पीएम-उदय योजना
पाठ्यक्रम: GS2/ शासन
समाचार में
- हाल ही में दिल्ली की मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय राजधानी में संशोधित प्रधानमंत्री अनधिकृत कॉलोनियों में आवास अधिकार योजना (PM-UDAY) के क्रियान्वयन हेतु प्रथम चरण के रूप में केंद्र सरकार से 100 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता का अनुरोध किया है।
प्रधानमंत्री अनधिकृत कॉलोनियों में आवास अधिकार योजना (PM-UDAY)
- इस योजना का शुभारंभ 29 अक्टूबर, 2019 को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (अनधिकृत कॉलोनियों के निवासियों के संपत्ति अधिकारों की मान्यता) विनियम, 2019 के अंतर्गत किया गया था।
- दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने सरकारी भूमि के लिए स्वामित्व हस्तांतरण विलेख तथा निजी भूमि के लिए प्राधिकरण पर्ची जारी करने हेतु एक ऑनलाइन पोर्टल विकसित किया है।
- 31 मार्च, 2026 तक लगभग 40,000 दस्तावेज़ जारी किए जा चुके हैं।
- नियमितीकरण प्रमाण-पत्र तथा नागरिक सुविधाओं के विकास से संबंधित प्रावधान दिल्ली नगर निगम (MCD) एवं अन्य स्थानीय निकायों द्वारा जारी किए जाएंगे।
- इस योजना का उद्देश्य दिल्ली की पात्र अनधिकृत कॉलोनियों के निवासियों को स्वामित्व, संपत्ति हस्तांतरण तथा बंधक रखने का अधिकार प्रदान करना है।
- इसके लिए सामान्य मुख्तारनामा (GPA), विक्रय अनुबंध , भुगतान रसीदें तथा कब्ज़ा संबंधी दस्तावेज़ जैसे अभिलेखों को आधार बनाया जाता है।
- यह योजना वन क्षेत्रों, संरक्षित स्मारकों, यमुना बाढ़ क्षेत्र, सड़क अधिकार क्षेत्र , रिज क्षेत्र तथा 69 समृद्ध अनधिकृत कॉलोनियों जैसी निषिद्ध श्रेणी की कॉलोनियों पर लागू नहीं होती।
स्रोत: HT
यूरोपीय संघ एवं 14 देशों द्वारा दक्षिण चीन सागर पर मध्यस्थता निर्णय की पुनः पुष्टि
पाठ्यक्रम: GS1/ भूगोल, GS2/ अंतरराष्ट्रीय संबंध
संदर्भ
- संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम तथा अन्य पश्चिमी एवं एशियाई देशों ने वर्ष 2016 के मध्यस्थता निर्णय का पुनः समर्थन करते हुए कहा कि दक्षिण चीन सागर पर चीन के व्यापक दावे अवैध हैं।
दक्षिण चीन सागर
- दक्षिण चीन सागर पश्चिमी प्रशांत महासागर का एक सीमांत सागर है।
- यह दक्षिणी चीन, ताइवान, फिलीपींस, इंडोनेशिया, वियतनाम, थाईलैंड, कंबोडिया तथा मलेशिया के मध्य स्थित है।
- यह प्रशांत महासागर एवं हिंद महासागर के मध्य समुद्री व्यापार एवं नौवहन का अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है।

दक्षिण चीन सागर विवाद
- चीन, वियतनाम, फिलीपींस, ब्रुनेई, मलेशिया तथा ताइवान के बीच दक्षिण चीन सागर पर लंबे समय से क्षेत्रीय विवाद चला आ रहा है।
- विवाद के दो प्रमुख केंद्र हैं—
- स्प्रैटली द्वीप समूह
- पैरासेल द्वीप समूह
- नाइन-डैश लाइन : चीन दक्षिण चीन सागर के अधिकांश भाग पर अपना दावा करता है।
- इस दावे का आधार यू (U) आकार की ‘नाइन-डैश लाइन’ है, जिसके अंतर्गत दक्षिण चीन सागर का लगभग 90 प्रतिशत क्षेत्र सम्मिलित है।
