पाठ्यक्रम: GS2/अंतर्राष्ट्रीय संबंध
संदर्भ
- भारत के उपराष्ट्रपति ने श्रीलंका की अपनी यात्रा के दौरान द्विपक्षीय सहयोग, आर्थिक सहायता तथा मछुआरों के मुद्दे पर चर्चा के साथ-साथ प्रवासी भारतीय नागरिक (OCI) कार्ड से संबंधित एक नीतिगत परिवर्तन की घोषणा की।
श्रीलंका यात्रा के प्रमुख बिंदु
- OCI विस्तार एवं प्रवासी सहभागिता: भारतीय मूल के तमिलों के लिए पात्रता को छठी पीढ़ी तक विस्तारित किया गया।
- ‘सेतु’ के रूप में प्रवासी समुदाय: यह प्रवासी कूटनीति और सांस्कृतिक संबंधों को सुदृढ़ करता है तथा भारत में शिक्षा, रोजगार एवं आवागमन के अवसरों तक पहुँच को बढ़ाता है।
- कल्याण एवं सामाजिक-आर्थिक पहल: सीलोन एस्टेट वर्कर्स एजुकेशन ट्रस्ट के अंतर्गत सहायता में वृद्धि, जिसका उद्देश्य भारतीय मूल के तमिलों की सामाजिक गतिशीलता को बढ़ाना है;
- भारतीय आवास परियोजना के तृतीय चरण के अंतर्गत 145 घरों का हस्तांतरण।
- विकास सहयोग एवं समझौता ज्ञापन (MoUs): चक्रवात ‘दितवा’ के पश्चात सहायता कार्यक्रम के अंतर्गत परियोजनाएँ; तथा मुल्लैतिवु अस्पताल सहित चिकित्सा अवसंरचना का निर्माण।
- भारत एक ‘प्रथम प्रत्युत्तरकर्ता’ एवं विकास साझेदार के रूप में उभरा; श्रीलंका के पूर्वी प्रांत में अपनी उपस्थिति को सुदृढ़ किया।
- ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति पर बल: श्रीलंका ने 2022 के आर्थिक संकट तथा आपदा राहत में भारत की भूमिका को स्वीकार किया।
- यह हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में भारत की ‘नेट सुरक्षा प्रदाता’ की भूमिका को सुदृढ़ करता है।
भारत–श्रीलंका संबंध
- ऐतिहासिक विकास:
- प्राचीन एवं मध्यकालीन काल: साझा बौद्ध विरासत (अशोक के श्रीलंका में मिशन); सुदृढ़ सांस्कृतिक, भाषाई एवं व्यापारिक संबंध।
- औपनिवेशिक एवं स्वतंत्रता-उपरांत काल: ब्रिटिश शासन के दौरान भारतीय मूल के तमिलों का प्रवासन; नागरिकता संबंधी मुद्दों के समाधान हेतु सिरिमा–शास्त्री समझौता (1964)।
- 1980 के बाद का काल: श्रीलंका में जातीय संघर्ष एवं भारत की भागीदारी—
- भारत–श्रीलंका समझौता (1987)
- भारतीय शांति सेना (IPKF) की तैनाती
- 21वीं सदी: आर्थिक सहयोग, संपर्कता और विकास साझेदारी की ओर झुकाव;
- हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ता सामरिक महत्व।
वर्तमान स्थिति
- राजनीतिक संबंध: उच्च-स्तरीय यात्राएँ एवं संस्थागत संवाद।
- आर्थिक संबंध: द्विपक्षीय व्यापार लगभग 5.5 अरब अमेरिकी डॉलर (2023–24); भारत, श्रीलंका के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों एवं निवेशकों में शामिल।
- विकास सहयोग: भारत द्वारा 7 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक की सहायता (ऋण रेखाएँ एवं अनुदान)।
- संपर्कता: फेरी सेवाएँ, हवाई संपर्क, डिजिटल भुगतान (UPI), ऊर्जा संपर्क।
सहयोग के प्रमुख क्षेत्र एवं साझा हित
- आर्थिक एवं व्यापारिक सहयोग: भारत–श्रीलंका मुक्त व्यापार समझौता (ISFTA) 2000 से लागू;
- आर्थिक एवं प्रौद्योगिकी सहयोग समझौता (ETCA) पर वार्ता जारी।
- विकास साझेदारी: तमिलों हेतु 60,000 आवास, रेलवे, अस्पताल, नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएँ—जन-केंद्रित विकास पर बल।
- संपर्कता: समुद्री, हवाई, डिजिटल एवं ऊर्जा संपर्क; प्रस्तावित विद्युत ग्रिड संयोजन एवं बहु-उत्पाद पाइपलाइन।
- रक्षा एवं सुरक्षा: संयुक्त सैन्य अभ्यास—SLINEX (नौसेना) एवं मित्र शक्ति (थल सेना);
- समुद्री सुरक्षा एवं आतंकवाद-निरोध में सहयोग;
