संक्षिप्त समाचार 24-07-2026

लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक

पाठ्यक्रम: जीएस-1/आधुनिक इतिहास 

सन्दर्भ

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

प्रारंभिक जीवन

  • 23 जुलाई 1856 को महाराष्ट्र के रत्नागिरी में जन्मे बाल गंगाधर तिलक एक स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक, दार्शनिक, शिक्षक तथा स्वराज (स्व-शासन) के सबसे प्रारंभिक एवं प्रबल समर्थकों में से एक थे।
  • उन्होंने राष्ट्रीय चेतना एवं राजनीतिक जनजागरण को बढ़ावा देने के लिए दो प्रमुख सार्वजनिक उत्सवों यथा; गणेश उत्सव (1893) तथा शिवाजी उत्सव (1895) का आयोजन प्रारंभ किया।

राजनीतिक जीवन

  • 1890 में तिलक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हुए।
  • तिलक ने गोपाल कृष्ण गोखले के उदारवादी विचारों का विरोध किया। उन्हें बंगाल के बिपिन चंद्र पाल तथा पंजाब के लाला लाजपत राय का समर्थन प्राप्त था। यह त्रयी “लाल-बाल-पाल” के नाम से प्रसिद्ध हुई।
  • इस त्रयी ने बंगाल विभाजन के विरुद्ध जनमत तैयार किया तथा स्वदेशी आंदोलन एवं विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार का समर्थन किया।
  • 1908 में तिलक को राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार कर मांडले (बर्मा) में छह वर्ष के कारावास की सज़ा दी गई।
  • 1916 में उन्होंने बेलगावी में होम रूल लीग की स्थापना की, जिसका उद्देश्य राजनीतिक जागरूकता बढ़ाना एवं स्वशासन के समर्थन में जनमत तैयार करना था।
  • इसी वर्ष उन्होंने मोहम्मद अली जिन्ना के साथ लखनऊ समझौता किया, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय आंदोलन में हिंदू-मुस्लिम एकता को सुदृढ़ करना था।
  • उन्हें “लोकमान्य” की उपाधि से सम्मानित किया गया, जिसका अर्थ है “जनता द्वारा अपने नेता के रूप में स्वीकार किया गया व्यक्ति”। महात्मा गांधी ने उन्हें “आधुनिक भारत का निर्माता” कहा।

साहित्यिक योगदान

  • उन्होंने दो साप्ताहिक पत्रों यथा; केसरी (मराठी) तथा मराठा (अंग्रेज़ी) का प्रकाशन प्रारंभ किया, जिनमें उस समय की ब्रिटिश नीतियों की आलोचना की जाती थी।

उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं—

  • द ओरियन या वेदों की प्राचीनता पर शोध (1893)
  • दी आर्कटिक होम इन दी वेदाज (1903)
  • मांडले कारागार में उन्होंने “श्रीमद्भगवद्गीता रहस्य” की रचना की, जो भगवद्गीता का मौलिक एवं गहन व्याख्यान है।

स्रोत: PIB

चन्द्रशेखर आज़ाद

पाठ्यक्रम: जीएस-1/आधुनिक इतिहास 

सन्दर्भ

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चन्द्रशेखर आज़ाद की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

चन्द्रशेखर आज़ाद

  • 23 जुलाई 1906 को वर्तमान मध्य प्रदेश में जन्मे चन्द्रशेखर आज़ाद का बचपन अत्यंत साधारण एवं आर्थिक कठिनाइयों में बीता। वे किशोरावस्था में ही असहयोग आंदोलन के दौरान स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ गए।
  • विरोध-प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार होने पर उन्होंने अपना नाम “आज़ाद” बताया तथा जीवनभर अंग्रेज़ों के हाथ जीवित न पकड़े जाने की प्रतिज्ञा की।

स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका

  • वे हिंदुस्तान रिपब्लिकन आर्मी (HRA) में शामिल हुए, जिसे बाद में भगत सिंह के साथ मिलकर अधिक क्रांतिकारी हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) में परिवर्तित किया गया।
  • वे 1925 के काकोरी ट्रेन कांड, भारत के वायसराय की ट्रेन को उड़ाने के प्रयास तथा 1928 में महान स्वतंत्रता सेनानी लाला लाजपत राय की मृत्यु का प्रतिशोध लेने के लिए ब्रिटिश पुलिस अधिकारी जेपी सॉन्डर्स की हत्या जैसी क्रांतिकारी गतिविधियों में शामिल रहे।
  • 1929 में केंद्रीय विधानसभा बम प्रकरण तथा उसके बाद ब्रिटिश दमन अभियान के दौरान आज़ाद भूमिगत रहे और भगत सिंह को छुड़ाने के प्रयास करते रहे।

