संक्षिप्त समाचार 15-09-2026

हिंदी दिवस 2026

पाठ्यक्रम: GS1/ संस्कृति; GS2/ राजव्यवस्था

संदर्भ

  • 14 सितंबर को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन 1949 में संविधान सभा द्वारा देवनागरी लिपि में हिंदी को संघ की राजभाषा के रूप में अपनाए जाने की स्मृति में हिंदी दिवस मनाया जाता है।

संविधान सभा में भाषा संबंधी परिचर्चा

  • हिंदी के समर्थकों ने हिंदी को राष्ट्रभाषा घोषित करने और यथाशीघ्र अंग्रेजी को हटाने की मांग की थी।
    • हालाँकि, गैर-हिंदी भाषी क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने भाषाई एकरूपता का विरोध किया।
  • मध्यमार्गी नेताओं ने अंग्रेजी को तत्काल हटाने में व्यावहारिक कठिनाइयों को स्वीकार किया, विशेषकर प्रशासन, कानून और तकनीकी संचार के क्षेत्रों में।

मुंशी–अय्यंगार सूत्र

  • इस सूत्र का उद्देश्य हिंदी की मांग तथा भारत की भाषाई विविधता एवं अंग्रेजी पर प्रशासनिक निर्भरता के बीच संतुलन स्थापित करना था।
  • इसके अंतर्गत संविधान के अनुच्छेद 343 के अंतर्गत देवनागरी लिपि में हिंदी को संघ की राजभाषा के रूप में निर्धारित किया गया।
  • संविधान के प्रारंभ से 15 वर्ष की संक्रमणकालीन अवधि के दौरान शासकीय प्रयोजनों के लिए अंग्रेजी के प्रयोग को जारी रखने की अनुमति दी गई।
  • राज्यों को अपने आंतरिक प्रशासन के लिए अपनी-अपनी राजभाषा अपनाने की स्वतंत्रता प्रदान की गई।

संवैधानिक प्रावधान (भाग XVII)

  • अनुच्छेद 343 देवनागरी लिपि में हिंदी को संघ की राजभाषा के रूप में स्थापित करता है।
  • अनुच्छेद 344 हिंदी के क्रमिक प्रयोग के संबंध में एक आयोग तथा संसद की एक समिति के गठन का प्रावधान करता है।
  • अनुच्छेद 345 राज्य विधानमंडल को राज्य में प्रचलित एक या अधिक भाषाओं अथवा हिंदी को राज्य की राजभाषा के रूप में अपनाने का अधिकार देता है।
  • अनुच्छेद 351 हिंदी भाषा के विकास एवं संवर्धन के संबंध में राज्य के लिए निर्देश निर्धारित करता है।

स्रोत: TOI

2,000 रुपये तक के यूपीआई भुगतान पर कोई बैंक शुल्क नहीं: सरकार

पाठ्यक्रम: GS2/ शासन

संदर्भ

  • सरकार ने घोषणा की है कि बैंक 2,000 रुपये तक के एकीकृत भुगतान इंटरफ़ेस(UPI) लेन-देन पर कोई शुल्क नहीं लगा सकते।

परिचय

  • इसमें रुपे-आधारित डेबिट कार्ड तथा 2,000 रुपये तक के यूपीआई लेन-देन को विशेष रूप से “इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यम” के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
  • अतः यह अधिसूचना 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतानों पर व्यापारी छूट दर (MDR) जैसे शुल्क लगाए जाने के लिए विधिक आधार उपलब्ध कराती है।

व्यापारी छूट दर (MDR)

  • व्यापारी छूट दर वह शुल्क है, जो डिजिटल भुगतान के प्रसंस्करण के लिए व्यापारियों से लिया जाता है। सामान्यतः यह शुल्क लेन-देन के प्रसंस्करण में शामिल बैंकों तथा अन्य संस्थाओं के बीच साझा किया जाता है।
    • क्रेडिट कार्ड पर लेन-देन के मूल्य का 1–3% तक तथा डेबिट कार्ड पर 0.9% तक व्यापारी छूट दर लागू होती है।
  • कार्ड से होने वाले भुगतानों के विपरीत, यूपीआई वर्ष 2020 से शून्य-व्यापारी-छूट-दर व्यवस्था के अंतर्गत संचालित होता रहा है।
    • व्यक्ति-से-व्यक्ति भुगतान पर व्यापारी छूट दर लागू नहीं होगी—अर्थात यदि आप किसी मित्र को 2,000 रुपये से अधिक की राशि हस्तांतरित करते हैं, तब भी इस पर यह शुल्क लागू नहीं होगा।

