- केंद्रीय बजट 2026-27 में भारत के तटीय, पूर्वोत्तर और हिमालयी क्षेत्रों में उच्च-मूल्य फसलों की ओर विविधीकरण को तीव्र करने हेतु फसल-विशिष्ट एवं क्षेत्रीय रूप से भिन्न रणनीति प्रस्तुत की गई।
- उच्च-मूल्य वाली फसलें मुख्यतः बागवानी उत्पाद हैं जैसे फल, सब्ज़ियाँ, फूल, मसाले, औषधीय एवं सुगंधित पौधे। ये पारंपरिक अनाजों (जैसे गेहूँ और धान) की तुलना में प्रति इकाई भूमि पर कहीं अधिक शुद्ध लाभ प्रदान करती हैं।
- कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों के अंतर्गत फसल उप-क्षेत्र में सकल मूल्य उत्पादन (GVO) का लगभग 37% हिस्सा बागवानी क्षेत्र का है। Read More
भारत में उच्च-मूल्य वाली फसलों का विविधीकरण
संदर्भ
उच्च-मूल्य वाली फसलें (HVCs) क्या हैं?