पाठ्यक्रम : जीएस-3/सुरक्षा
सन्दर्भ
- यूक्रेन, लेबनान तथा पश्चिम एशिया के संघर्षों ने दिखाया है कि आधुनिक युद्ध में ड्रोन किस प्रकार केंद्रीय भूमिका निभाने लगे हैं।
ड्रोन युद्ध क्या है?
- ड्रोन युद्ध (Drone Warfare) से आशय ऐसे युद्ध से है जिसमें मानव रहित अथवा दूरस्थ रूप से नियंत्रित उपकरणों का उपयोग किया जाता है।
- ऐसे ड्रोन वायु, भूमि, समुद्र की सतह अथवा जल के भीतर कार्य करने में सक्षम होते हैं।
- कुछ ड्रोन मानव द्वारा नियंत्रित किए जाते हैं, जबकि अन्य अपने मिशन के दौरान स्वचालित पायलट (ऑटो-पायलट) प्रणालियों का उपयोग करते हैं।
- दूरस्थ रूप से संचालित विमान प्रणाली (RPAS): यह ड्रोन तथा उसके भू-आधारित नियंत्रण तंत्र सहित विभिन्न घटकों का समूह होता है।
- यूनाइटेड स्टेट्स, यूनाइटेड किंगडम, इज़राइल, चीन,भारत,रूस तथा तुर्किये ने युद्धक ड्रोन अथवा मानवरहित युद्धक हवाई वाहन (UCAV) विकसित किए हैं।
- इनका उपयोग लक्षित हमलों के लिए किया जाता है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहाँ पारंपरिक सेनाओं की पहुँच कठिन होती है।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता : ड्रोन के विकास का दूसरा चरण कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित ड्रोन हैं।
- एआई-संचालित ड्रोन स्वयं मार्ग-निर्धारण कर सकते हैं, लक्ष्यों की पहचान कर सकते हैं तथा “स्वार्म” (झुंड) के रूप में सामूहिक संचालन भी कर सकते हैं।
ड्रोन का हालिया उपयोग
- 21वीं शताब्दी के प्रारम्भिक वर्षों में अधिकांश ड्रोन हमले यूनाइटेड स्टेट्स की सेना द्वारा अफ़ग़ानिस्तान, पाकिस्तान, सीरिया, यमन तथा लीबिया जैसे देशों में भूमि-आधारित लक्ष्यों पर वायु-से-भूमि मिसाइलों के माध्यम से किए गए।
- बाद में ड्रोन युद्ध को रूस ,यूक्रेन, तुर्किये,अज़रबैजान तथा ईरान जैसे देशों के साथ-साथ हौती( Houthis) जैसे गैर-राज्यीय समूहों ने भी अपनाया।
- भारत ने भी हाल के अभियानों, जिनमें ऑपरेशन सिंदूर तथा पाकिस्तान के विरुद्ध जवाबी हमले शामिल हैं, में ड्रोन का उपयोग किया है।
यूसीएवी( UCAVs) का विकास
- 1960 के दशक में ब्रिटिश राष्ट्रमंडल की तोपखाना रेजिमेंटों ने लक्ष्य पहचान तथा मारक क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से ड्रोन विकसित करने प्रारम्भ किए।
- पिछले दो दशकों में यूनाइटेड स्टेट्स ने इराक,सीरिया, अफ़ग़ानिस्तान तथा यमन में आतंकवाद-रोधी अभियानों के लिए ड्रोन के व्यापक उपयोग की वैश्विक प्रवृत्ति स्थापित की। इससे सटीक हमले संभव हुए और सैनिकों के जोखिम में कमी आई।
- रूस-यूक्रेन युद्ध ड्रोन युद्ध के विकास में एक महत्वपूर्ण मोड़ सिद्ध हुआ।
- रूसी और यूक्रेनी सेनाओं ने वास्तविक समय की खुफिया जानकारी तथा प्रत्यक्ष हमलों के लिए छोटे ड्रोन का बड़े पैमाने पर उपयोग किया।
- वर्ष 2023 तक छोटे ड्रोन अनेक प्रकार के पेलोड ले जाने में सक्षम हो गए, जिनमें अवरक्त संवेदक (इन्फ्रारेड डिटेक्टर) से लेकर इलेक्ट्रॉनिक युद्ध उपकरण तक शामिल हैं।