- यह रेखा 1940 के दशक के चीनी मानचित्रों पर आधारित है और इसके अंदर स्थित समुद्री क्षेत्र एवं द्वीपों पर चीन के दावे को प्रदर्शित करती है।
वर्ष 2016 का मध्यस्थता निर्णय
- वर्ष 2013 में फिलीपींस ने स्कारबोरो शोल को लेकर समुद्री विवाद के संदर्भ में संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून अभिसमय (UNCLOS) के अंतर्गत चीन के विरुद्ध मध्यस्थता कार्यवाही प्रारंभ की।
- हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता न्यायालय (PCA) द्वारा गठित न्यायाधिकरण ने जुलाई 2016 में अपना निर्णय सुनाया।
- प्रमुख निष्कर्ष: नाइन-डैश लाइन के अंदर चीन के ऐतिहासिक अधिकारों के दावों का UNCLOS के अंतर्गत कोई वैधानिक आधार नहीं है।
- दक्षिण चीन सागर के विवादित समुद्री भू-आकृतियाँ विस्तृत समुद्री क्षेत्रों का दावा उत्पन्न नहीं करतीं।
- यह निर्णय UNCLOS के अंतर्गत अंतिम एवं विधिक रूप से बाध्यकारी घोषित किया गया।
- चीन इस निर्णय को “शून्य एवं अमान्य” बताते हुए आज भी इसे स्वीकार नहीं करता तथा किसी तृतीय-पक्ष मध्यस्थता को मान्यता देने से मना करता है।
स्रोत: TH
पैरट बोर्नावायरस-4
पाठ्यक्रम: GS2/ स्वास्थ्य
संदर्भ
- भारत में प्रथम बार घातक पक्षी विषाणु पैरट बोर्नावायरस-4 (PaBV-4) की पहचान की गई है।
परिचय
- पैरट बोर्नावायरस-4 (PaBV-4) एक अत्यधिक संक्रामक विषाणु है, जो बंदी अवस्था में रखे जाने वाले सिटासीन (Psittacine) पक्षियों में प्रायः तीव्र मृत्यु का कारण बनता है।
- सिटासीन शब्द सिटासिडी (Psittacidae) एवं सिटासीफॉर्मीस (Psittaciformes) गण के पक्षियों के लिए प्रयुक्त होता है।
- इसमें बजरीगर (Budgerigar), कॉकाटील (Cockatiel), कॉकाटू (Cockatoo), लवबर्ड (Lovebird), मकॉ (Macaw) तथा पैराकीट (Parakeet) जैसे पक्षी सम्मिलित हैं।
- यह विषाणु मुख्यतः प्रोवेंट्रिकुलर डाइलेशन रोग (PDD) से संबंधित है, जो एक गंभीर तंत्रिका तंत्र एवं पाचन तंत्र संबंधी रोग है और पक्षियों की भोजन पचाने की क्षमता को प्रभावित करता है।
- संक्रमित पक्षियों में वजन घटना, भोजन का पुनः बाहर आना, समन्वय में कमी, कमजोरी तथा व्यवहार में परिवर्तन जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
- गंभीर स्थिति में यह संक्रमण घातक सिद्ध हो सकता है।
- यह जूनोटिक रोग नहीं माना जाता, अर्थात् यह स्वाभाविक रूप से पशुओं से मनुष्यों में संक्रमित नहीं होता।
स्रोत: TH
प्रत्यक्ष बीजित धान (DSR)
पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था
समाचार में
- हाल ही में छत्तीसगढ़ सरकार ने एल-नीनो के कारण वर्षा की अनिश्चितता को देखते हुए किसानों को पारंपरिक धान रोपाई पद्धति के स्थान पर प्रत्यक्ष बीजित धान (DSR) को प्राथमिकता देने संबंधी परामर्श जारी किया है।
प्रत्यक्ष बीजित धान
- प्रत्यक्ष बीजित धान (DSR) ऐसी कृषि पद्धति है, जिसमें धान के बीजों को नर्सरी तैयार किए बिना सीधे मुख्य खेत में बोया जाता है। इसे ‘तर-वत्तर’ तकनीक के नाम से भी जाना जाता है।
