अंग प्रत्यारोपण हेतु NOTTO द्वारा ई-प्रत्यारोपण पोर्टल लॉन्च

पाठ्यक्रम: जीएस-2/स्वास्थ्य

सन्दर्भ

  • राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (NOTTO) ने भारत में अंगदान और अंग प्रत्यारोपण के लिए एकीकृत डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने हेतु ई-प्रत्यारोपण पोर्टल तथा NOTTO मोबाइल एप्लिकेशन लॉन्च किया है।

ई-प्रत्यारोपण पोर्टल का परिचय

  • पूर्व व्यवस्था के विपरीत, जिसमें अस्पताल अपने-अपने प्रत्यारोपण संबंधी आँकड़ों का अलग-अलग रखरखाव करते थे, नया ई-प्रत्यारोपण पोर्टल अस्पतालों, राज्य प्राधिकरणों और NOTTO को जोड़ने वाला एक साझा डिजिटल मंच उपलब्ध कराता है।
  • रोगी अपनी पसंद के अस्पताल के माध्यम से ही प्रत्यारोपण के लिए पंजीकरण कराते रहेंगे। अस्पतालों, राज्य सरकारों और NOTTO को पोर्टल पर सुरक्षित पहुँच प्राप्त होगी, जहाँ प्रत्यारोपण केंद्र सीधे प्राप्तकर्ताओं (Recipients) का विवरण अपलोड कर सकेंगे।
  • अपलोड की गई जानकारी के आधार पर यह पोर्टल अस्पताल, राज्य, क्षेत्रीय तथा राष्ट्रीय स्तर पर स्वतः प्रतीक्षा सूची (Waiting List) तैयार करता है, जिससे वास्तविक समय (Real Time) में अंगों का मिलान और आवंटन संभव हो सके।
  • यह मंच अंगों के आवंटन और परिवहन की प्रत्येक प्रक्रिया का रिकॉर्ड भी रखता है, जिससे पहले प्रत्यारोपण समन्वयकों के बीच फोन कॉल और संदेशों पर आधारित अधिकांश मैनुअल समन्वय की आवश्यकता समाप्त हो जाती है।
  • अस्पताल और राज्य प्राधिकरण गंभीर रूप से बीमार रोगियों के लिए, जिन्हें तत्काल प्रत्यारोपण की आवश्यकता हो, इस पोर्टल के माध्यम से “सुपर अर्जेंट” अनुरोध भी भेज सकते हैं।

भारत में अंग प्रत्यारोपण

  • अंग प्रत्यारोपण एक शल्य चिकित्सा प्रक्रिया है, जिसमें किसी व्यक्ति के शरीर से कोई अंग, ऊतक अथवा कोशिकाओं का समूह निकालकर दूसरे व्यक्ति के शरीर में प्रत्यारोपित किया जाता है।
  • एक मृत दाता (Deceased Donor) हृदय, फेफड़े, यकृत, गुर्दे, अग्न्याशय तथा आँतों का दान करके आठ लोगों तक का जीवन बचा सकता है।
  • निर्धारित चिकित्सीय एवं कानूनी शर्तों के अधीन जीवित तथा मृत दोनों प्रकार के व्यक्ति अंगदान कर सकते हैं।
  • अंग प्रत्यारोपण की संख्या के आधार पर संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन के बाद भारत विश्व में तीसरे स्थान पर है।
भारत में अंग प्रत्यारोपण

राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (NOTTO) 

  • यह स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (Directorate General of Health Services – DGHS) के अधीन स्थापित एक राष्ट्रीय स्तर का संगठन है।
  • कार्य: यह नीतिगत दिशा-निर्देश तैयार करता है, प्रशिक्षण आयोजित करता है, प्रत्यारोपण गतिविधियों की निगरानी करता है, राष्ट्रीय डाटाबैंक का रखरखाव करता है तथा अंतर-क्षेत्रीय अंग आवंटन का समन्वय करता है।

भारत में अंग प्रत्यारोपण से संबंधित कानून एवं नियम

  • मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम, 1994 : यह भारत में अंगदान एवं अंग प्रत्यारोपण से संबंधित प्रमुख कानून है, जिसका उद्देश्य चिकित्सीय प्रयोजनों के लिए मानव अंगों को निकालने, सुरक्षित रखने तथा प्रत्यारोपित करने का विनियमन करना तथा मानव अंगों के व्यावसायिक लेन-देन को रोकना है।
  • यह ब्रेनस्टेम मृत्यु (Brainstem Death – BSD) को मृत्यु की कानूनी परिभाषा के रूप में मान्यता देता है तथा उसके प्रमाणीकरण की प्रक्रिया निर्धारित करता है।
  • मानव अंग प्रत्यारोपण (संशोधन) अधिनियम, 2011: यह अंगों के आदान-प्रदान (Swapping of Organs) की अनुमति देता है तथा दाता सूची में दादा-दादी एवं नाना-नानी तथा पोते-पोतियों एवं नाती-नातिनों को शामिल कर दाताओं के दायरे का विस्तार करता है।
  • मानव अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण नियम (THOT), 2014: इसमें अंगदान में आने वाली बाधाओं को दूर करने तथा नियमों के दुरुपयोग एवं गलत व्याख्या पर रोक लगाने के लिए अनेक प्रावधान किए गए हैं।

