Syllabus: GS2/Governance
सन्दर्भ
- ओडिशा सरकार ने राज्य में महिलाओं एवं बालिकाओं की तस्करी से निपटने के लिए ‘नूतन सकाल (Nutan Sakala – नया सवेरा)’ नामक एक व्यापक राज्य नीति का प्रस्ताव रखा है।
परिचय
- यह रूपरेखा चार प्रमुख स्तंभों—रोकथाम, संरक्षण, अभियोजन तथा साझेदारी—पर आधारित है, ताकि समन्वित एवं व्यापक प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जा सके।
- नीति में विशेष रूप से संवेदनशील समुदायों, विद्यालयों, पंचायतों तथा डिजिटल माध्यमों में जीवन-कौशल शिक्षा, माँग-नियंत्रण पहल तथा ग्राम प्रवासन रजिस्टर जैसे सामुदायिक साधनों के माध्यम से तस्करी को उसके स्रोत पर ही रोकने का प्रस्ताव है।
- एकीकृत पीड़ित सहायता केंद्र (Integrated Victim Support Centres – IVSCs) स्थापित किए जाएंगे, जो चिकित्सा सुविधा, विधिक सहायता, मनोसामाजिक परामर्श तथा रेफरल सेवाएँ एक ही स्थान पर उपलब्ध कराएँगे।
- नूतन सकाल कोष (Corpus Fund) तस्करी-रोधी उपायों एवं पीड़ितों के पुनर्वास के लिए एक समर्पित एवं अव्यय (Non-lapsable) वित्तीय व्यवस्था के रूप में कार्य करेगा।
भारत में मानव तस्करी
- भारत मानव तस्करी का स्रोत तथा गंतव्य, दोनों प्रकार का देश है। वर्ष 2018 से 2022 के बीच भारत में मानव तस्करी के 10,659 मामले दर्ज किए गए।
- नेपाल, बांग्लादेश एवं म्यांमार प्रमुख स्रोत देश हैं, जहाँ से महिलाओं एवं बालिकाओं को बेहतर जीवन, रोजगार एवं बेहतर जीवन-स्थितियों का प्रलोभन देकर भारत लाया जाता है।
- राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आँकड़ों एवं राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की अधिसूचनाओं के अनुसार ओडिशा, बिहार, तेलंगाना, महाराष्ट्र एवं राजस्थान में मानव तस्करी के सर्वाधिक मामले दर्ज होते हैं।
मानव तस्करी के कारण
- गरीबी: गरीबी में जीवनयापन करने वाले व्यक्ति एवं परिवार तस्करों द्वारा बेहतर अवसर एवं आजीविका के झूठे वादों का आसानी से शिकार बन जाते हैं।
- जागरूकता का अभाव: निम्न साक्षरता एवं सीमित जागरूकता, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में, लोगों को धोखाधड़ी एवं शोषण के प्रति अधिक संवेदनशील बनाती है।
- प्रवास: अनियमित आंतरिक एवं अंतर्राष्ट्रीय प्रवास से ऐसे अवसर उत्पन्न होते हैं, जिनका लाभ उठाकर तस्कर अपने सामाजिक समर्थन तंत्र से दूर लोगों को निशाना बनाते हैं।
- कमज़ोर कानून-प्रवर्तन: कानून-प्रवर्तन एजेंसियों का अपर्याप्त प्रशिक्षण एवं भ्रष्टाचार, तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण की चुनौती को और बढ़ा देते हैं।
भारत में संवैधानिक सुरक्षा
- अनुच्छेद 23: मानव तस्करी एवं बेगार (बलात् श्रम) का निषेध करता है।
- अनुच्छेद 21: जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार प्रदान करता है, जिसकी व्याख्या गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार के रूप में भी की गई है।
- अनुच्छेद 39(ई): राज्य यह सुनिश्चित करेगा कि श्रमिकों एवं बच्चों के स्वास्थ्य एवं शक्ति का दुरुपयोग न हो तथा नागरिकों को उनकी आयु एवं क्षमता के प्रतिकूल कार्य करने के लिए विवश न किया जाए।
भारत में विधिक सुरक्षा
- यौन अपराधों से बालकों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम, 2012: बच्चों को यौन शोषण एवं दुर्व्यवहार से संरक्षण प्रदान करता है।
- किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015: देखरेख एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों के संरक्षण, उपचार एवं पुनर्वास का ढाँचा प्रदान करता है।
- राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) अधिनियम में वर्ष 2019 में संशोधन कर मानव तस्करी को भी इसकी जाँच के दायरे में शामिल किया गया।
- अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम, 1956 (ITPA): व्यावसायिक यौन शोषण के उद्देश्य से होने वाली तस्करी की रोकथाम हेतु प्रमुख कानून है।
- आपराधिक विधि (संशोधन) अधिनियम, 2013: मानव तस्करी, विशेषकर किसी भी प्रकार के शोषण के लिए बच्चों की तस्करी से निपटने हेतु व्यापक प्रावधान करता है।
- भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 143 से 146 तक मानव तस्करी, दास व्यापार तथा अवैध अनिवार्य श्रम के विभिन्न रूपों के लिए दंडात्मक प्रावधान करती हैं।
- संयुक्त राष्ट्र अभिसमय: भारत ने अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध के विरुद्ध संयुक्त राष्ट्र अभिसमय (UNCTOC) का अनुमोदन किया है, जिसके एक प्रोटोकॉल का उद्देश्य विशेष रूप से महिलाओं एवं बच्चों की मानव तस्करी की रोकथाम, दमन एवं दंड सुनिश्चित करना है।
- सार्क अभिसमय: भारत ने वेश्यावृत्ति के उद्देश्य से महिलाओं एवं बच्चों की तस्करी की रोकथाम एवं नियंत्रण संबंधी सार्क अभिसमय का भी अनुमोदन किया है।
न्यायिक हस्तक्षेप
- प्रज्वला बनाम भारत संघ मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने व्यावसायिक एवं यौन शोषण के उद्देश्य से तस्करी के पीड़ितों के लिए एक व्यापक पीड़ित संरक्षण योजना तैयार की।
- विशालजीत बनाम भारत संघ (1990) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने बाल वेश्यावृत्ति एवं मानव तस्करी को गंभीर सामाजिक-आर्थिक बुराई माना तथा संवेदनशील महिलाओं एवं बच्चों की सुरक्षा के लिए निवारक एवं मानवीय दृष्टिकोण अपनाने पर बल दिया।
संयुक्त राष्ट्र मादक पदार्थ एवं अपराध कार्यालय (UNODC)
- यह अवैध मादक पदार्थों एवं अंतर्राष्ट्रीय अपराधों के विरुद्ध वैश्विक स्तर पर अग्रणी संस्था है तथा संयुक्त राष्ट्र के आतंकवाद-रोधी प्रमुख कार्यक्रम के कार्यान्वयन के लिए भी उत्तरदायी है।
- इसकी स्थापना 1997 में हुई तथा इसका मुख्यालय वियना (ऑस्ट्रिया) में स्थित है।
- यूएनओडिसी (UNODC) अपने अधिकांश कार्यों के लिए मुख्यतः सरकारों द्वारा दिए जाने वाले स्वैच्छिक अंशदान पर निर्भर करता है।
- यूएनओडिसी (UNODC) रणनीति 2021–2025 मानवाधिकारों, लैंगिक समानता एवं दिव्यांगजन समावेशन को बढ़ावा देने, बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा युवाओं की परिवर्तनकारी क्षमता का उपयोग करने के लिए प्रतिबद्ध है।
स्रोत: TH
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