- विदेश मामलों पर संसदीय स्थायी समिति ने हाल ही में ‘भारत की आर्कटिक और अंटार्कटिक क्षेत्रों में भूमिका एवं उपस्थिति’ शीर्षक से अपनी रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में भारत की ध्रुवीय भागीदारी की समीक्षा करते हुए आर्कटिक क्षेत्र में भारत की प्रमुख क्षमतागत कमियों को रेखांकित किया गया है।
- भारत की आर्कटिक भागीदारी ऐतिहासिक रूप से वैज्ञानिक अनुसंधान और जलवायु अध्ययनों पर केंद्रित रही है, किंतु अब यह क्षेत्र व्यापक सामरिक, आर्थिक और भू-राजनीतिक महत्व प्राप्त कर रहा है।
- भारत की आर्कटिक क्षेत्र में भागीदारी वर्ष 1920 की स्वालबार्ड संधि से जुड़ी है। इस संधि के अंतर्गत भारतीय नागरिकों को संधि के प्रावधानों के अधीन स्वालबार्ड तक पहुँच तथा वाणिज्यिक गतिविधियाँ संचालित करने के अधिकार प्राप्त हैं। Read More
भारत और आर्कटिक: वैज्ञानिक उपस्थिति से सामरिक सहभागिता की ओर
संदर्भ
भारत की आर्कटिक भागीदारी: अतीत एवं वर्तमान