- कोलंबो सुरक्षा सम्मेलन एक क्षेत्रीय मंच के रूप में।
- सांस्कृतिक एवं शैक्षिक संबंध: बौद्ध संबंध एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान; छात्रवृत्तियाँ, प्रशिक्षण (ITEC) एवं क्षमता निर्माण।
- समुद्री एवं क्षेत्रीय हित: हिंद महासागर में सुरक्षा, नौवहन की स्वतंत्रता एवं आपदा प्रतिक्रिया में साझा हित।
संबंधित चिंताएँ एवं मुद्दे
- मछुआरा विवाद: पाक जलडमरूमध्य सीमा मुद्दों के कारण बार-बार गिरफ्तारी; पारिस्थितिक चिंताएँ (बॉटम ट्रॉलिंग)।
- तमिल मुद्दा: राजनीतिक समन्वय एवं 13वें संशोधन का क्रियान्वयन संवेदनशील विषय।
- सामरिक चिंताएँ: श्रीलंका में चीन की बढ़ती उपस्थिति (जैसे—हंबनटोटा बंदरगाह); IOR में सामरिक प्रतिस्पर्धा।
- आर्थिक कमजोरियाँ: श्रीलंका का ऋण संकट द्विपक्षीय स्थिरता को प्रभावित करता है।
- व्यापार असंतुलन: भारत का व्यापार अधिशेष, जिससे श्रीलंका में चिंता।
आगे की राह
- आर्थिक एकीकरण को सुदृढ़ करना: ETCA का शीघ्र निष्कर्ष; अवसंरचना एवं ऊर्जा में निवेश को बढ़ावा।
- मछुआरा मुद्दे का समाधान: गहरे समुद्र में मछली पकड़ने की ओर संक्रमण; संस्थागत द्विपक्षीय तंत्र।
- संपर्कता को सुदृढ़ करना: ऊर्जा ग्रिड, समुद्री एवं स्थलीय संपर्क परियोजनाओं का तीव्रीकरण।
- सामरिक सहयोग: समुद्री सुरक्षा सहयोग का विस्तार; कोलंबो सुरक्षा सम्मेलन को सुदृढ़ करना।
- तमिल मुद्दों का समाधान: समावेशी राजनीतिक समन्वय का समर्थन; तमिल-बहुल क्षेत्रों में विकास परियोजनाएँ जारी रखना।
- बाहरी प्रभाव का संतुलन: विश्वास-आधारित साझेदारी का निर्माण; बाहरी निवेश के सतत विकल्प प्रस्तुत करना।
निष्कर्ष
- भारत के उपराष्ट्रपति की हालिया यात्रा भारत–श्रीलंका संबंधों में बहुआयामी सहभागिता को रेखांकित करती है, जिसमें प्रवासी संपर्क, आर्थिक सहायता और सामरिक कूटनीति का समन्वय सम्मिलित है।
- OCI का विस्तार जन-से-जन संबंधों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जबकि मत्स्य संबंधी मुद्दों जैसे स्थायी प्रश्नों के समाधान हेतु संतुलित एवं मानवीय दृष्टिकोण आवश्यक है।
प्रवासी भारतीय नागरिक (OCI) कार्ड
- यह भारतीय मूल के विदेशी नागरिकों को प्रदान किया जाने वाला स्थायी निवास का एक स्वरूप है।
- इसे नागरिकता अधिनियम, 1955 में 2005 के संशोधन के माध्यम से भारत की प्रवासी नीति के अंतर्गत प्रारंभ किया गया।
- 2015 में इसे ‘भारतीय मूल का व्यक्ति (PIO)’ योजना के साथ विलय कर दिया गया।
पात्रता मानदंड
- कोई विदेशी नागरिक पात्र है यदि वह:
- 26 जनवरी 1950 को या उसके पश्चात भारत का नागरिक रहा हो, या
- ऐसे क्षेत्र से संबंधित हो जो स्वतंत्रता के पश्चात भारत का भाग बना, या
- ऐसे व्यक्तियों के संतान/पोते/परपोते हों।
- अपात्र: पाकिस्तान एवं बांग्लादेश (या अन्य अधिसूचित देशों) के नागरिक।
मुख्य विशेषताएँ
- भारत आने हेतु आजीवन वीज़ा।
- बहु-प्रवेश एवं बहुउद्देश्यीय यात्रा की अनुमति, बिना किसी प्रतिबंध के।
- विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (FRRO) में पंजीकरण से छूट।
- शिक्षा, आर्थिक एवं वित्तीय क्षेत्रों में अनिवासी भारतीयों (NRIs) के समानता।
- OCI कार्डधारक आवासीय एवं वाणिज्यिक संपत्ति खरीद सकते हैं; कृषि भूमि एवं बागान संपत्ति खरीदने की अनुमति नहीं।
- OCI धारकों को मतदान का अधिकार, संवैधानिक/सार्वजनिक पद धारण करने का अधिकार, सरकारी सेवाओं में रोजगार तथा राजनीतिक अधिकार प्राप्त नहीं होते।
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