उत्पन्न करना अपराध बनाया गया है।
संवैधानिक प्रावधान
- अनुच्छेद 51A(a) — मौलिक कर्तव्य: प्रत्येक नागरिक के लिए संविधान, उसके आदर्शों और संस्थाओं, राष्ट्रीय ध्वज तथा राष्ट्रगान का सम्मान करना अनिवार्य करता है।
- स्पष्ट संवैधानिक संरक्षण का अभाव: राष्ट्रगान के विपरीत, वंदे मातरम् को संविधान के किसी प्रावधान के अंतर्गत स्पष्ट रूप से संरक्षण प्राप्त नहीं है।
- इसकी स्थिति प्रवर्तनीय संवैधानिक प्रावधान से नहीं, बल्कि संविधान सभा के प्रस्तावों से निर्धारित होती है।
- जहाँ अनिवार्य सहभागिता अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, अंतःकरण की स्वतंत्रता या धार्मिक विश्वास से संबंधित अधिकारों के साथ टकराती है, वहाँ अनुच्छेद 19(1)(a) और अनुच्छेद 25 प्रासंगिक हो जाते हैं।
बिजो एमैनुएल निर्णय, 1986
- बिजो एमैनुएल बनाम केरल राज्य (1986) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि वास्तविक धार्मिक विश्वास के आधार पर राष्ट्रगान के गायन में सम्मानपूर्वक भाग न लेना अनुच्छेद 19(1)(a) और अनुच्छेद 25 के तहत संरक्षित है।
- न्यायालय ने कहा कि केवल भाग न लेना अपने आप में राष्ट्रगान के प्रति अनादर नहीं माना जा सकता।
वंदे मातरम्
- वंदे मातरम् की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने संस्कृत में की थी।
- यह प्रथम बार 7 नवंबर 1875 को साहित्यिक पत्रिका बंगदर्शन में प्रकाशित हुआ। बाद में इसे वर्ष 1882 में प्रकाशित उपन्यास आनंदमठ में शामिल किया गया।
- आनंदमठ की पृष्ठभूमि 1769–73 के बंगाल अकाल और सन्यासी विद्रोह से जुड़ी हुई है।
- वंदे मातरम् का प्रथम बार सार्वजनिक गायन रवींद्रनाथ टैगोर ने वर्ष 1896 में कलकत्ता में आयोजित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में किया था।
- 1905 के स्वदेशी आंदोलन के दौरान वंदे मातरम् नागरिक प्रतिरोध के प्रमुख गीत के रूप में उभरा।
- एक राजनीतिक नारे के रूप में वंदे मातरम् का प्रयोग 7 अगस्त 1905 को किया गया था।
- राष्ट्रीय गीत: 24 जनवरी 1950 को इसकी प्रथम दो पंक्तियों को भारत के राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकार किया गया।
स्रोत: TH
विश्व गैंडा दिवस
पाठ्यक्रम: GS3/ समाचारों में प्रजातियाँ
समाचारों में
- विश्व गैंडा दिवस प्रत्येक वर्ष 22 सितंबर को विश्वभर में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य गैंडा प्रजातियों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
परिचय
- इस दिवस का प्रस्ताव प्रथम बार WWF-दक्षिण अफ्रीका द्वारा वर्ष 2010 में रखा गया था और वर्ष 2011 से इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाया जा रहा है। वर्तमान में इसका समन्वय मुख्यतः इंटरनेशनल राइनो फाउंडेशन (IRF) द्वारा किया जाता है।
- इस वर्ष की विषय-वस्तु “कीप द फाइव अलाइव (Keep the Five Alive)” है।
- IRF की 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, गैंडे की सभी पाँच प्रजातियों की वैश्विक जनसंख्या लगभग 26,700 है और पाँच में से चार प्रजातियाँ विलुप्त होने के खतरे का सामना कर रही हैं।
- इन चार प्रजातियों—काला गैंडा, सफेद गैंडा, सुमात्राई गैंडा और जावन गैंडा—का प्राकृतिक आवास केवल अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया तक सीमित है।

भारत में गैंडे की स्थिति