निधन एवं विरासत 

  • 27 फ़रवरी 1931 को इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में पुलिस से घिर जाने पर उन्होंने पहले अपने एक साथी को सुरक्षित निकलने में सहायता की, तीन पुलिसकर्मियों को मार गिराया और अंत में केवल एक गोली शेष रहने पर अंग्रेज़ों के हाथ जीवित पकड़े जाने के बजाय स्वयं को गोली मार ली।
  • वे मात्र 24 वर्ष की आयु में वीरगति को प्राप्त हुए और अपने नाम तथा प्रतिज्ञा के अनुरूप अंत तक “आज़ाद” रहे।
  • भारत की स्वतंत्रता के लिए उनका योगदान अत्यंत प्रेरणादायक है तथा आज भी युवाओं को साहस, दृढ़ निश्चय और न्याय के पक्ष में खड़े होने की प्रेरणा देता है।

स्रोत: AIR

अमेरिका द्वारा सऊदी अरब के साथ असैन्य परमाणु समझौते की घोषणा

पाठ्यक्रम: जीएस-2/अंतर्राष्ट्रीय संबंध

सन्दर्भ

  • अमेरिका और सऊदी अरब ने शांतिपूर्ण परमाणु सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसे सामान्यतः 123 समझौता (123 Agreement) कहा जाता है।

परिचय

  • इस समझौते का नाम अमेरिकी परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1954 की धारा 123 के नाम पर रखा गया है।
  • यह एक विधिक रूप से बाध्यकारी समझौता है, जिसे अमेरिका किसी अन्य देश के साथ महत्त्वपूर्ण परमाणु सहयोग स्थापित करने से पहले अनिवार्य रूप से करता है।
  • ये समझौते शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए परमाणु सामग्री, उपकरण एवं प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण को सुगम बनाते हैं, साथ ही अंतरराष्ट्रीय परमाणु अप्रसार (Non-Proliferation) मानकों के अनुपालन को सुनिश्चित करते हैं।
  • ये तकनीकी आदान-प्रदान, वैज्ञानिक अनुसंधान तथा सुरक्षा उपायों (Safeguards) से संबंधित विचार-विमर्श के लिए भी एक रूपरेखा प्रदान करते हैं।

भारत-अमेरिका 123 समझौता

  • भारत और अमेरिका के बीच 123 समझौता, जिसे भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौता भी कहा जाता है, दोनों देशों के बीच असैन्य परमाणु सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया था।

प्रमुख विशेषताएँ: 

  • परमाणु व्यापार: यह समझौता अमेरिका को भारत को असैन्य ऊर्जा उद्देश्यों के लिए परमाणु ईंधन, प्रौद्योगिकी तथा परमाणु रिएक्टर उपलब्ध कराने की अनुमति देता है।
  • परमाणु अप्रसार की प्रतिबद्धता: इसके बदले भारत ने अपने असैन्य एवं सैन्य परमाणु कार्यक्रमों को अलग रखने तथा अपने असैन्य परमाणु रिएक्टरों को अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की सुरक्षा निगरानी (Safeguards) के अधीन रखने पर सहमति व्यक्त की।
  • सैन्य परमाणु कार्यक्रमों पर कोई प्रतिबंध नहीं: परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के विपरीत, यह समझौता भारत को अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम को त्यागने के लिए बाध्य नहीं करता, क्योंकि भारत NPT का हस्ताक्षरकर्ता नहीं है।
  • ऊर्जा एवं आर्थिक सहयोग: इस समझौते का उद्देश्य भारत की ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करना, बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति करना तथा दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना है।

स्रोत: IE

निःशस्त्र एवं निरस्त्रीकरण आधारित शांति के लिए रोम घोषणा

पाठ्यक्रम: जीएस-2/अंतर्राष्ट्रीय संबंध, जीएस-3/आंतरिक सुरक्षा

सन्दर्भ

  • नोबेल पुरस्कार विजेताओं, एआई वैज्ञानिकों, धार्मिक नेताओं तथा वैश्विक विशेषज्ञों के एक समूह ने निःशस्त्र एवं निरस्त्रीकरण आधारित शांति के लिए रोम घोषणा पर हस्ताक्षर किए।

निःशस्त्र एवं निरस्त्रीकरण आधारित शांति के लिए रोम घोषणा क्या है?

