पाठ्यक्रम: GS2/राजव्यवस्था एवं शासन
सन्दर्भ
- हाल ही में, दिल्ली सरकार के गृह विभाग ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA), 1980 की धारा 3(2) के अंतर्गत दिल्ली पुलिस आयुक्त को निवारक निरोध (Preventive Detention) की शक्तियों का प्रयोग करने के लिए अधिकृत किया है।
राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA), 1980 का परिचय
- यह एक निवारक निरोध कानून है, जिसे राष्ट्रीय सुरक्षा, भारत की रक्षा, लोक व्यवस्था तथा आवश्यक वस्तुओं एवं सेवाओं की आपूर्ति एवं अनुरक्षण की रक्षा के लिए व्यक्तियों को निरुद्ध करने हेतु केंद्र एवं राज्य सरकारों को अधिकार प्रदान करने के उद्देश्य से अधिनियमित किया गया था।
- यह कानून अधिकारियों को भविष्य में संभावित खतरों को रोकने का अधिकार देता है, न कि पूर्व में किए गए अपराधों के लिए दंडित करने का।
एनएसए (NSA) के अंतर्गत निवारक निरोध
- निवारक निरोध का अर्थ है किसी व्यक्ति को ऐसे भावी कृत्यों को रोकने के लिए निरुद्ध करना, जिन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा या लोक व्यवस्था के लिए हानिकारक माना जाता है।
- सामान्य आपराधिक कानून के अंतर्गत गिरफ्तारी की भाँति निरुद्ध व्यक्ति को 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत करना आवश्यक नहीं होता।
एनएसए (NSA) की प्रमुख विशेषताएँ
- निरोध अवधि: प्रारंभ में अधिकतम 3 माह तक, जिसे समीक्षा के बाद 12 माह तक बढ़ाया जा सकता है।
- निरोध के आधार: यदि प्राधिकारी इस बात से संतुष्ट हों कि भारत की रक्षा, राज्य की सुरक्षा, लोक व्यवस्था, विदेश संबंधों अथवा आवश्यक वस्तुओं एवं सेवाओं की आपूर्ति एवं अनुरक्षण के प्रतिकूल गतिविधियों को रोकने के लिए निरोध आवश्यक है, तो वे किसी व्यक्ति को निरुद्ध कर सकते हैं।
- सलाहकार बोर्ड: प्रत्येक निरोध आदेश की समीक्षा ऐसे सलाहकार बोर्ड द्वारा की जाती है, जिसकी अध्यक्षता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश बनने की योग्यता रखने वाला व्यक्ति करता है।
- बोर्ड यह परीक्षण करता है कि निरंतर निरोध के लिए पर्याप्त कारण मौजूद हैं या नहीं।
- अभ्यावेदन (Representation): निरुद्ध व्यक्ति को निरोध के विरुद्ध अभ्यावेदन प्रस्तुत करने का अधिकार प्राप्त है।
- किंतु यदि तथ्यों का प्रकटीकरण लोकहित के विरुद्ध हो, तो सरकार उन्हें प्रकट करने से इंकार कर सकती है।
संवैधानिक आधार
- अनुच्छेद 22: मनमानी गिरफ्तारी से संरक्षण प्रदान करता है, किंतु निवारक निरोध को एक अपवाद के रूप में स्वीकार करता है।
प्रमुख संवैधानिक सुरक्षा उपाय:
- गिरफ्तारी के कारणों की सूचना देना।
- अभ्यावेदन प्रस्तुत करने का अधिकार।
- निर्धारित समय सीमा के भीतर सलाहकार बोर्ड द्वारा समीक्षा।
| निवारक निरोध बनाम दंडात्मक निरोध | |
| निवारक निरोध | दंडात्मक निरोध |
| संभावित अपराधों को रोकता है। | पहले से किए गए अपराधों के लिए दंड देता है । |
| प्रारंभ में आपराधिक मुकदमे की आवश्यकता नहीं होती है। | आपराधिक जाँच एवं न्यायिक विचारण पर आधारित होता है। |
| उद्देश्य रोकथाम है। | उद्देश्य दंड देना है। |
| निवारक निरोध संबंधी कानूनों द्वारा संचालित है। | दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) अथवा लागू होने पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) द्वारा संचालित। |
एनएसए (NSA) से संबंधित मुद्दे एवं चिंताएँ
- दुरुपयोग का जोखिम: कार्यपालिका को प्राप्त व्यापक शक्तियों के कारण मनमाना अथवा राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित निरोध हो सकता है।
- व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर प्रभाव: बिना मुकदमे के निरोध, अनुच्छेद 21 द्वारा प्रदत्त जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन माना जा सकता है।
- सीमित न्यायिक निगरानी: निवारक निरोध के मामलों में व्यक्ति को 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया जाता, जिससे तत्काल न्यायिक परीक्षण सीमित हो जाता है।
- दीर्घकालीन निरोध की संभावना: सलाहकार बोर्ड की समीक्षा के अधीन किसी व्यक्ति को 12 माह तक निरुद्ध रखा जा सकता है।
- पारदर्शिता का अभाव: कुछ मामलों में लोकहित का हवाला देकर निरोध के कारणों का खुलासा नहीं किया जाता, जिससे निरुद्ध व्यक्ति के लिए आदेश को प्रभावी ढंग से चुनौती देना कठिन हो जाता है।
- सुरक्षा एवं अधिकारों के बीच संतुलन: राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा करते हुए लोकतांत्रिक स्वतंत्रताओं एवं नागरिक अधिकारों का संरक्षण एक सतत संवैधानिक चुनौती बना हुआ है।
आगे की राह
- अनुच्छेद 22 के अंतर्गत प्रदत्त संवैधानिक सुरक्षा उपायों का अक्षरशः एवं भावनानुसार पालन सुनिश्चित किया जाए।
- निवारक निरोध संबंधी कानूनों की समय-समय पर विधायिका एवं न्यायपालिका द्वारा समीक्षा की जाए।
- निवारक निरोध का प्रयोग केवल असाधारण परिस्थितियों में तथा पर्याप्त निगरानी के साथ किया जाए।
- राष्ट्रीय सुरक्षा एवं लोक व्यवस्था की रक्षा करते हुए पारदर्शिता, जवाबदेही तथा अनुपातिकता के सिद्धांतों को बढ़ावा दिया जाए।
स्रोत: IE
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संक्षिप्त समाचार 23-07-2026
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