- विश्व में पाई जाने वाली पाँच जीवित गैंडा प्रजातियों में से केवल एक सींग वाला गैंडा (राइनोसिरोस यूनिकॉर्निस) भारत में पाया जाता है।
- भारतीय गैंडा एक सींग वाला गैंडा है, जबकि अफ्रीकी गैंडों के दो सींग होते हैं। इसकी त्वचा मोटी और परतदार होती है, जो इसे कवच जैसी आकृति प्रदान करती है।
- यह एशिया में पाई जाने वाली गैंडे की प्रजातियों में सबसे बड़ी है और यह जावन तथा सुमात्राई गैंडों से अलग विशेषताएँ रखता है।
- IUCN स्थिति: सुभेद्य तथा वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची-I के अंतर्गत संरक्षित।
- 20वीं सदी के प्रारंभ में आवास की हानि , शिकार तथा मानव-गैंडा संघर्षों के कारण यह प्रजाति लगभग विलुप्ति के कगार पर पहुँच गई थी।
- असम के काजीरंगा, मानस, पोबितोरा और ओरांग में लगभग 3,260 एक सींग वाले गैंडे पाए जाते हैं, जो इसकी वैश्विक जनसंख्या का लगभग 80% है।
- काजीरंगा को वर्ष 1974 में राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा मिला और बाद में वर्ष 2006 में इसे टाइगर रिजर्व बनाया गया। वर्ष 1985 में इसे यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता मिली, जिससे इसे अधिक सुदृढ़ कानूनी संरक्षण प्राप्त हुआ।
- इंडियन राइनो विजन 2020 (IRV 2020) को वर्ष 2005 में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य असम में गैंडों की जनसंख्या को बढ़ाकर 3,000 करना और उन्हें कम-से-कम सात संरक्षित क्षेत्रों में फैलाना था।
- IRV 2.0: वर्ष 2021 में शुरू की गई इस अनुवर्ती पहल का उद्देश्य वर्ष 2030 तक संरक्षित क्षेत्रों में 4,500–5,000 गैंडों के संरक्षण का लक्ष्य प्राप्त करना है।
स्रोत: PIB
अमेरिका–डेनमार्क–ग्रीनलैंड समझौता और आर्कटिक सुरक्षा
पाठ्यक्रम: GS2/ अंतरराष्ट्रीय संबंध
संदर्भ
- संयुक्त राज्य अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने आर्कटिक तथा उत्तरी अटलांटिक की सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इसमें ग्रीनलैंड में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति के विस्तार की योजनाएँ भी शामिल हैं।
ग्रीनलैंड के बारे में
- यह अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र है और डेनमार्क के साम्राज्य का हिस्सा है, जिसके NATO के साथ सुदृढ़ रक्षा संबंध हैं।
- स्थिति: यह आर्कटिक और उत्तरी अटलांटिक महासागरों के बीच, कनाडा के उत्तर-पूर्व में स्थित है।
- ग्रीनलैंड विश्व का सबसे बड़ा गैर-महाद्वीपीय द्वीप है और इसके लगभग 80% भू-भाग पर विशाल हिमचादर (Ice Sheet) का विस्तार है।


ग्रीनलैंड का सामरिक महत्व
- सैन्य महत्व: ग्रीनलैंड मिसाइल चेतावनी, मिसाइल रक्षा और उपग्रह निगरानी के लिए महत्वपूर्ण है, विशेष रूप से उत्तरी अमेरिका, यूरोप और आर्कटिक के बीच इसकी रणनीतिक स्थिति के कारण।
- रूस और चीन: आर्कटिक तक बढ़ती पहुँच ने रूस, चीन और NATO के सदस्य देशों के बीच भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को बढ़ा दिया है।
- उभरते समुद्री मार्ग: आर्कटिक समुद्री बर्फ के पिघलने से नए समुद्री मार्ग खुल रहे हैं, जिससे यह क्षेत्र भू-राजनीतिक और वाणिज्यिक दृष्टि से अधिक महत्वपूर्ण बन रहा है।
- महत्वपूर्ण खनिज: ग्रीनलैंड में खनिज संसाधनों का विशाल भंडार है, जिससे इसके सामरिक महत्व को आर्थिक आयाम भी प्राप्त होता है।