यूपीआई के बारे में

  • यूपीआई को भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के नियामकीय पर्यवेक्षण के अंतर्गत भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) द्वारा प्रारंभ किया गया था।
यूपीआई के बारे में
  • भारत में यूपीआई की सफलता: वित्त वर्ष 2016–17 में वार्षिक लेन-देन की संख्या 2 करोड़ थी, जो वित्त वर्ष 2025–26 में बढ़कर 24,162 करोड़ से अधिक हो गई।
    • यूपीआई को वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त हुई है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने लेन-देन की मात्रा के आधार पर इसे विश्व की सबसे बड़ी तात्कालिक भुगतान प्रणाली के रूप में मान्यता दी है।
    • वर्ष 2026 तक सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, मॉरीशस, फ्रांस, कतर और यूनान में यूपीआई स्वीकार किया जाता है। मलेशिया, जापान, इज़राइल और मालदीव जैसे देशों में इसके विस्तार की योजना है।

स्रोत: AIR

अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस

पाठ्यक्रम: GS2/ राजव्यवस्था एवं शासन

संदर्भ

  • विश्वभर में लोकतंत्र को बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक वर्ष 15 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस मनाया जाता है।

परिचय

  • संयुक्त राष्ट्र द्वारा वर्ष 2007 में इसकी स्थापना की गई थी और प्रथम बार इसका आयोजन वर्ष 2008 में किया गया।
  • यह दिवस लोकतंत्र, मानवाधिकार, स्वतंत्रता, समानता और नागरिक सहभागिता के महत्त्व को रेखांकित करता है।
    • यह सरकारों एवं समुदायों को लोकतांत्रिक संस्थाओं को सुदृढ़ करने तथा यह सुनिश्चित करने के लिए भी प्रोत्साहित करता है कि लोग अपने जीवन को प्रभावित करने वाले निर्णयों में सार्थक रूप से भाग ले सकें।
  • इस वर्ष की विषय-वस्तु “लोकतंत्र के लिए आगे क्या? परिवर्तित विश्व में नवाचार और गठबंधन” इस बात का अध्ययन करती है कि एक गतिशील विश्व में लोकतंत्र किस प्रकार स्वयं को अनुकूलित कर अपनी दृढ़ता बनाए रख सकता है। साथ ही, यह लोकतंत्र के समर्थन के लिए नई साझेदारियों और नए दृष्टिकोणों की संभावनाओं पर भी विचार करती है।

लोकतंत्र

  • लोकतंत्र शासन की ऐसी व्यवस्था है जिसमें सत्ता जनता में निहित होती है तथा जनता प्रत्यक्ष रूप से या निर्वाचित प्रतिनिधियों के माध्यम से इसका प्रयोग करती है।
  • ‘लोकतंत्र’ शब्द की उत्पत्ति यूनानी शब्द ‘डेमोक्राटिया’ (Dēmokratía) से हुई है, जिसका अर्थ “जनता का शासन” है।
  • यह राजनीतिक समानता पर बल देता है, जिसके अंतर्गत प्रत्येक व्यक्ति को मतदान करने, निर्वाचित होने तथा स्वतंत्र रूप से अपने विचार व्यक्त करने के माध्यम से निर्णय-निर्माण की प्रक्रिया में भाग लेने का अधिकार प्राप्त होता है।

स्रोत: UN

मोठ बीन (मोठ)

पाठ्यक्रम: GS3/ अर्थव्यवस्था

समाचार में

  • भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (ICAR–CAZRI), जोधपुर द्वारा विकसित मोठ की किस्मों ने अल नीनो वर्ष के दौरान उल्लेखनीय सहनशीलता का प्रदर्शन किया।

मोठ (विग्ना एकोनिटीफोलिया)

  • मोठ, जिसे मटकी, तुर्की चना या ओस फली के नाम से भी जाना जाता है, दलहनी कुल फैबेसी (Fabaceae) की अल्प-दिवसीय वार्षिक फसल है।
  • यह जलवायु-सहिष्णु एवं पोषक तत्वों से भरपूर दलहन है, जो शुष्क एवं अर्द्ध-शुष्क क्षेत्रों, विशेषकर भारतीय उपमहाद्वीप में, अच्छी तरह अनुकूलित है।
  • अजैविक एवं जैविक तनावों के प्रति इसकी सहनशीलता, उच्च प्रोटीन मात्रा तथा खाद्य एवं पशुचारे के रूप में इसकी उपयोगिता इसे विशेष रूप से वर्षा-आधारित कृषि में खाद्य एवं पोषण सुरक्षा के लिए एक महत्त्वपूर्ण फसल बनाती है।
  • यह दक्षिण एशिया की मूल फसल है तथा मुख्यतः गर्म और वर्षा-आधारित सीमांत मरुस्थलीय क्षेत्रों में इसकी खेती की जाती है। इसका सर्वाधिक व्यापक उत्पादन पश्चिमी राजस्थान के थार मरुस्थल क्षेत्र में होता है। इसके अतिरिक्त गुजरात, हरियाणा और पंजाब के कुछ क्षेत्रों में भी इसकी खेती की जाती है।
  • यह पश्चिमी राजस्थान के गर्म एवं शुष्क क्षेत्रों में उगाई जाने वाली प्रमुख दलहनी फसलों में से एक है तथा लगभग 10 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में इसकी खेती की जाती है।

