सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज की दिशा में प्रगति 

पाठ्यक्रम: GS2/स्वास्थ्य/शासन

संदर्भ

  • आठ वर्ष पहले आयुष्मान भारत की शुरुआत इस विचार के साथ की गई थी कि प्रत्येक भारतीय को उच्च गुणवत्ता वाली और वहनीय स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच प्राप्त हो।

परिचय

  • भारत सरकार ने वर्ष 2018 में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB PM-JAY) का शुभारंभ किया।
  • उद्देश्य: सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज प्राप्त करना।
  • यह एक सार्वजनिक स्वास्थ्य आश्वासन योजना है, जिसके अंतर्गत द्वितीयक और तृतीयक स्तर की स्वास्थ्य सेवाएँ शामिल हैं।
  • यह विश्व की सबसे बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य योजनाओं में से एक है। भारत की लगभग 33% जनसंख्या अर्थात 48.51 करोड़ से अधिक लोगों के पास पहले से ही आयुष्मान कार्ड हैं।

सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज क्या है?

  • इसका अर्थ है कि सभी लोगों को वित्तीय कठिनाई का सामना किए बिना गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की संपूर्ण शृंखला तक पहुँच प्राप्त हो।
  • UHC के प्रमुख घटक: स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच: प्रत्येक व्यक्ति को आवश्यकता पड़ने पर आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएँ प्राप्त करने में सक्षम होना चाहिए।
    • गुणवत्तापूर्ण सेवाएँ: प्रदान की जाने वाली स्वास्थ्य सेवाएँ प्रभावी, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण होनी चाहिए।
    • वित्तीय संरक्षण: चिकित्सा व्यय के कारण व्यक्तियों को वित्तीय कठिनाइयों का सामना नहीं करना चाहिए।
  • UHC की आधारशिला स्वास्थ्य के सार्वभौमिक मानवाधिकार में निहित है, जिसे अंतरराष्ट्रीय अभिसमयों और अल्मा-अता घोषणा (1978) में मान्यता दी गई थी। इस घोषणा में व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल को प्राथमिकता दी गई थी।

भारत में सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज की आवश्यकता

  • स्वास्थ्य पर उच्च प्रत्यक्ष व्यय: स्वास्थ्य देखभाल पर होने वाले व्यय का एक महत्वपूर्ण हिस्सा परिवारों द्वारा सीधे वहन किया जाता है, जिससे सुभेद्य परिवार को वित्तीय संकट सामना करना पड़ सकता हैं।
  • स्वास्थ्य सेवाओं तक असमान पहुँच: ग्रामीण, जनजातीय और दूरदराज के क्षेत्रों में अक्सर चिकित्सकों, विशेषज्ञों, नैदानिक सुविधाओं तथा गुणवत्तापूर्ण अस्पतालों की कमी रहती है, जिससे भौगोलिक असमानताएँ उत्पन्न होती हैं।
  • रोगों का व्यापक भार: भारत संक्रामक और गैर-संक्रामक दोनों प्रकार के रोगों के दोहरे भार का सामना कर रहा है, जिसके लिए सुलभ निवारक, प्राथमिक और विशिष्ट स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता है।
  • निवारक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल: UHC महँगी अस्पताल-आधारित चिकित्सा से ध्यान हटाकर रोगों की रोकथाम, शीघ्र निदान और प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल की ओर केंद्रित कर सकता है, जिससे तृतीयक स्वास्थ्य सुविधाओं पर भार कम होगा।
  • जनसांख्यिकीय एवं महामारी-विज्ञान संबंधी संक्रमण: वृद्ध होती जनसंख्या और दीर्घकालिक रोगों की बढ़ती व्यापकता के साथ भारत को दीर्घकालिक एवं वहनीय स्वास्थ्य सेवाओं तक सतत पहुँच सुनिश्चित करने की आवश्यकता है।

UHC का संवैधानिक आधार:

  • भारतीय संविधान के भाग IV में निहित राज्य के नीति-निदेशक तत्व स्वास्थ्य के अधिकार के लिए आधार प्रदान करते हैं।
  • अनुच्छेद 39 (e) राज्य को श्रमिकों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश देता है; अनुच्छेद 42 न्यायसंगत एवं मानवीय कार्य दशाओं तथा प्रसूति सहायता पर बल देता है; और अनुच्छेद 47 राज्य को पोषण स्तर एवं जीवन स्तर को ऊँचा उठाने तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार करने का दायित्व सौंपता है।
  • संविधान के अनुच्छेद 243G के अंतर्गत पंचायतों और नगरपालिकाओं को भी सार्वजनिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने के लिए अधिकार एवं दायित्व प्रदान किए गए हैं।

