पाठ्यक्रम: GS2/स्वास्थ्य; GS3/खाद्य प्रसंस्करण
संदर्भ
- सर्वोच्च न्यायालय ने चीनी, नमक एवं वसा की उच्च मात्रा वाले पैकेज्ड खाद्य पदार्थों पर फ्रंट-पैकेट चेतावनी लेबल(Front-of-Pack Warning) के लिए अधिक सुदृढ़ उपाय करने की आवश्यकता पर बल दिया है तथा जनस्वास्थ्य की सुरक्षा की आवश्यकता को रेखांकित किया है।
अग्र-पैकेट पोषण लेबलिंग (Front-of-Pack Warning)
- अग्र-पैकेट पोषण लेबलिंग (FOPL) पैकेज्ड खाद्य पदार्थों के सामने प्रदर्शित किया जाने वाला एक सरल पोषण संबंधी चेतावनी संकेत है। यह उपभोक्ताओं को विस्तृत पोषण तालिकाओं की व्याख्या किए बिना ऐसे उत्पादों की पहचान करने में सहायता करता है, जिनमें स्वास्थ्य के लिए जोखिम उत्पन्न करने वाले पोषक तत्त्वों की मात्रा अधिक होती है।
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) पोषण लेबलिंग, जिसमें अग्र-पैकेट पोषण लेबलिंग भी शामिल है, को स्वस्थ खाद्य विकल्पों के चयन को सक्षम बनाने तथा आहार-संबंधी गैर-संचारी रोगों से निपटने के लिए एक महत्त्वपूर्ण नीतिगत साधन मानता है।
भारत का प्रस्तावित अग्र-पैकेट पोषण लेबलिंग ढाँचा
- भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने प्रमुख रूप से लाल रंग के षट्भुजाकार चेतावनी चिह्न का प्रस्ताव किया है, जिस पर “उच्च वसा”, “उच्च चीनी”, “उच्च नमक” तथा “अत्यधिक मीठा पेय” जैसे उल्लेख किए जाएँगे।
- इनके लिए निर्धारित सीमाएँ भारतीयों के लिए आहार संबंधी दिशानिर्देश, 2024 पर आधारित हैं, जिन्हें भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद–राष्ट्रीय पोषण संस्थान (ICMR-NIN) द्वारा विकसित किया गया है।
- दो-चरणीय दृष्टिकोण:
- चरण I में ऐसे उत्पादों को शामिल किया जाएगा, जिनमें निर्दिष्ट पोषक तत्त्वों—अतिरिक्त संतृप्त वसा, अतिरिक्त चीनी एवं नमक—में से दो या अधिक की मात्रा अधिक होगी। इसके अतिरिक्त, निर्दिष्ट मीठे पेय भी इसके अंतर्गत आएँगे।
- चरण II में ऐसे उत्पादों तक चेतावनी का विस्तार किया जाएगा, जिनमें इन पोषक तत्त्वों में से किसी एक की मात्रा भी निर्धारित सीमा से अधिक होगी।
अग्र-पैकेट पोषण लेबलिंग का महत्त्व
- उपभोक्ता जागरूकता: सरल दृश्य चेतावनियाँ विस्तृत संख्यात्मक सूचनाओं की तुलना में पोषण संबंधी जोखिमों को समझना अधिक आसान बना सकती हैं।
- स्वास्थ्यवर्धक विकल्प: स्पष्ट चेतावनियाँ उपभोक्ताओं को अधिक चीनी, नमक एवं अस्वास्थ्यकर वसा वाले उत्पादों से बचने में सहायता कर सकती हैं।
- उत्पादों के पुनर्गठन को प्रोत्साहन: अनिवार्य चेतावनियाँ निर्माताओं को चिंता उत्पन्न करने वाले पोषक तत्त्वों की अत्यधिक मात्रा को कम करने के लिए प्रोत्साहित कर सकती हैं।
- निवारक स्वास्थ्य देखभाल: ऐसे पोषक तत्त्वों के अत्यधिक सेवन को कम करने से मोटापा, मधुमेह एवं हृदय-रक्तवाहिका संबंधी रोगों जैसे गैर-संचारी रोगों की समस्या से निपटने में सहायता मिल सकती है।
वैश्विक अनुभव से प्राप्त सीख
- चिली, मेक्सिको एवं उरुग्वे में काले अष्टकोणीय चेतावनी लेबल का उपयोग किया जाता है, जिन पर “उच्च चीनी”, “उच्च सोडियम” तथा “उच्च संतृप्त वसा” जैसे उल्लेख होते हैं।
- ब्राजील ने पैकेट के अग्रभाग पर आवर्धक-काँच के प्रतीक की व्यवस्था की है, जिसके माध्यम से अतिरिक्त चीनी, संतृप्त वसा एवं सोडियम की उच्च मात्रा वाले खाद्य पदार्थों की पहचान की जाती है।
आगे की राह
- भारत को ऐसी एकल-पोषक-तत्त्व चेतावनी व्यवस्था अपनानी चाहिए, जिसमें चीनी, नमक या संतृप्त वसा में से किसी एक की मात्रा वैज्ञानिक रूप से निर्धारित सीमा से अधिक होने पर चेतावनी अनिवार्य रूप से प्रदर्शित हो।
- इस व्यवस्था में अत्यधिक स्पष्ट, मानकीकृत एवं भाषा-निरपेक्ष दृश्य संकेतों का उपयोग किया जाना चाहिए तथा आवश्यकता होने पर उनके साथ सरल शब्दों का प्रयोग किया जा सकता है।
- कार्यान्वयन समयबद्ध होना चाहिए तथा दीर्घकालिक एवं अनिश्चित चरणबद्ध व्यवस्था के स्थान पर स्पष्ट रूप से निर्धारित संक्रमण अवधि होनी चाहिए।
- फ्रंट-पैकेट चेतावनी लेबलिंग के साथ स्वास्थ्य संबंधी दावों, बच्चों को लक्षित विज्ञापनों, विद्यालयों में खाद्य वातावरण तथा डिजिटल विपणन का भी विनियमन किया जाना चाहिए।
निष्कर्ष
- फ्रंट-पैकेट चेतावनी लेबल को केवल लेबलिंग में सुधार के रूप में नहीं, बल्कि निवारक जनस्वास्थ्य हस्तक्षेप के रूप में देखा जाना चाहिए।
- वैज्ञानिक आधार पर निर्मित एवं सरलता से समझ में आने वाली फ्रंट-पैकेट चेतावनी व्यवस्था उपभोक्ताओं को सशक्त बना सकती है, उत्पादों के पुनर्गठन को प्रोत्साहित कर सकती है तथा आहार-संबंधी गैर-संचारी रोगों को कम करने में योगदान दे सकती है, विशेष रूप से बच्चों के बीच।
स्रोत: TH
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