युद्ध में ड्रोन के उपयोग का महत्त्व
- लक्षित हमले: ड्रोन सेनाओं को अत्यधिक सटीक हमले करने में सक्षम बनाते हैं, जिससे संपार्श्विक क्षति (Collateral Damage) न्यूनतम रहती है।
- सैन्य कर्मियों के लिए कम जोखिम: ड्रोन मानव रहित होते हैं, इसलिए पायलटों के जीवन को जोखिम नहीं होता तथा जमीनी सैनिकों की आवश्यकता भी कम हो जाती है।
- लागत-प्रभावशीलता: मानव-संचालित विमानों की तुलना में ड्रोन का निर्माण, संचालन और रखरखाव कम खर्चीला होता है।
- वास्तविक समय निगरानी एवं खुफिया जानकारी: ड्रोन निरंतर निगरानी, चित्रण तथा खुफिया जानकारी उपलब्ध कराते हैं, जो आक्रामक और रक्षात्मक दोनों प्रकार के अभियानों के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
- असममित युद्ध में सामरिक लाभ: ड्रोन विशेष रूप से गैर-राज्यीय तत्वों और आतंकवादी संगठनों के विरुद्ध प्रभावी होते हैं, जहाँ पारंपरिक सैन्य साधनों की पहुँच सीमित होती है।
भारत की संस्थागत एवं सामरिक प्रतिक्रिया
- एकीकृत ड्रोन पहचान एवं अवरोधन प्रणाली (IDD&IS): इसे डिफेंस रिसर्च एण्ड डेवेलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन तथा भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड द्वारा विकसित किया गया है। यह एक व्यापक प्रति-ड्रोन (Counter-Drone) समाधान प्रदान करती है।
- यह 5–8 किलोमीटर की दूरी तक ड्रोन का पता लगाने, 2–5 किलोमीटर की सीमा में संचार संकेतों को बाधित (जैम) करने तथा निकट दूरी पर लेज़र-आधारित निर्देशित ऊर्जा हथियारों के माध्यम से खतरों को निष्क्रिय करने में सक्षम है।
- “भार्गवास्त्र” एंटी-स्वार्म प्रणाली: इसे सोलर डिफेंस एण्ड एयरोस्पेस लिमिटेड द्वारा विकसित किया गया है। यह एक कम लागत वाली स्वदेशी प्रति-ड्रोन प्रणाली है, जो “हार्ड-किल” मोड में सूक्ष्म रॉकेटों का उपयोग करके ड्रोन के झुंड (स्वार्म) को नष्ट करती है।
- भारतीय सेना की पहल: भारतीय सेना ने अपनी रक्षात्मक तथा आक्रामक दोनों क्षमताओं को सुदृढ़ करने के लिए निगरानी (सर्विलांस) ड्रोन तथा कामिकेज ड्रोन की बड़े पैमाने पर खरीद की प्रक्रिया प्रारम्भ की है।

आगे की राह
- आधुनिक युद्ध की आवश्यकताएँ प्लेटफ़ॉर्म-केंद्रित दृष्टिकोण से आगे बढ़कर क्षमता-आधारित एवं प्रौद्योगिकी-संचालित सैन्य नियोजन की मांग करती हैं। भारत को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उपयोग, साइबर लचीलेपन, अंतरिक्ष सुरक्षा तथा संयुक्त सैन्य सुधारों (Jointness Reforms) को तेज़ी से आगे बढ़ाना होगा।
- विश्वसनीय प्रतिरोधक क्षमता (Credible Deterrence) बनाए रखने के लिए मानव संसाधन विकास, रक्षा नवाचार तथा सामरिक साझेदारियों में निरंतर निवेश अत्यंत महत्वपूर्ण होगा।
- तीव्र गति से बदलती वैश्विक व्यवस्था में भारत की संप्रभुता, स्थिरता तथा सामरिक स्वायत्तता की रक्षा के लिए युद्ध की बदलती प्रकृति के अनुरूप स्वयं को ढालना अनिवार्य है।
Source: TH
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