  • यह एक वैश्विक नैतिक घोषणा है, जो एआई के युग में परमाणु हथियारों पर मानव नियंत्रण बनाए रखने का आह्वान करती है।
  • यह विशेष रूप से परमाणु हमले जैसे जीवन और मृत्यु से जुड़े निर्णयों को स्वायत्त एआई प्रणालियों को सौंपने के विरुद्ध चेतावनी देती है।
  • यह घोषणा पोप लियो XIV के परिपत्र “Magnifica Humanitas” से प्रेरित है, जो तकनीकी अतिरेक से मानव गरिमा की रक्षा पर बल देता है।
  • यद्यपि यह कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है, फिर भी इसका उद्देश्य सैन्य अनुप्रयोगों में एआई के उपयोग को विनियमित करने हेतु एक अंतरराष्ट्रीय संधि के लिए वैश्विक सहमति विकसित करना है।

घोषणा के सिद्धांत

  • अगली हथियारों की दौड़ को रोकना।
  • उत्तरदायी विकास।
  • एआई का उत्तरदायी उपयोग।
  • उत्तरदायी शासन।
  • उत्तरदायी नेतृत्व।
  • परमाणु निरस्त्रीकरण।

पाँच नैतिक एवं परिचालन सिद्धांत

  • अनिवार्य सार्थक मानव नियंत्रण: परमाणु हथियारों के उपयोग अथवा तैनाती का अंतिम निर्णय किसी भी स्वचालित, एल्गोरिथ्मिक या एआई-आधारित प्रणाली द्वारा लेने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।
  • डिजिटल कॉमन्स मॉडल: जिन लोगों के पास एआई जैसी प्रौद्योगिकियों तक पहुँच या नियंत्रण नहीं है, वे उनके अनपेक्षित दुष्परिणामों से अधिक प्रभावित होने की संभावना रखते हैं।
  • उत्तरदायी विकास: एआई विकसित करने वालों के लिए यह अनिवार्य हो कि वे अपने मॉडलों का मार्गदर्शन करने वाले नैतिक ढाँचों को सार्वजनिक करें तथा ऐसे पूर्णतः स्वायत्त एवं स्वयं-सुधार करने वाले एआई तंत्रों के विकास से बचें, जिनकी निगरानी, लेखा-परीक्षा या आवश्यकता पड़ने पर मानव द्वारा तत्काल रोक संभव न हो।
  • आंतरिक परमाणु शस्त्रागार संवेदनशीलता परीक्षण: विश्व के परमाणु-संपन्न देशों से आग्रह किया गया है कि वे अपने परमाणु कमान एवं नियंत्रण तंत्र को एआई-आधारित साइबर छेड़छाड़ एवं अनधिकृत एल्गोरिथ्मिक हस्तक्षेप से सुरक्षित रखने हेतु कठोर आंतरिक समीक्षा करें।
  • समयबद्ध एवं सत्यापन योग्य निरस्त्रीकरण: परमाणु हथियारों के पूर्ण, अपरिवर्तनीय एवं सत्यापन योग्य उन्मूलन के लिए सद्भावनापूर्ण अंतर्राष्ट्रीय वार्ताओं को पुनः प्रारंभ किया जाए।

स्रोत: TH

मिशन गोल्डन स्पाइस

पाठ्यक्रम: जीएस-3/अर्थव्यवस्था  

चर्चा में क्यों ?

  • पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ने लाकाडोंग हल्दी मिशन गोल्डन स्पाइस का शुभारंभ किया।

क्या आप जानते हैं?

  • लाकाडोंग हल्दी मेघालय के पश्चिम जयंतिया पहाड़ियों में उगाई जाती है।
  • अपनी उत्कृष्ट गुणवत्ता के कारण इसे वैश्विक स्तर पर पहचान प्राप्त है और यह भारत की सबसे विशिष्ट कृषि उपजों में से एक मानी जाती है।
  • इसमें 7–10 प्रतिशत करक्यूमिन पाया जाता है, जो वैश्विक औसत से लगभग चार गुना अधिक है। इसी कारण यह विश्व की सर्वोत्तम हल्दी किस्मों में से एक मानी जाती है तथा पोषण-औषधि (Nutraceutical) एवं निर्यात की दृष्टि से अत्यधिक संभावनाशील है।