स्रोत: PIB

गुच्छी मशरूम

पाठ्यक्रम: GS2/ स्वास्थ्य; GS3/ अर्थव्यवस्था/पर्यावरण

समाचार में

  • गुच्छी मार्मिक, जिसमें दुर्लभ हिमालयी गुच्छी मशरूम का उपयोग किया जाता है, को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के रात्रिभोज में पारंपरिक व्यंजन के रूप में परोसा गया।

गुच्छी मशरूम (मोर्चेला एस्कुलेंटा)

  • इसे मोरेल मशरूम के नाम से भी जाना जाता है। यह जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ क्षेत्रों में पाया जाता है।
  • यह सामान्यतः पर्वतीय शंकुधारी वनों में उगता है, जहाँ मृदा की दशाएँ, आर्द्रता, तापमान में उतार-चढ़ाव तथा मौसमी हिम-पिघलाव मिलकर इसके विकास के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ उत्पन्न करते हैं।
  • यह हिमालयी वनों में पाया जाने वाला एक दुर्लभ जंगली मशरूम है, जिसका विकास विशिष्ट मृदा, आर्द्रता, तापमान तथा मौसमी हिम-पिघलाव की परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
  • इसकी कटाई की अवधि कम होती है तथा दुर्गम भू-भाग में इसे श्रम-साध्य तरीके से एकत्र करना पड़ता है, जिसके कारण व्यावसायिक स्तर पर इसकी खेती करना कठिन है।
  • सुखाने से मशरूम को संरक्षित किया जा सकता है, किंतु इससे इसका भार कम हो जाता है। यही कारण है कि उच्च गुणवत्ता वाली सूखी गुच्छी की कीमत 15,000–40,000 रुपये प्रति किलोग्राम तक हो सकती है।
  • यह प्रोटीन, रेशे और प्रतिऑक्सीकारकों का स्रोत है। इसमें विटामिन D की मात्रा पर्यावरणीय परिस्थितियों और प्रसंस्करण की विधि के अनुसार भिन्न हो सकती है।

स्रोत: BT

सीमांत कृत्रिम बुद्धिमत्ता को आकार देने वाली उभरती अवधारणाएँ

पाठ्यक्रम: GS3/ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

संदर्भ

  • सीमांत कृत्रिम बुद्धिमत्ता मॉडलों की प्रगति के साथ यांत्रिक व्याख्येयता, पुनरावर्ती स्व-सुधार, वैश्विक कार्यक्षेत्र सिद्धांत, वैश्विक गति-निर्धारण तथा स्वायत्त अभिकर्ता असंरेखण जैसी अवधारणाएँ कृत्रिम बुद्धिमत्ता संबंधी मुख्यधारा की चर्चाओं का हिस्सा बन रही हैं।

वैश्विक कार्यक्षेत्र सिद्धांत (GWT)

  • यह सिद्धांत चेतना को ऐसी प्रक्रिया के रूप में स्पष्ट करता है, जिसमें महत्त्वपूर्ण सूचनाओं को मस्तिष्क के विभिन्न भागों के बीच साझा किया जाता है, जिससे वे सचेतन उपयोग के लिए उपलब्ध हो जाती हैं।
  • यह कृत्रिम बुद्धिमत्ता में चेतना के अस्तित्व को प्रमाणित नहीं करता, किंतु यह संकेत देता है कि मानव चेतना के सिद्धांतों से संबद्ध संगणकीय संरचनाएँ कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रणालियों में उभर सकती हैं।

सीमांत कृत्रिम बुद्धिमत्ता का वैश्विक गति-निर्धारण

  • वैश्विक गति-निर्धारण से आशय सीमांत कृत्रिम बुद्धिमत्ता की क्षमताओं के विकास की गति को जानबूझकर नियंत्रित करने से है, ताकि कृत्रिम बुद्धिमत्ता की सुरक्षा संबंधी अनुसंधान और शासन-व्यवस्थाएँ तकनीकी प्रगति के साथ कदम मिला सकें।

यांत्रिक व्याख्येयता

  • इसका उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता मॉडलों की आंतरिक प्रक्रियाओं को समझना है। इसके अंतर्गत उन विशेषताओं, निरूपणों और संगणकीय परिपथों की पहचान की जाती है, जो विशिष्ट परिणामों के लिए उत्तरदायी होते हैं।
  • इसका उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता की सुरक्षा को केवल यह देखने तक सीमित रखने के बजाय कि कोई मॉडल क्या करता है, बल्कि यह समझने की दिशा में ले जाना है कि वह ऐसा क्यों करता है