- इस पद्धति में अंकुरित बीजों को आर्द्र मृदा में प्रसारण विधि अथवा ड्रम सीडर के माध्यम से बोया जा सकता है।
- इसके अतिरिक्त, तैयार खेत में सूखे बीजों की बुवाई प्रसारण विधि अथवा सीड-कम-फर्टिलाइज़र ड्रिल द्वारा भी की जाती है।
प्रत्यक्ष बीजित धान (DSR) एवं पारंपरिक रोपाई पद्धति में अंतर
- पारंपरिक रोपाई पद्धति: इस पद्धति में धान के बीजों को पहले 25–35 दिनों तक नर्सरी में उगाया जाता है।
- इसके बाद पौधों को जल से भरे खेतों में प्रतिरोपित (Transplant) किया जाता है।
- यह पद्धति जल एवं श्रम-प्रधान होती है, किंतु सामान्यतः फसल के स्वास्थ्य एवं उत्पादन में सुधार करती है।
- प्रत्यक्ष बीजित धान (DSR): इस पद्धति में बीजों की सीधे मुख्य खेत में बुवाई की जाती है; न तो नर्सरी तैयार की जाती है और न ही पौधों का प्रतिरोपण किया जाता है।
- बीजों की बुवाई सामान्य रोपाई कार्यक्रम से 20–30 दिन पूर्व की जाती है।
- बुवाई से पहले खेतों की सिंचाई तथा लेज़र लेवलिंग की जाती है।
- बेहतर अंकुरण एवं रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए बीजों को कवकनाशी (Fungicide) से उपचारित कर लगभग 8 घंटे तक भिगोया जाता है तथा आधे दिन तक सुखाया जाता है।
- DSR में प्रथम सिंचाई बुवाई के 21 दिन बाद की जाती है तथा मृदा एवं वर्षा की स्थिति के अनुसार 7–10 दिन के अंतराल पर 14–17 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है।
- इसके विपरीत, पारंपरिक रोपाई पद्धति में 25–27 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है। इस प्रकार DSR जल उपयोग की दृष्टि से अत्यंत दक्ष तकनीक है।
प्रत्यक्ष बीजित धान (DSR) के लाभ
- यह पारंपरिक पद्धति की तुलना में 15–20 प्रतिशत तक जल की बचत करता है। (पारंपरिक पडलिंग पद्धति में एक किलोग्राम धान उत्पादन हेतु लगभग 3,600–4,125 लीटर जल की आवश्यकता होती है।)
- इसमें श्रम की आवश्यकता कम होती है तथा फसल 7–10 दिन पहले परिपक्व हो जाती है, जिससे किसानों को धान के अवशेष के प्रबंधन के लिए अतिरिक्त समय मिल जाता है।
- इससे उत्पादन लागत कम होती है।
- यह आगामी फसलों के लिए मृदा की भौतिक गुणवत्ता में सुधार करता है।
- इस तकनीक से मीथेन उत्सर्जन अपेक्षाकृत कम होता है।
प्रत्यक्ष बीजित धान (DSR) से संबंधित चुनौतियाँ
- खरपतवार DSR की सफलता में सबसे बड़ी बाधा हैं।
- DSR में खरपतवारों की समस्या पारंपरिक रोपाई पद्धति की तुलना में अधिक होती है, क्योंकि खरपतवार एवं धान के पौधे एक साथ अंकुरित होकर पोषक तत्वों, जल एवं प्रकाश के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं।
- यद्यपि प्रत्यक्ष बुवाई से मीथेन उत्सर्जन में कमी आती है, किंतु वायवीय (Aerobic) मृदा की परिस्थितियों में नाइट्रस ऑक्साइड का उत्सर्जन बढ़ सकता है।
- रेडॉक्स विभव बढ़ने पर नाइट्रस ऑक्साइड का निर्माण भी बढ़ जाता है।
- DSR में सूक्ष्म पोषक तत्वों , विशेषकर लौह की कमी एक गंभीर समस्या है, जिससे उत्पादन में गिरावट तथा किसानों को आर्थिक हानि हो सकती है।
