पाठ्यक्रम: GS2/शासन/सामाजिक सुरक्षा
संदर्भ
- सरकार असंगठित एवं औपचारिक (संगठित) क्षेत्र के श्रमिकों के लिए एक नई अंशदायी पेंशन योजना पर कार्य कर रही है।
प्रमुख विशेषताएँ
- यह योजना सेवानिवृत्ति निधि प्रबंधन संस्था कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के 3.0 सुधार चरण का एक महत्त्वपूर्ण भाग है।
- इसके अंतर्गत वर्तमान सदस्यों के साथ-साथ कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) से वंचित व्यक्तियों को भी शामिल किया जाएगा।
- अंशदान : इस योजना में विभिन्न स्रोतों से अंशदान की व्यवस्था किए जाने की संभावना है, जिनमें शामिल हैं—
- स्वयं श्रमिक,
- नियोक्ता ,
- निम्न वेतन वर्ग के श्रमिकों के लिए सरकार का सह-अंशदान,
- गिग एवं प्लेटफॉर्म श्रमिकों के मामले में एग्रीगेटर ,
- कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) अथवा अन्य तृतीय-पक्ष निधियाँ।
- प्रत्येक सदस्य का एक व्यक्तिगत पेंशन खाता होगा।
- प्रणाली सदस्य द्वारा निर्धारित पेंशन लक्ष्य एवं अपेक्षित सेवानिवृत्ति आयु के आधार पर लक्षित सेवानिवृत्ति राशि (TRS) की गतिशील गणना करेगी।
- आवश्यकता पड़ने पर TRS में संशोधन की अनुमति होगी तथा उसके अनुरूप अंशदान की आवश्यक राशि का पुनर्निर्धारण किया जा सकेगा।
- सदस्यों को पेंशन भुगतान अथवा निकासी की राशि निर्धारित करने में लचीलापन प्रदान किया जाएगा।
- प्रणाली वैकल्पिक सुविधा के रूप में मुद्रास्फीति-समायोजित अनुमान भी उपलब्ध कराएगी।
- समय के साथ संचित अंशदान को दीर्घकालिक सरकारी समर्थित प्रतिभूतियों में निवेश किया जाएगा तथा उस पर प्रतिवर्ष ब्याज जमा किया जाएगा।
- अन्य प्रकार की पेंशन: इस योजना के अंतर्गत समेकित “पारिवारिक लाभ कोष” के माध्यम से पति/पत्नी, बच्चों तथा अनाथों के लिए पारिवारिक एवं उत्तरजीवी पेंशन का भी प्रावधान प्रस्तावित किया गया है।
महत्त्व
- EPFO 3.0 सुधारों के अंतर्गत नई तकनीकी सुविधाओं एवं कोर बैंकिंग समाधान (CBS) के उन्नयन की व्यवस्था की जाएगी, जिससे असंगठित क्षेत्र एवं गिग श्रमिकों के लिए भविष्य निधि (PF) अंशदान का मार्ग प्रशस्त होगा।
- यह पहल सामाजिक सुरक्षा संहिता के अनुरूप है, जिसके माध्यम से प्रथम बार गिग एवं प्लेटफॉर्म श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाया गया है।
- इस संहिता के अनुसार सामाजिक सुरक्षा के लिए एग्रीगेटर को अपने वार्षिक कारोबार का 1–2 प्रतिशत अंशदान करना होगा, जबकि कुल अंशदान एग्रीगेटर द्वारा देय राशि के 5 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा।
- योजना में सर्वोत्तम वैश्विक प्रथाओं को सम्मिलित करने हेतु सिंगापुर सहित अन्य देशों की सेवानिवृत्ति निधि प्रणालियों का अध्ययन किया जा रहा है।
भारत में पेंशन कवरेज
- पेंशन व्यक्ति को उसके सेवानिवृत्ति पश्चात् जीवन में नियमित मासिक आय प्रदान करती है।
- आय में कमी, एकल (न्यूक्लियर) परिवारों की बढ़ती प्रवृत्ति, आजीविका के लिए परिवार के सदस्यों का पलायन, जीवन-यापन की बढ़ती लागत तथा औसत आयु में वृद्धि जैसे कारक वित्तीय सुरक्षा को कमजोर करते हैं। ऐसी स्थिति में पेंशन सम्मानजनक एवं आत्मनिर्भर जीवन सुनिश्चित करने का महत्त्वपूर्ण माध्यम बनती है।
- भारत की पेंशन व्यवस्था:
- परिभाषित लाभ पेंशन प्रणाली : पात्र सरकारी कर्मचारियों के लिए ऐसी व्यवस्था, जिसमें सेवानिवृत्ति के पश्चात् निश्चित आय की गारंटी प्रदान की जाती है।
- अंशदायी पेंशन व्यवस्था : ऐसी प्रणाली जिसमें व्यक्ति तथा/अथवा नियोक्ता सेवानिवृत्ति बचत हेतु नियमित अंशदान करते हैं।
