प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास एवं भारत का अधिगम संकट

संदर्भ

  • वैश्विक स्तर पर बुनियादी अधिगम (Foundational Learning) में एक गंभीर संकट उभर रहा है। विश्व बैंक के अनुसार, निम्न और मध्यम आय वाले देशों (LMICs) में लगभग 70% बच्चे 10 वर्ष की आयु तक सरल पाठ नहीं पढ़ सकते। यह विद्यालयी कमी और प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास में गहरे प्रणालीगत विफलताओं को दर्शाता है।

प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास के बारे में

  • यह गर्भाधान से लेकर लगभग 6 वर्ष की आयु तक बच्चे के समग्र विकास को संदर्भित करता है, जिसमें शामिल हैं:
    • शारीरिक विकास (स्वास्थ्य, पोषण)
    • संज्ञानात्मक विकास (सोच, सीखना, भाषा)
    • भावनात्मक और सामाजिक विकास
    • व्यवहारिक और मोटर कौशल
  • यह जीवविज्ञान (मस्तिष्क विकास) और बच्चे के परिवेश (परिवार, समुदाय, सेवाएँ) के बीच अंतःक्रिया से आकार लेता है।

प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास का वैज्ञानिक आधार

  • मस्तिष्क का विकास पहले पाँच वर्षों में सबसे तीव्र होता है, जिसमें अधिगम हेतु महत्वपूर्ण न्यूरल कनेक्शन बनते हैं।
  • विकास संचयी और क्रमिक होता है, और प्रारंभिक कमी को बाद में सुधारना कठिन होता है।
  • विश्व स्तर पर लगभग 25 करोड़ बच्चे खराब प्रारंभिक परिस्थितियों के कारण विकासात्मक क्षमता तक नहीं पहुँच पाने के जोखिम में हैं।

प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास की आवश्यकता क्यों है?

  • शिक्षा की नींव: प्रारंभिक कौशल साक्षरता, गणनात्मक क्षमता और विद्यालयी तैयारी को निर्धारित करते हैं।
    • खराब प्रारंभिक विकास अधिगम गरीबी की ओर ले जाता है।
  • मानव पूंजी निर्माण: यह उत्पादकता, रोजगार क्षमता और आर्थिक वृद्धि पर सीधा प्रभाव डालता है। प्रारंभिक निवेश जीवनचक्र में सर्वोच्च प्रतिफल देता है।
  • स्वास्थ्य और पोषण परिणाम: प्रारंभिक पोषण अवरुद्ध वृद्धि और संज्ञानात्मक हानि को रोकता है। यह रोग एवं मृत्यु दर को कम करता है।
  • समानता और सामाजिक न्याय: गरीबी, लैंगिक अंतर और क्षेत्रीय असमानताओं को कम करता है। यह समावेशी विकास सुनिश्चित करता है।
  • दीर्घकालिक जोखिमों की रोकथाम: प्रारंभिक देखभाल की कमी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं, कम शैक्षिक उपलब्धि, अपराध और बेरोजगारी को बढ़ाती है।

प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास हेतु वैश्विक ढाँचा

  • WHO–UNICEF–विश्व बैंक का नर्चरिंग केयर फ्रेमवर्क पाँच आवश्यकताओं को रेखांकित करता है:
    • अच्छा स्वास्थ्य
    • पर्याप्त पोषण
    • उत्तरदायी देखभाल
    • सुरक्षा और संरक्षा
    • प्रारंभिक अधिगम अवसर
  • इनका एकीकृत रूप से क्रियान्वयन आवश्यक है, न कि अलग-अलग।

भारत की नीतिगत पहल: प्रारंभिक प्रणालियों को सुदृढ़ करना

  • भारत प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास को शासन की प्राथमिकता के रूप में तीव्रता से मान्यता दे रहा है:
    • आंगनवाड़ी केंद्र (ICDS): इन्हें प्रारंभिक अधिगम केंद्रों के रूप में पुनर्स्थापित किया जा रहा है।
    • ECCE किट्स (जैसे उत्तर प्रदेश): खेल-आधारित अधिगम को अग्रिम पंक्ति प्रणालियों में एकीकृत करने का प्रयास।
    • NEP 2020: बुनियादी साक्षरता और गणनात्मक क्षमता को प्राथमिकता देता है।
  • प्रारंभिक विकास को अग्रिम पंक्ति वितरण प्रणालियों में एकीकृत करने से पहुँच और प्रभावशीलता दोनों में सुधार होता है।

