संक्षिप्त समाचार 12-08-2026

लेक मीड

पाठ्यक्रम: GS1/भूगोल

संदर्भ

  • संयुक्त राज्य अमेरिका का सबसे बड़ा जलाशय लेक मीड अपने भराव के लगभग 90 वर्षों के इतिहास में अब तक के सबसे निम्न जलस्तर पर पहुँच गया है।

परिचय

  • लेक मीड, कोलोराडो नदी पर हूवर बाँध द्वारा निर्मित एक जलाशय है, जो एरिज़ोना और नेवादा की सीमा पर, लास वेगास से लगभग 40 किमी पूर्व में स्थित है।
  • जल क्षमता के आधार पर यह विश्व के सबसे बड़े मानव-निर्मित जलाशयों में से एक है। इस झील का निर्माण बोल्डर कैन्यन परियोजना के अंतर्गत किया गया था और इसका नाम अमेरिका के पूर्व ब्यूरो ऑफ रिक्लेमेशन आयुक्त एलवुड मीड के नाम पर रखा गया है।
  • यह जलाशय एरिज़ोना, कैलिफोर्निया और नेवादा के साथ-साथ मेक्सिको के कुछ हिस्सों को जल की आपूर्ति करता है। इससे लाखों लोगों तथा विस्तृत कृषि क्षेत्रों की जल आवश्यकताएँ पूरी होती हैं।
लेक मीड

स्रोत: Mint

कंटेनर विनिर्माण सहायता योजना (CMAS)

पाठ्यक्रम: GS2/सरकारी पहल

संदर्भ

  • केंद्र सरकार ने शिपिंग कंटेनरों के घरेलू उत्पादन को सुदृढ़ करने, आयात पर निर्भरता कम करने तथा भारत के व्यापार एवं लॉजिस्टिक्स नेटवर्क की लचीलापन क्षमता बढ़ाने के लिए ₹10,000 करोड़ की कंटेनर विनिर्माण सहायता योजना (CMAS) प्रस्तावित की है।

कंटेनर विनिर्माण सहायता योजना (CMAS) क्या है?

  • CMAS पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय की एक केंद्रीय क्षेत्र योजना है, जिसकी घोषणा केंद्रीय बजट 2026–27 में की गई है।
  • ₹10,000 करोड़ के प्रस्तावित परिव्यय वाली यह योजना पाँच वर्षों की अवधि में नई विनिर्माण सुविधाओं की स्थापना तथा वर्तमान इकाइयों के विस्तार को सहायता प्रदान करेगी।
  • इस पहल का लक्ष्य घरेलू कंटेनर विनिर्माण क्षमता को मौजूदा क्षमता की तुलना में लगभग 10 गुना बढ़ाकर प्रति वर्ष 7.5 लाख ट्वेंटी-फुट इक्विवेलेंट यूनिट्स (TEUs) तक पहुँचाना है।
  • इससे लगभग ₹80,000 करोड़ के बाजार अवसर के सृजन की अपेक्षा है तथा भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी और विश्वसनीय शिपिंग कंटेनरों के निर्माता के रूप में स्थापित करने में सहायता मिलेगी।
  • कंटेनर विनिर्माण मूल्य शृंखला को सुदृढ़ करने के लिए योजना के अंतर्गत:
    • नई ग्रीनफील्ड विनिर्माण सुविधाओं की स्थापना के लिए पूंजीगत सहायता।
    • मौजूदा ब्राउनफील्ड विनिर्माण इकाइयों के विस्तार के लिए सहायता।
    • घरेलू कंटेनर विनिर्माण की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए परिचालन सहायता।
    • परीक्षण अवसंरचना, कौशल विकास पहलों और क्षमता निर्माण के लिए सहायता।
कंटेनर विनिर्माण सहायता योजना

स्रोत: PIB

दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (DDU-GKY)

पाठ्यक्रम: GS2/शासन

संदर्भ

  • ग्रामीण विकास संबंधी स्थायी समिति ने दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (DDU-GKY) के अंतर्गत कौशल प्रशिक्षण और वास्तविक रोजगार परिणामों के बीच विद्यमान अंतर को रेखांकित किया है।

परिचय

  • ग्रामीण विकास मंत्रालय (MoRD) ने वर्ष 2014 में दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (DDU-GKY) शुरू की थी।
  • यह दीनदयाल अंत्योदय योजना–राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के अंतर्गत एक नियोजन-संबद्ध कौशल विकास कार्यक्रम है।
  • आयु सीमा: 15 से 35 वर्ष की आयु के ग्रामीण युवा इस योजना के पात्र हैं। महिलाओं, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति, दिव्यांगजनों और अल्पसंख्यकों के लिए आयु सीमा 45 वर्ष तक है।
  • DDU-GKY का उद्देश्य ग्रामीण युवाओं को आवश्यक कौशल प्रदान करना तथा नियोजन-संबद्ध कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से उनके लिए सतत आजीविका के अवसरों को बढ़ावा देना है।
  • इस योजना में नियोजन-संबद्ध परिणामों को अनिवार्य किया गया है तथा पाठ्यक्रम तैयार करने और प्रशिक्षण प्रदान करने की प्रक्रिया में उद्योग की निरंतर भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रावधान है।