स्रोत: TH
हीलियम के निर्यात पर चीन का अस्थायी प्रतिबंध
पाठ्यक्रम: GS3/ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
संदर्भ
- चीन के वाणिज्य मंत्रालय तथा सीमा शुल्क सामान्य प्रशासन ने देश से हीलियम के निर्यात पर अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया है।
हीलियम के बारे में
- हीलियम एक गंधहीन, रंगहीन, स्वादहीन, विषहीन तथा अत्यंत कम रासायनिक अभिक्रियाशील गैस है।
- यह वायु से हल्की होती है।
- सामान्य परिस्थितियों में हीलियम गैसीय अवस्था में रहती है, जबकि परम शून्य ताप के निकट यह द्रव बन जाती है।
- पृथ्वी पर हीलियम एक अक्षय (Non-Renewable) प्राकृतिक संसाधन है, जिसे मुख्यतः प्राकृतिक गैस भंडारों से प्राप्त किया जाता है।
- इसका निर्माण पृथ्वी के भीतर यूरेनियम एवं थोरियम के रेडियोधर्मी क्षय से होता है। इस प्रक्रिया में निकलने वाले अल्फा कण इलेक्ट्रॉनों को ग्रहण कर हीलियम परमाणुओं का निर्माण करते हैं।
- विश्व में हीलियम के प्रमुख उत्पादक देश हैं—
- संयुक्त राज्य अमेरिका (लगभग 43 प्रतिशत)
- कतर
- रूस
- कनाडा
- अल्जीरिया
हीलियम कैसे प्राप्त किया जाता है?
- हीलियम प्राकृतिक गैस के प्रसंस्करण के दौरान उप-उत्पाद के रूप में प्राप्त किया जाता है।
- इसका व्यावसायिक निष्कर्षण तभी लाभकारी होता है, जब प्राकृतिक गैस में हीलियम की सांद्रता 0.3 प्रतिशत या उससे अधिक हो।
- अत्यंत निम्न क्वथनांक (-269°C) के कारण इसे अन्य गैसों से पृथक किया जाता है।
- व्यावसायिक उपयोग हेतु हीलियम की शुद्धता सामान्यतः 99.997 प्रतिशत या उससे अधिक होनी चाहिए।
हीलियम के उपयोग
- द्रव हीलियम का उपयोग एमआरआई (MRI) मशीनों में शक्तिशाली चुंबकों को ठंडा रखने के लिए किया जाता है, जिनका उपयोग कैंसर एवं अन्य रोगों के निदान में किया जाता है।
- 80 प्रतिशत हीलियम एवं 20 प्रतिशत ऑक्सीजन का मिश्रण गहरे समुद्र में गोताखोरी के लिए प्रयुक्त होता है।
- हृदय शल्य-चिकित्सा के दौरान प्रयुक्त कार्डियो-पल्मोनरी पुनर्जीवन (CPR) पंपों में भी हीलियम का उपयोग किया जाता है।
- हीलियम का उपयोग अत्यंत महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेज़ों, जैसे संयुक्त राज्य अमेरिका की स्वतंत्रता घोषणा के संरक्षण में किया जाता है।
- यह अत्यंत सूक्ष्म रिसाव का पता लगाने के लिए प्रयुक्त होता है, क्योंकि अपनी निष्क्रिय प्रकृति के कारण यह अन्य गैसों के साथ अभिक्रिया नहीं करता।
- हीलियम-नियॉन लेज़र का उपयोग नेत्र शल्य-चिकित्सा में किया जाता है।
स्रोत: TH
लॉन्ग मार्च 10B रॉकेट
पाठ्यक्रम: GS3/ अंतरिक्ष
समाचार में
- चीन ने वेंचांग वाणिज्यिक अंतरिक्ष प्रक्षेपण केंद्र से अपने पहले पुनः प्रयोज्य रॉकेट का सफल प्रक्षेपण एवं अवतरण किया। चरण पृथक्करण के बाद रॉकेट के बूस्टर की समुद्र में सटीक पुनर्प्राप्ति भी सफलतापूर्वक की गई।
लॉन्ग मार्च 10B के बारे में
- लॉन्ग मार्च 10B , जिसे CZ-10B भी कहा जाता है, एक दो-चरणीय , मध्यम भार-वहन क्षमता वाला तथा आंशिक रूप से पुनः प्रयोज्य रॉकेट है।