भारत में UHC को अपनाने की चुनौतियाँ

  • संसाधनों की सीमाएँ: भारत को स्वास्थ्य क्षेत्र में वित्तपोषण की महत्वपूर्ण सीमाओं का सामना करना पड़ता है और कई अन्य देशों की तुलना में सार्वजनिक स्वास्थ्य पर व्यय अपेक्षाकृत कम है। इससे व्यापक स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने की क्षमता प्रभावित होती है।
  • अवसंरचनात्मक कमियाँ: अनेक क्षेत्रों, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में अस्पतालों, क्लीनिकों और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों सहित पर्याप्त स्वास्थ्य अवसंरचना का अभाव है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच कठिन हो जाती है।
  • स्वास्थ्यकर्मियों की कमी: विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य पेशेवरों की कमी है, जिसके कारण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच और गुणवत्ता में असमानताएँ उत्पन्न होती हैं।
  • खंडित स्वास्थ्य प्रणाली: भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था में सार्वजनिक और निजी, दोनों प्रकार के सेवा प्रदाता शामिल हैं, जिसके परिणामस्वरूप सेवाओं की गुणवत्ता और उपलब्धता में असंगतियाँ देखने को मिलती हैं।
    • इसके अतिरिक्त, स्वास्थ्य राज्य का विषय है, जबकि वित्तपोषण और प्रमुख योजनाएँ मुख्यतः केंद्र द्वारा संचालित की जाती हैं, जिसके परिणामस्वरूप विभिन्न राज्यों में स्वास्थ्य संबंधी परिणामों में असमानता दिखाई देती है।

निष्कर्ष

  • AB-PMJAY पात्र लाभार्थियों के लिए गुणवत्तापूर्ण और वहनीय द्वितीयक एवं तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच का विस्तार करती है, जबकि आयुष्मान आरोग्य मंदिर व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल को समुदायों के और अधिक निकट पहुँचाते हैं।
  • ABHA (आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट) व्यक्तियों को एक विशिष्ट डिजिटल स्वास्थ्य पहचान बनाने तथा संबद्ध स्वास्थ्य सेवा संस्थानों में अपने स्वास्थ्य अभिलेखों तक पहुँच प्राप्त करने में सक्षम बनाता है।
  • PM-ABHIM स्वास्थ्य केंद्रों, प्रयोगशालाओं और महत्वपूर्ण देखभाल सुविधाओं के विकास में सहायता प्रदान करके बुनियादी स्तर से लेकर जिला स्तर तक स्वास्थ्य प्रणाली की अवसंरचना और आपातकालीन तैयारी को सुदृढ़ करता है।
  • ये पहलें प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल, डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं से लेकर अस्पताल-आधारित उपचार और सुदृढ़ स्वास्थ्य अवसंरचना तक स्वास्थ्य सेवाओं की सतत शृंखला को सुदृढ़ करती हैं।

स्रोत: PIB

 

Other News of the Day

पाठ्यक्रम: GS2/ अंतरराष्ट्रीय संबंध संदर्भ बहुपक्षवाद के लिए साझेदार (Partners for Multilateralism—P4M) पहल का शुभारंभ संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के अवसर पर किया गया। ऑस्ट्रेलिया, बारबाडोस, ब्राज़ील, कनाडा, यूरोपीय संघ, भारत और केन्या इसके प्रारंभिक सह-प्रायोजक थे। बहुपक्षवाद के लिए साझेदार (P4M) क्या है? बहुपक्षवाद के लिए साझेदार विभिन्न क्षेत्रों और राजनीतिक परंपराओं...
Read More

पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था संदर्भ हाल के कॉरपोरेट अनुसंधान एवं विकास (R&D) संबंधी आँकड़े दर्शाते हैं कि भारतीय कंपनियाँ नवाचार पर अपने व्यय में वृद्धि कर रही हैं, लेकिन निवेश की मात्रा अभी भी वैश्विक प्रतिस्पर्धियों के समकक्ष पहुँचने और सतत तकनीकी प्रतिस्पर्धात्मकता विकसित करने के लिए पर्याप्त नहीं है। भारत में अनुसंधान एवं विकास की वर्तमान...
Read More

पाठ्यक्रम: GS3/ कृषि संदर्भ महाराष्ट्र ने जुलाई 2026 में महिला किसान सशक्तीकरण विधेयक पारित किया, जिसके अंतर्गत भूमि के स्वामित्व से स्वतंत्र रूप से महिलाओं को महिला किसान प्रमाण-पत्र के माध्यम से किसान के रूप में स्वतंत्र पहचान प्रदान करने का प्रावधान किया गया है। कृषि में महिलाओं की बढ़ती भूमिका भारतीय कृषि में महिलाओं...
Read More

वंदे मातरम् और अंतःकरण की स्वतंत्रता पाठ्यक्रम: GS2/ राजव्यवस्था और शासन संदर्भ सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि सरकार राष्ट्रीय गीत के दायरे और उसकी अवधि निर्धारित कर सकती है, लेकिन वह धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन नहीं कर सकती और न ही ऐसे व्यक्तियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई थोप सकती है, जो अपने अंतःकरण के आधार...
Read More
scroll to top