- सांविधिक वेतन-आधारित योजनाएँ : संगठित निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए ऐसी योजनाएँ, जिनमें कर्मचारी एवं नियोक्ता दोनों का अंशदान अनिवार्य होता है।
- कर-वित्तपोषित सामाजिक सहायता पेंशन: ऐसी पेंशन व्यवस्था, जो सीमित अथवा औपचारिक आय स्रोतों से वंचित वृद्ध, विधवा एवं अन्य संवेदनशील वर्गों को कर-आधारित वित्तीय सहायता प्रदान करती है।


सभी नागरिकों के लिए अंशदायी पेंशन व्यवस्था
- औपचारिक रोजगार के दायरे से बाहर के व्यक्तियों तक सेवानिवृत्ति बचत की सुविधा का विस्तार करने के उद्देश्य से स्वैच्छिक अंशदायी पेंशन विकल्प उपलब्ध कराए गए हैं।
- इनमें राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली तथा अटल पेंशन योजना शामिल हैं, जो उन व्यक्तियों के लिए उपलब्ध हैं जो वैधानिक वेतन-आधारित पेंशन व्यवस्था के अंतर्गत नहीं आते।
- राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली का सार्वभौमिक नागरिक मॉडल: यह मॉडल निर्धारित आयु-सीमा के अंदर स्वैच्छिक नामांकन, लचीले अंशदान तथा निवेश विकल्पों के चयन की सुविधा प्रदान करता है।
- यह दो-स्तरीय खाता संरचना पर आधारित है—
- टियर-I: यह प्राथमिक सेवानिवृत्ति खाता है, जिसमें धन निकासी संबंधी कुछ निर्धारित प्रतिबंध लागू होते हैं।
- टियर-II: यह एक स्वैच्छिक बचत खाता है, जो अपेक्षाकृत अधिक धन-निकासी की सुविधा प्रदान करता है।
- यह दो-स्तरीय खाता संरचना पर आधारित है—
- एनपीएस वात्सल्य : नाबालिगों के लिए पेंशन खाता: इस योजना के अंतर्गत माता-पिता अथवा विधिक अभिभावक किसी नाबालिग के नाम से पेंशन खाता खोल एवं संचालित कर सकते हैं।
- नाबालिग के वयस्क होने तक नियमित अंशदान किया जाता है।
- यह योजना प्रारंभिक अवस्था से ही सेवानिवृत्ति बचत की आदत विकसित करने तथा दीर्घकालिक वित्तीय नियोजन को प्रोत्साहित करती है।
- अटल पेंशन योजना: यह निम्न आय वर्ग के अभिदाताओं के लिए एक अंशदायी पेंशन योजना है।
- इस योजना में नामांकन की सुविधा बैंकों एवं डाकघरों के माध्यम से उपलब्ध कराई जाती है।
- गैर-अंशदायी सामाजिक पेंशन व्यवस्था: यह व्यवस्था कर-आधारित वित्तीय सहायता के माध्यम से उन वृद्ध व्यक्तियों को न्यूनतम आय सहायता प्रदान करती है, जो असंगठित क्षेत्र में कार्यरत रहे हैं तथा जिनके पास सेवानिवृत्ति बचत उपलब्ध नहीं है।
- राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम: राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम आर्थिक रूप से कमजोर एवं संवेदनशील व्यक्तियों को वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
- राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को प्रोत्साहित किया जाता है कि वे केंद्र सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली सहायता के समकक्ष अथवा उससे अधिक अतिरिक्त सहायता उपलब्ध कराएँ।
- इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि लाभार्थियों को सम्मानजनक स्तर की सामाजिक एवं आर्थिक सहायता प्राप्त हो सके।
निष्कर्ष
- जनसांख्यिकीय परिवर्तन की तीव्र गति के साथ सेवानिवृत्ति पश्चात् आय सुरक्षा दीर्घकालिक आर्थिक एवं सामाजिक स्थिरता के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण होती जा रही है।
- इसके लिए पेंशन कवरेज का व्यापक विस्तार, निधियों का विवेकपूर्ण प्रबंधन तथा सेवाओं का प्रभावी एवं दक्ष वितरण आवश्यक है।
- नीति एवं संस्थागत व्यवस्था में निरंतर किए जा रहे सुधार भारत की पेंशन प्रणाली को अधिक सुदृढ़ बना रहे हैं।
- इससे भविष्य में सभी वर्गों के लिए समावेशी, सतत एवं सुरक्षित वृद्धावस्था आय व्यवस्था सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी।
स्रोत: IE