मिशन गोल्डन स्पाइस 

  • यह परियोजना पूर्वोत्तर भारत की आर्थिक क्षमता को अनलॉक करने (USP) पहल के अंतर्गत शुरू की गई है, जिसकी कुल लागत 175 करोड़ रुपये से अधिक है।
  • इसे 2025 से 2030 तक की पाँच वर्षीय कार्ययोजना के रूप में दो चरणों में लागू किया जाएगा।
  • प्रथम चरण: मूल्य श्रृंखला (Value Chain) का सुदृढ़ीकरण।
  • द्वितीय चरण: विस्तार एवं व्यापक स्तर पर क्रियान्वयन (Expansion and Scale-up), ताकि मेघालय की भौगोलिक संकेतक (GI) टैग प्राप्त लाकाडोंग हल्दी को उसकी विशिष्ट पहचान (USP) के रूप में राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर बढ़ावा दिया जा सके।
  • यह मिशन राज्य सरकार, अधिकारियों तथा किसानों द्वारा वर्षों से किए गए संस्थागत प्रयासों की मजबूत आधारशिला पर निर्मित है।

स्रोत: Air 

बोरोफीन-आधारित हरित स्नेहक(Green Lubricant)

पाठ्यक्रम: जीएस-3/विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

सन्दर्भ

  • वैज्ञानिकों ने बोरोफीन-आधारित जैव-स्नेहक (Bio-lubricant) विकसित किया है, जो मशीनों में घर्षण एवं घिसाव को कम कर सकता है। यह उपलब्धि ऊर्जा दक्षता बढ़ाने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण सफलता मानी जा रही है।

परिचय

  • शोधकर्ताओं ने अरंडी के तेल (Castor Oil), जो एक जैव-अवक्रमणीय (Biodegradable) एवं नवीकरणीय (Renewable) स्नेहक है, में बोरोफीन को एक योजक (Additive) के रूप में उपयोग किया।
  • अरंडी के तेल में केवल 0.1% बोरोफीन मिलाने से, शुद्ध तेल की तुलना में लगभग 42% घर्षण कम हो गया।
  • उपयोग के दौरान बोरोफीन संपर्क सतहों पर ट्राइबोफिल्म (Tribofilm) अर्थात् घर्षण के कारण बनने वाली एक सुरक्षात्मक परत का निर्माण करता है।
  • यह परत कतरनी तनाव (Shear Stress) को कम करती है, घर्षण एवं घिसाव को न्यूनतम करती है तथा मशीनों की सतहों को क्षति से बचाती है।

बोरोफीन क्या है?

  • बोरोफीन (Borophene) एक द्वि-आयामी (2D) नैनो-पदार्थ है, जो बोरॉन परमाणुओं की एकल परत से बना होता है।
  • इसे ग्रैफीन के बोरॉन समकक्ष के रूप में देखा जाता है, किंतु इसके विद्युत एवं यांत्रिक गुण ग्रैफीन से भिन्न होते हैं।
  • यह हल्का, अत्यधिक विद्युत चालक, यांत्रिक रूप से अत्यंत मजबूत तथा रासायनिक रूप से अत्यधिक सक्रिय पदार्थ है।

स्रोत: PIB

कुटकी 

पाठ्यक्रम: जीएस-3/पर्यावरण

सन्दर्भ

  • हिमाचल प्रदेश के किसानों ने संकटग्रस्त हिमालयी औषधीय पौधे कुटकी की सतत खेती का सफल मॉडल विकसित किया है।

परिचय

  • पिक्रोराइज़ा कुरोआ (Picrorhiza kurroa), जिसे स्थानीय रूप से कुटकी कहा जाता है, एक औषधीय जड़ी-बूटी है, जिसका उपयोग अनेक औषधीय निर्माणों में किया जाता है।
  • यह एक उच्च-मूल्य वाली औषधीय वनस्पति है, जो हिमालय के अल्पाइन एवं उप-अल्पाइन क्षेत्रों (2,700–4,500 मीटर) में प्राकृतिक रूप से पाई जाती है।
  • बताया जाता है कि इसका उपयोग 2,000 से अधिक हर्बल औषधीय निर्माणों में किया जाता है।

संरक्षण स्थिति

  • कुटकी को वर्तमान में आईयूसीएन रेड लिस्ट में इंडेन्जर्ड (Endangered) श्रेणी में रखा गया है।
  • अंतर्राष्ट्रीय व्यापार से उत्पन्न खतरे को देखते हुए इसे वन्य जीव एवं वनस्पतियों की संकटग्रस्त प्रजातियों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार संबंधी अभिसमय (CITES) के परिशिष्ट-II में शामिल किया गया है।
  • इस सूची में शामिल प्रजातियों का अंतरराष्ट्रीय व्यापार केवल नियंत्रित परिस्थितियों में तथा निर्यात अनुमति-पत्र (Export Permit) के आधार पर ही किया जा सकता है।
  • हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के किसानों द्वारा अपनाया गया सतत खेती मॉडल इस प्रजाति के संरक्षण के साथ-साथ पर्वतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में आशाजनक परिणाम दे रहा है।

स्रोत: TH

 

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