पाठ्यक्रम: जीएस-3/अर्थव्यवस्था
सन्दर्भ
- भौगोलिक संकेतक (GI) टैग भारत की सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करने के साथ-साथ स्थानीय समुदायों के लिए आर्थिक अवसर सृजित करने का एक प्रभावशाली साधन बनकर उभरा है।
भौगोलिक संकेतक (GI)
- भौगोलिक संकेतक ( GI) एक ऐसा चिह्न है, जिसका उपयोग उन उत्पादों पर किया जाता है जिनकी विशिष्ट भौगोलिक उत्पत्ति होती है तथा जिनकी गुणवत्ता, विशेषताएँ अथवा प्रतिष्ठा उसी भौगोलिक क्षेत्र से जुड़ी होती है।
- किसी चिह्न को जीआई के रूप में मान्यता प्राप्त करने के लिए यह आवश्यक है कि वह किसी उत्पाद की उत्पत्ति को किसी विशिष्ट स्थान से जोड़कर प्रदर्शित करे।
- भौगोलिक संकेतकों का उपयोग सामान्यतः कृषि उत्पादों, खाद्य पदार्थों, वाइन एवं मदिरा, हस्तशिल्प तथा औद्योगिक उत्पादों के लिए किया जाता है।
- पश्चिम बंगाल की दार्जिलिंग चाय भारत का पहला उत्पाद था, जिसे जीआई टैग प्राप्त हुआ।

GI उत्पादों का महत्त्व
- GI टैग हस्तशिल्प एवं पारंपरिक उत्पादों की प्रामाणिकता की मुहर के रूप में कार्य करता है तथा उन्हें नकल, दुरुपयोग एवं अनधिकृत व्यावसायीकरण से संरक्षण प्रदान करता है।

क्या GI टैग निरस्त किया जा सकता है?
निम्न परिस्थितियों में GI पंजीकरण को निरस्त या रद्द किया जा सकता है—
- यदि यह धोखाधड़ी या मिथ्या प्रस्तुतीकरण के माध्यम से प्राप्त किया गया हो।
- यदि यह अपने मूल देश में अब संरक्षित न हो अथवा उसका उपयोग बंद हो गया हो।
- यदि इसका उपयोग उपभोक्ताओं को भ्रमित करने वाला हो, किसी प्रचलित कानून का उल्लंघन करता हो अथवा इसमें अश्लील, आपत्तिजनक या अभद्र सामग्री सम्मिलित हो।
GI से बाहर रखे गए उत्पाद: किनका पंजीकरण नहीं किया जा सकता?
- ऐसे सामान्य (Generic) उत्पाद नाम, जिन्हें उनके मूल देश में अब संरक्षण प्राप्त नहीं है।
- ऐसे संकेत, जो उपभोक्ताओं को भ्रमित करें अथवा किसी अन्य भौगोलिक क्षेत्र से संबंधित होने का गलत संकेत दें।
- ऐसे संकेत, जो धार्मिक भावनाओं को आहत करें अथवा जिनमें अश्लील, आपत्तिजनक या अभद्र सामग्री हो।
- ऐसे संकेत, जिन्हें कानूनी संरक्षण प्राप्त करने की पात्रता न हो अथवा जो किसी प्रचलित कानून का उल्लंघन करते हों।
GI का विनियमन
- बौद्धिक संपदा के एक रूप के रूप में जीआई को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर औद्योगिक संपदा के संरक्षण हेतु पेरिस अभिसमय तथा विश्व व्यापार संगठन (WTO) के व्यापार-संबंधित बौद्धिक संपदा अधिकार (TRIPS) समझौते के अंतर्गत मान्यता प्राप्त है।
- भारत में जीआई का पंजीकरण एवं संरक्षण भौगोलिक संकेतक रजिस्ट्री द्वारा भौगोलिक संकेतक वस्तु (पंजीकरण एवं संरक्षण) अधिनियम, 1999 के अंतर्गत किया जाता है।
- भारत ने विशिष्ट क्षेत्रों से जुड़े उत्पादों के संरक्षण हेतु भौगोलिक संकेतक वस्तु (पंजीकरण एवं संरक्षण) अधिनियम, 1999 तथा इसके अंतर्गत अधिसूचित भौगोलिक संकेतक वस्तु (पंजीकरण एवं संरक्षण) नियम, 2002 के माध्यम से कानूनी ढाँचा स्थापित किया।
- यह व्यवस्था 2003 में प्रभावी हुई तथा 2004–05 से जीआई पंजीकरण प्रारंभ हुआ।
- किसी भौगोलिक संकेतक (GI) का पंजीकरण 10 वर्ष की अवधि के लिए वैध होता है।
- भौगोलिक संकेतक वस्तु (पंजीकरण एवं संरक्षण) नियम, 2002 में 2025 में संशोधन किया गया।
स्रोत: PIB
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संक्षिप्त समाचार 04-08-2026