पाठ्यक्रम: GS3/खाद्य सुरक्षा
सन्दर्भ
- विश्व में खाद्य सुरक्षा एवं पोषण की स्थिति (SOFI) 2026 रिपोर्ट में भारत में भूख कम होने की दिशा में हुई प्रगति को रेखांकित किया गया है, साथ ही किफायती एवं पौष्टिक आहार तक पहुँच सुनिश्चित करने में बनी हुई चुनौतियों को भी उजागर किया गया है।
रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष
वैश्विक परिदृश्य
- वर्ष 2025 में विश्व की अनुमानित 7.8% जनसंख्या भूख से प्रभावित थी, जो 2024 में 8.1% तथा 2022 में 8.6% थी।
भारतीय परिदृश्य
- अल्पपोषित जनसंख्या (Undernourished Population): वर्ष 2023–2025 के दौरान अल्पपोषित लोगों की संख्या घटकर 14.25 करोड़ (जनसंख्या का 9.8%) रह गई, जबकि 2004–2006 में यह 24.39 करोड़ (21.1%) थी।
- स्वस्थ आहार की लागत: वर्ष 2025 में प्रति व्यक्ति प्रतिदिन स्वस्थ आहार की लागत PPP $4.11 तक पहुँच गई, जो 2017 की तुलना में लगभग 48% अधिक है।
- वहन-क्षमता का संकट: वर्ष 2025 में लगभग 52.01 करोड़ लोग (भारत की 35.5% जनसंख्या) स्वस्थ आहार का खर्च वहन करने में सक्षम नहीं थे।
कुपोषण संकेतक:
- बच्चों में अवरुद्ध वृद्धि (Stunting) घटकर 32.9% रह गई।
- क्षीणता (Wasting) 18.7% दर्ज की गई।
- जबकि बाल्यावस्था में अधिक वजन, वयस्क मोटापा तथा महिलाओं में रक्ताल्पता (एनीमिया) की दर में वृद्धि जारी रही।
पोषण संबंधी चुनौतियों के कारण
- पौष्टिक खाद्य पदार्थों की ऊँची कीमत: फल, सब्जियाँ, दालें, दूध एवं प्रोटीन-समृद्ध खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतें।
- आय संबंधी सीमाएँ: अनेक परिवार विविध एवं संतुलित आहार के बजाय कम कीमत वाले अधिक कैलोरीयुक्त मुख्य खाद्यान्नों को प्राथमिकता देते हैं।
- आहार असंतुलन: अनाज पर अत्यधिक निर्भरता तथा प्रोटीन एवं सूक्ष्म पोषक तत्त्वों का अपर्याप्त सेवन।
- मातृ पोषण की खराब स्थिति: रक्ताल्पता की उच्च दर पीढ़ी-दर-पीढ़ी कुपोषण को बढ़ावा देती है।
- क्षेत्रीय एवं सामाजिक असमानताएँ: जनजातीय क्षेत्रों, दूरस्थ क्षेत्रों तथा शहरी गरीबों में पोषण संबंधी जोखिम अधिक बने हुए हैं।
- खाद्य उपभोग के बदलते स्वरूप: अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के बढ़ते उपभोग से मोटापे की समस्या बढ़ी है।
सरकारी पहल
- मध्याह्न भोजन कार्यक्रम (Mid-Day Meal Programme): इसका उद्देश्य सरकारी, स्थानीय निकाय एवं सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों में बच्चों के नामांकन, उपस्थिति एवं विद्यालय में बने रहने की दर बढ़ाने के साथ-साथ उनके पोषण स्तर में सुधार करना है।
- खाद्य सुदृढ़ीकरण (Food Fortification): सरकार सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत सुदृढ़ीकृत चावल, गेहूँ का आटा एवं खाद्य तेलों को बढ़ावा दे रही है।
- राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013: यह अधिनियम लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (TPDS) के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों की 75% तथा शहरी क्षेत्रों की 50% तक जनसंख्या को रियायती खाद्यान्न उपलब्ध कराने का प्रावधान करता है।
- पोषण ट्रैकर (Poshan Tracker): महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा विकसित यह एक महत्त्वपूर्ण सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) आधारित शासन उपकरण है।
- यह विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की विस्तारित तालिकाओं तथा दिन-आधारित ज़ेड-स्कोर का उपयोग करके बच्चों की लंबाई, वजन, लिंग एवं आयु के आधार पर अवरुद्ध वृद्धि, क्षीणता, कम वजन एवं मोटापे का गतिशील आकलन करता है।
- प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना: कोविड-19 महामारी से उत्पन्न आर्थिक व्यवधानों के कारण गरीबों को हुई कठिनाइयों को कम करने के उद्देश्य से प्रारंभ की गई।
- सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0: इसमें पोषण अभियान, आंगनवाड़ी सेवाएँ तथा किशोरी बालिका योजना जैसी प्रमुख योजनाएँ शामिल हैं, जो देश में कुपोषण की समस्या के समाधान हेतु प्रत्यक्ष लक्षित हस्तक्षेप प्रदान करती हैं।
आगे की राह
- फलों, सब्जियों, दालों, मोटे अनाज (श्रीअन्न) एवं दुग्ध उत्पादों के उत्पादन, आपूर्ति एवं उपभोग को बढ़ावा दिया जाए तथा कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम किया जाए।
- सार्वजनिक नीतियों का ध्यान केवल पर्याप्त कैलोरी उपलब्ध कराने पर नहीं, बल्कि संतुलित, विविध एवं सूक्ष्म पोषक तत्त्वों से भरपूर आहार तक पहुँच सुनिश्चित करने पर होना चाहिए।
- रक्ताल्पता कम करने के लिए आयरन-फोलिक अम्ल अनुपूरण, मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार तथा आहार विविधीकरण को बढ़ावा दिया जाए।
- सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियों में पोषण शिक्षा, शारीरिक गतिविधियों को बढ़ावा तथा अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों के नियमन को शामिल किया जाए।
विश्व में खाद्य सुरक्षा एवं पोषण की स्थिति (SOFI)
- यह रिपोर्ट सतत विकास लक्ष्य (SDG)-2 (लक्ष्य 2.1 एवं 2.2) — अर्थात् भूख, खाद्य असुरक्षा तथा सभी प्रकार के कुपोषण की समाप्ति की प्रगति की वार्षिक वैश्विक निगरानी रिपोर्ट है।
- इसे संयुक्त रूप से संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO), अंतरराष्ट्रीय कृषि विकास कोष (IFAD), संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF), संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) तथा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा प्रकाशित किया जाता है।
स्रोत: DTE
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