- इसका विकास चाइना एकेडमी ऑफ लॉन्च व्हीकल टेक्नोलॉजी (CALT) द्वारा किया गया है।
- यह लॉन्ग मार्च 10A का एक वाणिज्यिक संस्करण है। लॉन्ग मार्च 10A का विकास चीन द्वारा मानवयुक्त चंद्र अभियानों के लिए किया जा रहा है, जबकि 10B संस्करण में तीसरे चरण तथा साइड बूस्टर को हटा दिया गया है।
- यह रॉकेट 63 मीटर लंबा है तथा प्रक्षेपण के समय इसका भार लगभग 7,60,000 किलोग्राम होता है।
- पुनः प्रयोज्य मोड में यह निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) में 16,000 किलोग्राम तक पेलोड ले जाने में सक्षम है।
- इसके बूस्टर चरण में द्रव ऑक्सीजन-केरोसीन पर आधारित सात इंजन लगे हैं, जबकि ऊपरी चरण में द्रव ऑक्सीजन-मीथेन इंजन का उपयोग किया गया है।
महत्व
- इस उपलब्धि के साथ चीन प्रणोदित अवतरण के माध्यम से कक्षीय श्रेणी के बूस्टर की सफल पुनर्प्राप्ति करने वाला विश्व का दूसरा देश बन गया है।
- इस प्रकार चीन स्पेसएक्स और ब्लू ओरिजिन के साथ पुनः प्रयोज्य रॉकेट विकसित करने वाले देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है तथा संयुक्त राज्य अमेरिका के बाहर ऐसा करने वाला प्रथम देश बन गया है।
- पुनः प्रयोज्य रॉकेट प्रक्षेपण लागत में उल्लेखनीय कमी लाते हैं, जिससे चीन को बड़े उपग्रह समूहों की तैनाती तथा पश्चिमी ब्रॉडबैंड नेटवर्क के साथ प्रतिस्पर्धा करने में सहायता मिलेगी।
स्रोत: TH
पोर्ट सुरक्षा ब्यूरो (BoPS)
पाठ्यक्रम: GS3/ आंतरिक सुरक्षा
संदर्भ
- हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री ने पोर्ट सुरक्षा ब्यूरो (BoPS) की स्थापना की प्रगति की समीक्षा की।
परिचय
- पोर्ट सुरक्षा ब्यूरो (BoPS) की स्थापना मर्चेंट शिपिंग अधिनियम, 2025 की धारा 13 के अंतर्गत एक वैधानिक निकाय के रूप में की जा रही है।
- इस ब्यूरो का नेतृत्व महानिदेशक करेंगे।
- यह पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय के अधीन कार्य करेगा।
- इसका गठन नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो (BCAS) के मॉडल पर किया जा रहा है।
- प्रमुख कार्य: यह जहाज़ों तथा बंदरगाह सुविधाओं की सुरक्षा का विनियमन एवं निरीक्षण करेगा।
- ब्यूरो सुरक्षा संबंधी सूचनाओं के समयबद्ध संग्रह, विश्लेषण एवं साझाकरण को सुनिश्चित करेगा, जिसमें साइबर सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
- बंदरगाहों की सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अवसंरचना को साइबर खतरों से सुरक्षित रखने के लिए एक समर्पित प्रभाग स्थापित किया जाएगा।
- केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) को बंदरगाह सुविधाओं के लिए मान्यता प्राप्त सुरक्षा संगठन (RSO) नामित किया गया है।
- CISF बंदरगाहों के लिए सुरक्षा मूल्यांकन करने तथा सुरक्षा योजनाएँ तैयार करने की जिम्मेदारी निभाएगा।
स्रोत: AIR
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संक्षिप्त समाचार 13-07-2026