सरकारी पहल 

  • राष्ट्रीय अंग प्रत्यारोपण कार्यक्रम (NOTP): सरकार प्रत्यारोपण अवसंरचना के उन्नयन, प्रत्यारोपण समन्वयकों की नियुक्ति, मृत दाताओं के अंतिम संस्कार, अंगों के परिवहन एवं सफल प्रत्यारोपण तथा स्वास्थ्यकर्मियों के क्षमता निर्माण एवं प्रशिक्षण के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
  • राष्ट्रीय आरोग्य निधि (RAN): आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के रोगियों को अंग प्रत्यारोपण हेतु वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
  • जुग-जुग जियो अभियान: यह एक वर्ष तक चलने वाला राष्ट्रीय अभियान है, जिसे अंगदाताओं एवं उनके परिवारों को सम्मानित करने तथा पूरे देश में अंगदान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू किया गया है।

अंगदान से संबंधित तथ्य

  • 13 अगस्त को प्रतिवर्ष विश्व अंगदान दिवस मनाया जाता है, ताकि अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सके।
  • भारतीय अंगदान दिवस पहले प्रत्येक वर्ष 27 नवंबर को मनाया जाता था, किंतु 2023 से इसे 3 अगस्त को मनाया जाने लगा है। यह 3 अगस्त 1994 को भारत में हुए पहले सफल मृत हृदय प्रत्यारोपण की स्मृति में मनाया जाता है।
  • NOTTO ने जुलाई को अंगदान माह घोषित किया है।

चुनौतियाँ

  • मांग एवं आपूर्ति का अंतर: प्रतिवर्ष एक लाख से अधिक रोगियों को गुर्दा प्रत्यारोपण की आवश्यकता होती है, जबकि केवल लगभग 15,000 प्रत्यारोपण ही किए जा पाते हैं।
  • मृत व्यक्तियों द्वारा अंगदान की कम दर: सांस्कृतिक मान्यताएँ, जागरूकता की कमी तथा सीमित सहमति मृत व्यक्तियों द्वारा अंगदान को सीमित करती हैं।
  • लैंगिक असमानता: ब्रिटिश मेडिकल जर्नल के विश्लेषण के अनुसार, 2018–2023 के बीच 56,509 जीवित अंगदानों में से 36,038 महिलाओं द्वारा किए गए, जबकि अंग प्राप्त करने वालों में महिलाओं की संख्या केवल 17,041 रही।
  • अन्य चिंताएँ:
    • अवसंरचना की कमी: अनेक सरकारी अस्पतालों में प्रत्यारोपण आईसीयू, ऑपरेशन थिएटर तथा एचएलए (HLA) प्रयोगशालाओं का अभाव है। आईसीयू बिस्तरों की कमी के कारण ब्रेन-डेड दाताओं का उचित संरक्षण प्रभावित होता है।
    • मानव संसाधन की कमी: प्रशिक्षित प्रत्यारोपण शल्य चिकित्सकों, नेफ्रोलॉजिस्ट तथा प्रत्यारोपण समन्वयकों की कमी है। अधिकारियों के बार-बार स्थानांतरण से प्रत्यारोपण कार्यक्रमों की निरंतरता प्रभावित होती है।
    • वित्तीय बाधाएँ: जीवनभर प्रतिरक्षा-दमनकारी (Immunosuppressant) दवाओं की उच्च लागत तथा पहले वर्ष के बाद सीमित प्रत्यारोपणोत्तर सहायता।
    • आँकड़ों एवं निगरानी की कमी: अस्पतालों द्वारा असंगत रिपोर्टिंग तथा दाता-प्राप्तकर्ता परिणामों की केंद्रीकृत निगरानी का अभाव।
    • नैतिक एवं कानूनी चिंताएँ: अंगों की तस्करी एवं व्यावसायिक प्रत्यारोपण के मामले अभी भी सामने आते हैं; राज्यों में कानूनों की असंगत व्याख्या तथा उल्लंघनों पर दंडात्मक प्रावधानों का कमजोर प्रवर्तन।

आगे की राह

  • सभी राज्यों में पारदर्शिता एवं समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए एक समान राष्ट्रीय अंग आवंटन नीति विकसित की जाए।
  • स्वैच्छिक मृत अंगदान को बढ़ावा देने तथा भ्रांतियों को दूर करने के लिए निरंतर जन-जागरूकता अभियान चलाए जाएँ।
  • विशेष रूप से वंचित क्षेत्रों में प्रत्यारोपण अवसंरचना का विस्तार किया जाए तथा मानव संसाधनों को सुदृढ़ बनाया जाए।
  • वास्तविक समय में अंग आवंटन, निगरानी एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ई-प्रत्यारोपण पोर्टल जैसे डिजिटल मंचों का व्यापक उपयोग किया जाए।
  • अवैध अंग व्यापार पर रोक लगाने के लिए मानव अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण अधिनियम का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए।
  • भारत के अंगदान पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ बनाने हेतु अनुसंधान, परिणामों की निगरानी तथा क्षमता निर्माण को बढ़ावा दिया जाए।

स्रोत: IE

 

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