ग्रीनलैंड में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति
- अमेरिका दशकों से ग्रीनलैंड में सैन्य उपस्थिति बनाए हुए है।
- उत्तर-पश्चिमी ग्रीनलैंड स्थित पिटुफिक अंतरिक्ष अड्डा वर्तमान में अमेरिकी सैन्यकर्मियों की मेजबानी करता है तथा अमेरिका और NATO के लिए मिसाइल चेतावनी, मिसाइल रक्षा और अंतरिक्ष निगरानी अभियानों में सहयोग प्रदान करता है।
स्रोत: BBC
अंतरराष्ट्रीय मोबाइल उपकरण पहचान संख्या (IMEI)
पाठ्यक्रम: GS2/ शासन/GS3/ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
समाचारों में
- विस्तारित हो रहे डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र के साथ अंतरराष्ट्रीय मोबाइल उपकरण पहचान संख्या (IMEI) के दुरुपयोग की चिंता बढ़ रही है।
अंतरराष्ट्रीय मोबाइल उपकरण पहचान संख्या (IMEI)
- IMEI एक विशिष्ट 15-अंकीय संख्या है, जो दूरसंचार नेटवर्क पर किसी मोबाइल उपकरण की पहचान करती है।
- IMEI के प्रथम आठ अंक टाइप एलोकेशन कोड (TAC) बनाते हैं, जो उपकरण के मॉडल या प्रकार की पहचान करते हैं।
- ग्लोबल सिस्टम फॉर मोबाइल कम्युनिकेशंस एसोसिएशन (GSMA) निर्माताओं और ब्रांड स्वामियों को TAC के वैश्विक आवंटन की निगरानी करता है। इसके बाद निर्माता व्यक्तिगत उपकरणों को विशिष्ट IMEI प्रदान करते हैं।
- दोहरी-SIM वाले मोबाइल फोन में सामान्यतः दो IMEI नंबर होते हैं, प्रत्येक SIM स्लॉट के लिए एक।
अनधिकृत परिवर्तन से संबंधित मुद्दे
- अवैध IMEI अनधिकृत परिवर्तन से आशय मोबाइल उपकरण की विशिष्ट IMEI संख्या को जानबूझकर हटाने, मिटाने, या उसमें परिवर्तन करने से है।
- इसमें ऐसे हार्डवेयर या सॉफ्टवेयर का जानबूझकर उपयोग, निर्माण, बिक्री/तस्करी, नियंत्रण या कब्जा रखना भी शामिल है, जिन्हें IMEI में परिवर्तन या हेरफेर करने के लिए विन्यस्त किया गया हो।
- ऐसी गतिविधियाँ उपकरण की पहचान में बाधा डाल सकती हैं, कानून प्रवर्तन को जटिल बना सकती हैं तथा दूरसंचार नेटवर्क की सुरक्षा को कमजोर कर सकती हैं।
IMEI से अनधिकृत परिवर्तन के विरुद्ध कानूनी संरक्षण
- भारत में दूरसंचार पारिस्थितिकी तंत्र की अखंडता की रक्षा के लिए एक सुदृढ़ कानूनी ढाँचा उपस्थित है।
- दूरसंचार अधिनियम, 2023 स्मार्टफोन तथा अन्य दूरसंचार उपकरणों के IMEI जैसे दूरसंचार पहचानकर्ताओं में हेरफेर के विरुद्ध कठोर कार्रवाई का प्रावधान करता है।
सुझाए गए उपाय
- निर्माताओं और आयातकों को डिवाइस सेतु–ICDR पोर्टल के माध्यम से वास्तविक और विशिष्ट IMEI का पंजीकरण एवं प्रमाणीकरण सुनिश्चित करना चाहिए। विक्रेताओं को IMEI का सत्यापन करना चाहिए तथा परिवर्तित उपकरणों के व्यापार से बचना चाहिए।
- उपभोक्ताओं को लाइसेंस प्राप्त विक्रेताओं से ही उपकरण खरीदने चाहिए, अपने उपकरणों को सुरक्षित रखना चाहिए, अधिकृत मरम्मत केंद्रों का उपयोग करना चाहिए तथा IMEI का सत्यापन करना चाहिए। उपकरण के खो जाने या चोरी होने की स्थिति में उन्हें पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करानी चाहिए, प्रतिस्थापन SIM प्राप्त करनी चाहिए तथा संचार साथी/CEIR के माध्यम से उपकरण को ब्लॉक कर देना चाहिए, ताकि धोखाधड़ी की रोकथाम और दूरसंचार सुरक्षा को सुदृढ़ करने में सहायता मिल सके।
स्रोत: PIB
लैटिन अमेरिकी और कैरेबियाई राज्यों का समुदाय (CELAC)