भारत के प्रमुख प्रयास

  • एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS), 1975: विश्व का सबसे बड़ा ECD कार्यक्रम, ~13.7 लाख आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से। इसमें पूरक पोषण, टीकाकरण, स्वास्थ्य जाँच, रेफरल सेवाएँ और पूर्व-विद्यालय शिक्षा शामिल है।
  • आंगनवाड़ी प्रणाली: सामुदायिक-आधारित केंद्र जो अंतिम स्तर तक सेवा पहुँचाते हैं। हालिया सुधारों में ‘सक्षम आंगनवाड़ी’, POSHAN ट्रैकर द्वारा डिजिटलीकरण और अवसंरचना सुदृढ़ीकरण शामिल हैं।
  • POSHAN अभियान, 2018: अवरुद्ध वृद्धि, कुपोषण और एनीमिया को कम करने तथा मंत्रालयों के बीच अभिसरण को बढ़ावा देने हेतु।
  • सक्षम आंगनवाड़ी एवं POSHAN 2.0: आंगनवाड़ी सेवाओं को सुदृढ़ करना और प्रारंभिक शिक्षा व पोषण वितरण पर ध्यान केंद्रित करना।
  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020: प्रारंभिक देखभाल और शिक्षा को आधारभूत चरण (3–8 वर्ष) के रूप में मान्यता देती है।
  • स्वास्थ्य क्षेत्र की पहलें: जननी सुरक्षा योजना (JSY), प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY), राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK)।

केस स्टडी: मेघालय का प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास मॉडल

  • पहले मेघालय में उच्च मातृ मृत्यु दर, व्यापक एनीमिया, कम संस्थागत प्रसव, कमजोर प्रसवपूर्व देखभाल, भौगोलिक अलगाव और गरीबी थी।
    • लगभग 20% जनसंख्या छह वर्ष से कम आयु की होने के कारण प्रारंभिक देखभाल विकास का केंद्र बनी।
  • प्रमुख हस्तक्षेप: GMCD टूल
    • 1–42 माह आयु के बच्चों पर केंद्रित।
    • कठोर परीक्षण के बजाय संवादात्मक मूल्यांकन।
    • देखभालकर्ताओं की सहभागिता।
  • अग्रिम पंक्ति कार्यकर्ताओं द्वारा उपयोग: आशा, एएनएम, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता।
    • शासन नवाचार: विकेंद्रीकृत, समुदाय-नेतृत्व दृष्टिकोण
    • विकेंद्रीकरण: अग्रिम पंक्ति कार्यकर्ताओं को सशक्त करना।
    • सामुदायिक भागीदारी: ग्राम स्वास्थ्य परिषदें, स्वयं सहायता समूह।
    • अभिसरण: स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा प्रणालियों का एकीकरण।
  • मेघालय मॉडल क्यों सफल है
    • साक्ष्य-आधारित नीति: न्यूरोसाइंस और विकास विज्ञान का एकीकरण।
    • प्रणाली अभिसरण: स्वास्थ्य, पोषण और प्रारंभिक अधिगम का संरेखण।
    • विकेंद्रीकृत शासन: संदर्भ-विशिष्ट, विस्तार योग्य समाधान।

निष्कर्ष

  • साक्षरता संकट यह स्पष्ट करता है कि अधिगम विद्यालयी शिक्षा से बहुत पहले प्रारंभ होता है।
  • मेघालय का प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास मॉडल यह प्रदर्शित करता है कि एकीकृत शासन, वैज्ञानिक प्रमाण और सामुदायिक सहभागिता किस प्रकार प्रारंभिक बाल्यावस्था परिणामों को रूपांतरित कर सकते हैं।
  • ऐसे मॉडलों का विस्तार समानता, उत्पादकता और सतत विकास प्राप्त करने के लिए अत्यावश्यक है।
दैनिक मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न
[प्रश्न] भारत में प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास को सुदृढ़ करने की आवश्यकता का परीक्षण कीजिए, तथा शासन और प्रारंभिक हस्तक्षेपों की भूमिका को रेखांकित कीजिए।

स्रोत: IE

 

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