पाठ्यक्रम: GS3/ कृषि
संदर्भ
केंद्रीय बजट 2026-27 में भारत के तटीय, पूर्वोत्तर और हिमालयी क्षेत्रों में उच्च-मूल्य फसलों की ओर विविधीकरण को तीव्र करने हेतु फसल-विशिष्ट एवं क्षेत्रीय रूप से भिन्न रणनीति प्रस्तुत की गई।
उच्च-मूल्य वाली फसलें (HVCs) क्या हैं?
- उच्च-मूल्य वाली फसलें मुख्यतः बागवानी उत्पाद हैं जैसे फल, सब्ज़ियाँ, फूल, मसाले, औषधीय एवं सुगंधित पौधे। ये पारंपरिक अनाजों (जैसे गेहूँ और धान) की तुलना में प्रति इकाई भूमि पर कहीं अधिक शुद्ध लाभ प्रदान करती हैं।
भारत में कृषि वृद्धि के प्रेरक के रूप में बागवानी
- कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों के अंतर्गत फसल उप-क्षेत्र में सकल मूल्य उत्पादन (GVO) का लगभग 37% हिस्सा बागवानी क्षेत्र का है।

- भारत सब्ज़ियों, फलों और आलू के उत्पादन में विश्व में दूसरे स्थान पर है।
- वैश्विक उत्पादन में फलों का योगदान 9.18% और सब्ज़ियों का 8.18% है।
- भारत प्याज़ और शलोट (सूखे, निर्जलित को छोड़कर) का विश्व का सबसे बड़ा उत्पादक है, जो वैश्विक उत्पादन का लगभग 22.42% योगदान करता है।
उच्च-मूल्य वाली फसलों के विकास हेतु क्षेत्रीय रणनीतियाँ
- तटीय क्षेत्र (नारियल, काजू, कोको, चंदन)
- नारियल: भारत विश्व में दूसरे स्थान पर, 22.44% वैश्विक उत्पादन; 3 करोड़ लोगों को आजीविका, जिनमें 1 करोड़ किसान शामिल।

- नारियल विकास बोर्ड 22 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में सक्रिय।
- काजू: 16वीं शताब्दी में भारत में परिचय; बंजर एवं क्षीण भूमि पर सफल।

- उड़ीसा, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल, पश्चिम बंगाल एवं पूर्वोत्तर राज्यों में व्यापक खेती।
- कोको: नारियल एवं सुपारी के नीचे अंतरफसल के रूप में, 40–50% सूर्य प्रकाश का उपयोग।

- बजट लक्ष्य: 2030 तक भारतीय कोको को वैश्विक प्रीमियम ब्रांड बनाना।
- चंदन (सैंटलम एल्बम): सांस्कृतिक एवं आर्थिक दृष्टि से अत्यंत मूल्यवान वृक्ष।
- भारत के 90% संसाधन कर्नाटक एवं तमिलनाडु में केंद्रित।
- पहाड़ी एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र (अगरवुड, अखरोट, बादाम, चिलगोज़ा)
- अगरवुड: भारत में 15 करोड़ वृक्ष (जनवरी 2026 तक); 90% पूर्वोत्तर में, विशेषकर त्रिपुरा एवं असम।
- अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर “औड” के नाम से प्रसिद्ध; औषधि, धार्मिक अनुष्ठान एवं लक्ज़री इत्र में उपयोग।
- केवल त्रिपुरा का बाजार ₹2,000 करोड़ वार्षिक क्षमता रखता है।
- निर्यात CITES (कन्वेंशन ऑन इंटरनेशनल ट्रेड इन एन्डेंजर्ड स्पीशीज़) के अंतर्गत विनियमित।
- अखरोट, बादाम, चिलगोज़ा:
- ठंडे जलवायु एवं विशिष्ट कृषि-पर्यावरणीय परिस्थितियों में उपयुक्त।
- अखरोट भारत का सबसे महत्वपूर्ण समशीतोष्ण मेवा; मुख्यतः जम्मू-कश्मीर में उत्पादन।
- उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, लद्दाख, अरुणाचल प्रदेश एवं मणिपुर में सीमित योगदान।
- चिलगोज़ा पाइन उत्तर-पश्चिमी हिमालय की शुष्क घाटियों में उगता है।
- अगरवुड: भारत में 15 करोड़ वृक्ष (जनवरी 2026 तक); 90% पूर्वोत्तर में, विशेषकर त्रिपुरा एवं असम।

फसल विविधीकरण के लाभ
- आर्थिक लाभ:
- किसानों की आय में वृद्धि: HVCs प्रति इकाई भूमि पर 3–4 गुना लाभ देते हैं।
- निर्यात राजस्व: नारियल (USD 513 मिलियन), काजू (USD 369 मिलियन), कोको (USD 295 मिलियन)।
- आदिवासी एवं ग्रामीण आजीविका: अगरवुड, चिलगोज़ा एवं मेवा फसलें हाशिए पर स्थित क्षेत्रों में आय का स्रोत।
- संरचनात्मक लाभ:
- एकल फसल निर्भरता में कमी: धान-गेहूँ बेल्ट से विविधीकरण मूल्य आघातों एवं खरीद विफलताओं से बचाता है।
- कृषि-प्रसंस्करण संबंध: नारियल तेल मिलें, काजू प्रसंस्करण इकाइयाँ, कोको चॉकलेट फैक्ट्रियाँ रोजगार सृजन करती हैं।
- अंतरफसल दक्षता: नारियल के नीचे कोको से अतिरिक्त भूमि बिना आय वृद्धि।
- पर्यावरणीय लाभ:
- काजू: बंजर भूमि को उत्पादक बनाकर मृदा अपरदन घटाता एवं वनीकरण को बढ़ावा देता है।
- अगरवुड: वनों में एकीकृत खेती जैव विविधता संरक्षण के साथ आय उत्पन्न करती है।
- भू-राजनीतिक एवं रणनीतिक लाभ:
- पूर्वोत्तर एकीकरण: अगरवुड विकास से जनजातीय अर्थव्यवस्था वैश्विक लक्ज़री बाजार से जुड़ती है।
- निर्यात ब्रांड निर्माण: भारतीय काजू, कोको, चंदन को प्रीमियम ब्रांड बनाना।
- 5F दृष्टि संरेखण: फार्म → फाइबर → फैक्ट्री → फैशन → विदेशी— HVCs इस ढाँचे को सबसे प्रत्यक्ष रूप से लागू करते हैं।
चुनौतियाँ

आगे की राह
- शीत श्रृंखला विस्तार एवं सार्वजनिक-निजी भागीदारी: विशेषकर पूर्वोत्तर एवं हिमालयी उत्पादों हेतु।
- किसान उत्पादक संगठन (FPO) आधारित एकत्रीकरण: नारियल एवं काजू क्षेत्रों में विखंडन दूर करने हेतु।
- “गाँव से वैश्विक” मूल्य श्रृंखला: ग्रामीण युवाओं को मूल्यवर्धित प्रसंस्करण में जोड़ना।
- भू-स्थानिक मानचित्रण: वास्तविक समय उपज निगरानी एवं सतत कटाई योजना।
- ब्रांड इंडिया निर्माण: 2030 तक भारतीय काजू, कोको एवं चंदन को वैश्विक प्रीमियम ब्रांड के रूप में स्थापित करना।
स्रोत: PIB
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संक्षिप्त समाचार 18-04-2026