पाठ्यक्रम: GS2/अंतरराष्ट्रीय संबंध
संदर्भ
- विदेश मंत्री ने भारत–लैटिन अमेरिकी और कैरेबियाई राज्यों के समुदाय (CELAC) के विदेश मंत्रियों की बैठक में ग्लोबल साउथ के देशों के बीच अधिक एकजुटता का आह्वान किया।
परिचय
- लैटिन अमेरिकी और कैरेबियाई राज्यों का समुदाय (CELAC) लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई क्षेत्र के 33 देशों का एक क्षेत्रीय समूह है।
- इसका गठन वर्ष 2010 में आयोजित एकता शिखर सम्मेलन के दौरान किया गया था, जिसमें रियो समूह का 21वाँ शिखर सम्मेलन तथा एकीकरण और विकास पर दूसरा लैटिन अमेरिकी एवं कैरेबियाई शिखर सम्मेलन (CALC) शामिल था।
- उद्देश्य: क्षेत्र के राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक एकीकरण को सुदृढ़ करने के लिए सभी लैटिन अमेरिकी और कैरेबियाई देशों को एकजुट करना।
- यह रियो समूह तथा एकीकरण और विकास पर दूसरे लैटिन अमेरिकी एवं कैरेबियाई शिखर सम्मेलन (CALC) का उत्तराधिकारी संगठन है।
- वर्ष 2025–26 में भारत–CELAC द्विपक्षीय व्यापार बढ़कर 50 अरब डॉलर हो गया।
- भारत ने विभिन्न व्यापक क्षेत्रों में CELAC देशों के साथ अपनी साझेदारी को सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
- यह बैठक लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई क्षेत्र में भारत की बढ़ती सक्रिय भागीदारी तथा साझेदारी को नई ऊँचाइयों तक ले जाने की पारस्परिक इच्छा को दर्शाती है।
स्रोत: MEA
राष्ट्रीय एकल खिड़की प्रणाली
पाठ्यक्रम: GS2/शासन
समाचारों में
- हाल ही में राष्ट्रीय एकल खिड़की प्रणाली (NSWS) ने अपने 5 वर्ष पूर्ण किए।
राष्ट्रीय एकल खिड़की प्रणाली (NSWS)
- इसे वर्ष 2021 में शुरू किया गया था और इसका कार्यान्वयन वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) द्वारा किया जाता है।
- यह केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों और नियामक प्राधिकरणों द्वारा प्रदान की जाने वाली स्वीकृतियों को एक समान डिजिटल मंच पर एकीकृत करती है।
- यह निवेशकों को स्वीकृतियों की पहचान करने, उनके लिए आवेदन करने तथा उनकी स्थिति पर नज़र रखने के लिए एकल खिड़की सुविधा प्रदान करती है।
- इसकी प्रमुख विशेषताओं में अपनी स्वीकृतियों को जानें , सामान्य पंजीकरण प्रपत्र , आवेदक डैशबोर्ड , दस्तावेज़ भंडार और ई-संचार मॉड्यूल शामिल हैं।
महत्व
- यह एकल बार दस्तावेज़ प्रस्तुत करने, ऑनलाइन प्रसंस्करण और वास्तविक समय में स्थिति की निगरानी के माध्यम से स्वीकृति प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करती है, दोहराव और अनुपालन के भार को कम करती है तथा स्वीकृति प्राप्त करने में लगने वाले समय को घटाती है। साथ ही, यह पारदर्शिता और समन्वय को बेहतर बनाती है।
- यह केंद्रीय मंत्रालयों, राज्यों और नियामक प्राधिकरणों के बीच बढ़ते एकीकरण का लाभ उठाकर भारत में व्यवसाय करने में सुगमता को बढ़ाने तथा अधिक सुगम निवेश पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण में योगदान दे रही है।
स्रोत: PIB
भारत का प्रथम ब्लू बॉन्ड जारी होने की तैयारी
पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- सागरमाला फाइनेंस कॉरपोरेशन ने भारत के प्रथम ब्लू बॉन्ड के माध्यम से 6 अरब रुपये एकत्रित करने की योजना बनाई है।
ब्लू बॉन्ड क्या हैं?