स्रोत: PIB

पीएम-पोषण (PM-POSHAN) के लिए नया मेनू

पाठ्यक्रम: GS2/कल्याणकारी योजनाएँ

समाचार में

  • दिल्ली के सरकारी स्कूलों में पीएम-पोषण योजना के अंतर्गत नया मेनू लागू किया जाएगा, जिसमें इडली-सांभर जैसे नए व्यंजन शामिल किए जाएंगे।

पृष्ठभूमि

  • प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण (PM-POSHAN) योजना को पहले मध्याह्न भोजन योजना के नाम से जाना जाता था। यह बच्चों के पोषण में सुधार, विद्यालयों में नामांकन, उपस्थिति और बच्चों को विद्यालय में बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बन गई है।
  • इसकी शुरुआत वर्ष 1925 में मद्रास नगर निगम में मध्याह्न भोजन कार्यक्रम के रूप में हुई थी।
  • 1980 के दशक के मध्य तक गुजरात, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में प्राथमिक स्तर पर पका हुआ मध्याह्न भोजन सार्वभौमिक रूप से उपलब्ध कराया जाने लगा था।
  • वर्ष 1995 में केंद्र सरकार ने 2,408 विकासखंडों में प्राथमिक शिक्षा के लिए पोषण सहायता का राष्ट्रीय कार्यक्रम (NP-NSPE) शुरू किया, जिसका विस्तार वर्ष 1997-98 तक पूरे देश में कर दिया गया।
  • वर्ष 2007-08 में इस योजना का विस्तार उच्च प्राथमिक कक्षाओं (VI-VIII) तक किया गया तथा अप्रैल 2008 से देशभर के सभी पात्र प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर के बच्चों को इसके दायरे में शामिल कर लिया गया।

पीएम-पोषण योजना

  • यह एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसका क्रियान्वयन शिक्षा मंत्रालय द्वारा किया जा रहा है।
  • इसके अंतर्गत सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों में पात्र बच्चों को गर्म पका हुआ भोजन उपलब्ध कराया जाता है।
  • यह योजना पूरे देश में लागू है और इसमें लिंग तथा सामाजिक वर्ग के आधार पर बिना किसी भेदभाव के सभी पात्र बच्चों को शामिल किया जाता है।

उद्देश्य

  • इस योजना का उद्देश्य भारत में बड़ी संख्या में बच्चों के समक्ष विद्यमान दो प्रमुख समस्याओं—भूख और शिक्षा—का समाधान करना तथा सरकारी एवं सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों में पात्र बच्चों की पोषण स्थिति में सुधार करना है।
  • यह वंचित वर्गों से संबंधित गरीब बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय आने के लिए प्रोत्साहित करने तथा उन्हें कक्षा में होने वाली शैक्षणिक गतिविधियों पर बेहतर ढंग से ध्यान केंद्रित करने में सहायता प्रदान करती है।

स्रोत: HT

मून बेस कार्यक्रम

पाठ्यक्रम: GS3/अंतरिक्ष

समाचार में

  • अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने आर्टेमिस समझौते के अंतर्गत भारत के साथ वर्तमान साझेदारी को आगे बढ़ाते हुए मून बेस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए ISRO को आमंत्रित किया है।

पृष्ठभूमि

  • वर्ष 2023 में भारत आर्टेमिस समझौते में शामिल हुआ था। यह अमेरिका के नेतृत्व वाला अंतरिक्ष सहयोग ढाँचा है, जिसका घोषित उद्देश्य चंद्रमा सहित बाह्य अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण नागरिक अन्वेषण के लिए साझा सिद्धांतों का विकास एवं पालन करना है।
  • भारत आर्टेमिस समझौते पर हस्ताक्षर करने वाला 27वाँ देश था। वर्तमान में कुल 70 देश इस समझौते का हिस्सा हैं।
  • विगत वर्ष संयुक्त NASA-ISRO सिंथेटिक अपर्चर रडार (NISAR) मिशन के सफल प्रक्षेपण के बाद भारत और अमेरिका ने सहयोग के विस्तार पर चर्चा की। इसके साथ ही भविष्य में वैज्ञानिक अनुसंधान तथा मानव अंतरिक्ष उड़ान प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर भी विचार किया गया।
  • दोनों देशों ने बाह्य अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग संबंधी संयुक्त राष्ट्र समिति (COPUOS) के बाह्य अंतरिक्ष गतिविधियों की दीर्घकालिक स्थिरता से संबंधित दिशानिर्देशों को आगे बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

मून बेस

  • मून बेस मानवता का पहला चंद्र आउटपोस्ट होगा, जहाँ अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट रहेंगे, कार्य करेंगे और अन्वेषण करेंगे।
  • NASA और उसके साझेदार चंद्र सतह पर मानव की दीर्घकालिक उपस्थिति को बनाए रखने के लिए आवश्यक बुनियादी ढाँचे का निर्माण करेंगे। इसके साथ ही विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अन्वेषण को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा, जिसका लाभ समस्त मानवता को मिल सके।

महत्व

  • चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट NASA द्वारा प्रस्तावित मून बेस वैज्ञानिक खोज, संसाधनों के उपयोग तथा दीर्घकालिक मानव अन्वेषण के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है।
  • ISRO को दिया गया यह निमंत्रण शुभांशु शुक्ला के अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) मिशन और NISAR उपग्रह मिशन की सफलता के बाद भारत-अमेरिका अंतरिक्ष सहयोग को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

स्रोत :TH

 

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