पाठ्यक्रम: जीएस-3/अर्थव्यवस्था
सन्दर्भ
- भारत का चाय उद्योग लगभग 15 अरब रुपये का उद्योग है। भारत आज भी विश्व का दूसरा सबसे बड़ा चाय उत्पादक और उपभोक्ता है, किंतु यह उद्योग सस्ते विकल्पों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहा है।
यह दबाव क्यों बढ़ रहा है?
- उत्पादकों को मिलने वाली कीमतों में पर्याप्त वृद्धि नहीं हुई: पिछले एक दशक में श्रम, उर्वरक, ऊर्जा तथा अन्य आवश्यक इनपुट की लागत 9% से 15% तक बढ़ गई है, जबकि चाय की कीमतों में केवल लगभग 4% की ही वृद्धि हुई है।
- प्रीमियम बाजारों में सस्ते विकल्पों की बढ़ती भूमिका: नेपाल की कम लागत वाली चाय ने दार्जिलिंग चाय की मांग को प्रभावित किया है। वहीं, असम में लगभग 250 रुपये प्रतिदिन की कम मजदूरी के कारण नई पीढ़ी बागान कार्य से दूर होती जा रही है।
- नियामकीय प्रावधानों से लागत में वृद्धि: अवशेष (Residue) मानकों का पालन करने तथा भारत की निर्यात विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए 20 कीटनाशकों पर प्रतिबंध लगाया गया है। इससे उत्पादकों को अधिक महंगे विकल्प अपनाने पड़े हैं, जिससे पहले से कम लाभांश (Margins) पर और दबाव बढ़ गया है।
- उपभोक्ताओं की पसंद में बदलाव: युवा, स्वास्थ्य के प्रति जागरूक तथा शहरी उपभोक्ता अब कॉफी, रेडी-टू-ड्रिंक चाय, ऊर्जा पेय तथा हर्बल पेय की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं।
- आपूर्ति अभी भी मांग से अधिक है: कम खपत की तुलना में अधिक उत्पादन होने के कारण चाय की कीमतों पर लगातार दबाव बना हुआ है।
आगे की राह
- नीलामी-आधारित खरीद प्रणाली को अधिक सख्ती से लागू किया जाए, ताकि उत्पादकों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके।
- पुराने चाय पौधों के कारण घटती उत्पादकता को देखते हुए पुनरोपण (Replantation) में निवेश बढ़ाया जाए।
- बदलती उपभोक्ता मांग को ध्यान में रखते हुए इंस्टैंट चाय, स्वास्थ्यवर्धक पेय तथा नए उत्पाद प्रारूपों को प्रोत्साहित किया जाए।
- श्रीलंका द्वारा खोए जा रहे बाजार पर शीघ्रता से कब्जा करने के लिए उच्च गुणवत्ता एवं मानकों के अनुपालन को सुनिश्चित किया जाए।
- छोटे चाय उत्पादकों को कृषि क्षेत्र की योजनाओं की तर्ज पर लक्षित सहायता प्रदान की जाए, ताकि चाय बागानों का बंद होना सामान्य स्थिति न बन जाए।
भारत का चाय उद्योग: प्रमुख तथ्य
- भारत में चाय की व्यावसायिक खेती ब्रिटिश शासन द्वारा 1830 के दशक में असम में शुरू की गई थी।
- दार्जिलिंग चाय भारत का पहला उत्पाद था, जिसे 2004–05 में भौगोलिक संकेतक (GI) टैग प्राप्त हुआ।
- भारतीय चाय बोर्ड का मुख्यालय कोलकाता में स्थित है। यह वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन कार्य करता है तथा इसका पुनर्गठन प्रत्येक तीन वर्ष में किया जाता है। यह लाइसेंसिंग, निर्यात संवर्धन, अनुसंधान वित्तपोषण तथा कल्याणकारी योजनाओं का संचालन करता है।
- भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा चाय उत्पादक और उपभोक्ता तथा तीसरा सबसे बड़ा निर्यातक है। निर्यात में केन्या (जो अपने अधिकांश उत्पादन का निर्यात करता है) तथा चीन उससे आगे हैं।
- असम, पश्चिम बंगाल (डुआर्स, तराई एवं दार्जिलिंग), तमिलनाडु तथा केरल मिलकर देश के कुल चाय उत्पादन का लगभग 96% योगदान देते हैं, जिसमें अकेले असम का योगदान 50% से अधिक है।
- भारत में उत्पादित चाय का लगभग 80% देश के भीतर ही उपभोग किया जाता है। भारत 25 से अधिक देशों को चाय का निर्यात करता है, जिनमें रूस, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), संयुक्त राज्य अमेरिका (USA), यूनाइटेड किंगडम (UK) तथा जर्मनी प्रमुख आयातक हैं।
स्रोत: TH
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