- ब्लू बॉन्ड एक ऋण साधन है, जिसे राष्ट्रीय सरकारों, विकास बैंकों और कॉरपोरेट संस्थाओं द्वारा समुद्री एवं महासागरीय परियोजनाओं के लिए वित्त एकत्रण हेतु जारी किया जाता है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य दीर्घकालिक सततता और उससे संबंधित लाभ सुनिश्चित करना होता है।
- ब्लू बॉन्ड पारंपरिक बॉन्ड की तरह कार्य करते हैं, जिसमें निवेशक बॉन्ड जारीकर्ता को पूँजी उधार देता है। जारीकर्ता बॉन्ड की अवधि समाप्त होने तक प्रत्येक वर्ष ब्याज के साथ मूल निवेश की राशि वापस करता है।
- सेशेल्स ने विश्व बैंक की SWIOFish3 परियोजना के माध्यम से विश्व का प्रथम संप्रभु ब्लू बॉन्ड जारी किया था, जिसका उद्देश्य उसकी महासागरीय अर्थव्यवस्था की सुरक्षा करना था।
सागरमाला फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड (SMFCL)
- इसे वर्ष 2016 में पोत परिवहन मंत्रालय द्वारा कंपनी अधिनियम, 2013 के अंतर्गत निगमित किया गया था।
- पूर्व में सागरमाला डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड (SDCL) के नाम से जानी जाने वाली SMFCL को वर्ष 2025 में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) का लाइसेंस प्राप्त हुआ, जिससे यह भारत के समुद्री क्षेत्र की पहली NBFC बन गई।
स्रोत: BS
अभ्यास तरंग शक्ति
पाठ्यक्रम: GS3/रक्षा
संदर्भ
- भारतीय वायु सेना के बहुराष्ट्रीय वायु अभ्यास तरंग शक्ति 2026 के दूसरे संस्करण का आयोजन वायु सेना स्टेशन, जोधपुर तथा आसपास के वायु अड्डों पर किया जा रहा है।
परिचय
- इस अभ्यास का उद्देश्य सभी प्रतिभागियों को वास्तविक और समकालीन युद्धक्षेत्र की परिस्थितियों में बहुराष्ट्रीय संयुक्त युद्ध अभियानों की योजना बनाने एवं उन्हें संचालित करने का अनुभव प्रदान करना तथा सामरिक रूप से व्यवहार्य समाधान विकसित करना है।
- ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, फ्रांस, जर्मनी, ग्रीस, श्रीलंका, संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका सहित आठ मित्र विदेशी देश अपने वायु संसाधनों के साथ अभ्यास में भाग लेंगे, जबकि 32 देश पर्यवेक्षकों के रूप में इसमें शामिल होंगे।
- इस अभ्यास का प्रथम संस्करण वर्ष 2024 में आयोजित किया गया था और इसे तमिलनाडु के सुलूर तथा राजस्थान के जोधपुर में दो चरणों में संचालित किया गया था।
स्रोत: AIR
खैर वृक्ष
पाठ्यक्रम: GS1/समाचारों में प्रजातियाँ
संदर्भ
- पश्चिमी ओडिशा के वनों में खैर वृक्ष कथित तौर पर 120 करोड़ रुपये के अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क का हिस्सा बन गया है।
परिचय
- खैर वृक्ष फैबेसी (Fabaceae) कुल से संबंधित है, जिसमें नाइट्रोजन स्थिरीकरण करने वाली कई प्रजातियाँ शामिल हैं, जो मृदा की उर्वरता बढ़ाने के लिए जानी जाती हैं।
- खैर वृक्ष (अकेसिया कैटेचू) भारतीय उपमहाद्वीप में पाए जाने वाले सबसे महत्वपूर्ण देशज वृक्षों में से एक है।
- खैर वृक्ष लंबे समय से अपनी टिकाऊ प्रकृति, औषधीय गुणों और पारंपरिक उद्योगों में भूमिका के लिए महत्वपूर्ण रहा है।
- खैर वृक्ष के हृदयकाष्ठ से प्राप्त कत्था (कैटेचू एक्सट्रैक्ट) का व्यापक रूप से पान में उपयोग किया जाता है और यह पूरे भारत में पान की दुकानों पर सामान्यतः उपलब्ध होता है।
स्रोत: IE
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संक्षिप्त समाचार 23-09-2026