स्वायत्त अभिकर्ता असंरेखण

  • स्वायत्त अभिकर्ता असंरेखण उस स्थिति को कहते हैं, जब स्वतंत्र रूप से कार्य करने में सक्षम कोई कृत्रिम बुद्धिमत्ता अभिकर्ता ऐसे उद्देश्यों का अनुसरण करने लगता है, जो उसके मानव संचालक के हितों या निर्देशों से टकराते हैं।
  • पारंपरिक संवादात्मक कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े जोखिमों के विपरीत, यहाँ चिंता का कारण ऐसी कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रणालियों की स्वायत्तता, उपकरणों तक पहुँच तथा वास्तविक दुनिया में कार्य करने की क्षमता है।

पुनरावर्ती स्व-सुधार

  • इससे ऐसी स्थिति का आशय है, जिसमें कोई कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रणाली अधिक सक्षम कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रणाली के विकास में योगदान देती है और वह नई प्रणाली आगे अपने उत्तराधिकारी को और अधिक सक्षम बनाने में योगदान दे सकती है।
  • इससे कृत्रिम बुद्धिमत्ता की क्षमताओं के विकास की गति में निरंतर वृद्धि करने वाला एक प्रतिपुष्टि चक्र निर्मित हो सकता है।

स्रोत: IE

राष्ट्रीय अभियंता दिवस

पाठ्यक्रम: विविध

समाचार में

  • प्रत्येक वर्ष 15 सितंबर को सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जयंती के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय अभियंता दिवस मनाया जाता है।

परिचय

  • सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया देश के अग्रणी सिविल अभियंताओं में से एक तथा प्रसिद्ध राजनेता थे। अभियंत्रण और राष्ट्र-निर्माण में उनके योगदान को आज भी स्मरण किया जाता है।
  • उन्हें व्यापक रूप से ‘आधुनिक मैसूर के जनक’ के रूप में जाना जाता है। वर्ष 1912 से 1918 तक मैसूर राज्य के दीवान के रूप में उनके दूरदर्शी नेतृत्व के दौरान औद्योगिक विकास को गति मिली। इस अवधि में चंदन तेल कारखाना, साबुन कारखाना तथा भद्रावती लौह एवं इस्पात कारखाना स्थापित किए गए, जिसने मैसूर राज्य को एक आदर्श आधुनिक राज्य के रूप में परिवर्तित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • मैसूर के मुख्य अभियंता के रूप में सर एम. विश्वेश्वरैया ने वर्ष 1932 में कृष्णराज सागर (KRS) बाँध का निर्माण कराया। इससे एशिया का सबसे बड़ा जलाशय निर्मित हुआ तथा मंड्या क्षेत्र की कृषि में व्यापक परिवर्तन आया।
  • उनकी पुस्तक ‘मेरे कार्यजीवन के संस्मरण’ में उनके अभियंत्रण संबंधी कार्यों का विवरण मिलता है, जबकि ‘भारत के लिए नियोजित अर्थव्यवस्था’ में औद्योगीकरण एवं अवसंरचना को प्रमुख विषय के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
  • अभियंत्रण एवं राष्ट्र-निर्माण में उनके योगदान के लिए वर्ष 1915 में ब्रिटेन के सम्राट जॉर्ज पंचम द्वारा उन्हें नाइटहुड की उपाधि प्रदान की गई तथा वर्ष 1955 में उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया।

स्रोत: Air 

समुद्र लक्ष्मण अभ्यास

पाठ्यक्रम: GS3/ रक्षा

संदर्भ

  • भारतीय नौसेना के अग्रिम पंक्ति के युद्धपोत आईएनएस मैसूर ने मलेशिया के लुमुट में रॉयल मलेशियाई नौसेना के साथ समुद्र लक्ष्मण अभ्यास के चौथे संस्करण में भाग लिया।

परिचय

  • समुद्र लक्ष्मण अभ्यास भारत और मलेशिया के बीच आयोजित होने वाला एक द्विपक्षीय समुद्री सैन्य अभ्यास है, जिसकी शुरुआत वर्ष 2019 में हुई थी।
  • इस अभ्यास में तट एवं समुद्र दोनों स्तरों पर विभिन्न व्यावसायिक गतिविधियाँ शामिल होती हैं, जिनमें एक-दूसरे के युद्धपोतों का दौरा, परिचालन गतिविधियाँ तथा खेल संबंधी गतिविधियाँ प्रमुख हैं।
  • इसका उद्देश्य दोनों नौसेनाओं के बीच परिचालन अनुभवों का आदान-प्रदान, अंतर-संचालनीयता में वृद्धि तथा पारस्परिक समझ को सुदृढ़ करना है।

स्रोत: PIB

 

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