पाठ्यक्रम: जीएस-3/अर्थव्यवस्था
सन्दर्भ
- सरकार ने ई-कॉमर्स क्षेत्र के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) नियमों में ढील देते हुए विदेशी निवेश वाली ई-कॉमर्स कंपनियों को भारत में निर्मित या उत्पादित वस्तुओं के निर्यात के लिए विशेष रूप से इन्वेंटरी-आधारित मॉडल के संचालन की अनुमति दी है।
प्रमुख बिंदु
- भारत ने अपने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) नियमों में संशोधन करते हुए विदेशी निवेश वाली ई-कॉमर्स कंपनियों को भारतीय विक्रेताओं से सीधे उत्पाद खरीदकर उन्हें विदेशी ग्राहकों को निर्यात करने की अनुमति दी है।
- पहले सरकारें विदेशी निवेश वाली मार्केटप्लेस (Marketplace) कंपनियों और इन्वेंटरी-आधारित ऑनलाइन खुदरा विक्रेताओं के बीच स्पष्ट अंतर बनाए रखती थीं, ताकि लाखों छोटे खुदरा व्यापारियों एवं कारोबारियों के हितों की रक्षा की जा सके।
- वर्तमान नियमों के अनुसार विदेशी निवेश वाली ई-कॉमर्स कंपनियों को केवल मार्केटप्लेस मॉडल पर कार्य करने की अनुमति थी।
- मार्केटप्लेस मॉडल में ऑनलाइन मंच केवल मध्यस्थ की भूमिका निभाता है। उत्पादों का स्वामित्व स्वतंत्र विक्रेताओं के पास रहता है और वे उन्हें मंच के माध्यम से बेचते हैं, जबकि ई-कॉमर्स कंपनी कमीशन एवं अन्य शुल्क अर्जित करती है।
- इन्वेंटरी-आधारित मॉडल में प्लेटफार्म स्वयं उत्पादों का स्वामी होता है, भंडार (इन्वेंटरी) का प्रबंधन करता है तथा ग्राहकों को सीधे बिक्री करता है।
- नए प्रावधान के तहत ऐसी कंपनियाँ भारतीय उत्पादों को सीधे खरीदकर, उनका भंडारण कर तथा अपनी इन्वेंटरी से उनका निर्यात कर सकेंगी।
महत्त्व
- यह कदम वैश्विक बाज़ारों तक अधिक एवं आसान पहुँच उपलब्ध कराकर निर्यात को बढ़ावा देगा।
- अमेज़न के अनुसार, इस नीति परिवर्तन से विशेष रूप से छोटे शहरों एवं कस्बों के निर्माताओं को विदेशी खरीदारों तक पहुँचने में सहायता मिलेगी।
- ई-कॉमर्स के इन्वेंटरी-आधारित मॉडल के लिए एफडीआई नियमों में ढील मिलने से भारत में अधिक वैश्विक ई-कॉमर्स कंपनियों के आने की संभावना है, क्योंकि उन्हें भारतीय उत्पादों की खरीद, भंडारण तथा विदेशी बाज़ारों तक उनकी आपूर्ति में अधिक लचीलापन मिलेगा।
शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश
- नेट एफडीआई वह राशि है जो सकल एफडीआई में से विदेशी कंपनियों द्वारा भारत से अपने देश भेजी गई राशि (Repatriation) तथा भारतीय कंपनियों द्वारा विदेशों में किए गए प्रत्यक्ष निवेश (Outward FDI) को घटाने के बाद प्राप्त होती है।
- नेट एफडीआई = सकल एफडीआई अंतर्वाह − (विदेशी कंपनियों द्वारा धन की वापसी + भारतीय कंपनियों का विदेशों में प्रत्यक्ष निवेश)
प्रमुख घटक:
- सकल एफडीआई अंतर्वाह (Gross FDI Inflows): विदेशी संस्थाओं द्वारा देश में किया गया कुल नया निवेश। इसमें कारखानों की स्थापना, स्थानीय कंपनियों का अधिग्रहण तथा परिचालन का विस्तार शामिल है।
- धन की वापसी एवं विनिवेश (Repatriation & Disinvestment): विदेशी कंपनियों द्वारा अपने लाभ या पूँजी को अपने मूल देश भेजना। इसमें घरेलू कंपनियों की परिसंपत्तियों अथवा शेयरों की बिक्री भी शामिल होती है।
- विदेशगामी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (Outward FDI): भारतीय कंपनियों द्वारा विदेशी देशों में किया गया निवेश, जैसे अधिग्रहण करना अथवा सहायक कंपनियों की स्थापना करना।
नेट एफडीआई का महत्त्व
- सकारात्मक नेट एफडीआई: यह दर्शाता है कि देश में आने वाला विदेशी निवेश, बाहर जाने वाले निवेश से अधिक है। इसे सामान्यतः अर्थव्यवस्था के आकर्षण का संकेत माना जाता है।
- नकारात्मक नेट एफडीआई: यह संकेत दे सकता है कि पूँजी देश से बाहर जा रही है या भारतीय कंपनियाँ विदेशों में अधिक निवेश कर रही हैं, जबकि विदेशी निवेशक भारत में अपेक्षाकृत कम निवेश कर रहे हैं।
- यह हमेशा नकारात्मक संकेत नहीं होता, बल्कि कई बार यह अर्थव्यवस्था की परिपक्वता अथवा वैश्विक विस्तार की महत्त्वाकांक्षा को भी दर्शा सकता है।
स्रोत: TH
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