पाठ्यक्रम: GS3/पर्यावरण
संदर्भ
- नेचर पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, वर्ष 2014 से 2022 के बीच रात में कृत्रिम प्रकाश ( ALAN) वैश्विक स्तर पर 16% बढ़ा है।
- सबसे तीव्र वृद्धि उप-सहारा अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया में देखी गई है, जिसमें भारत एवं चीन एशिया के प्रमुख योगदानकर्ता रहे हैं।
प्रकाश प्रदूषण क्या है?
- प्रकाश प्रदूषण मानव-निर्मित बाहरी प्रकाश स्तरों में वह परिवर्तन है जो प्राकृतिक रूप से नहीं होता।
- व्यावहारिक रूप से, यह अवांछित, अनुचित या अत्यधिक कृत्रिम प्रकाश को संदर्भित करता है, जिसका मुख्य कारण रात में कृत्रिम प्रकाश (ALAN) है।
- अनुमान है कि विश्व की 80% से अधिक जनसंख्या प्रकाश-प्रदूषित आकाश के नीचे रहती है।
- पृथ्वी के लगभग 23% भू-भाग पर स्काईग्लो का प्रभाव है।
कारण
- तीव्र शहरीकरण: वर्तमान में लगभग 55% वैश्विक जनसंख्या शहरी क्षेत्रों में रहती है, जो 2050 तक 68% तक पहुँचने की संभावना है। इससे बाहरी प्रकाश की माँग बढ़ रही है।
- अनियंत्रित बाहरी प्रकाश: असुरक्षित स्ट्रीट लाइट, होर्डिंग्स और भवनों की रोशनी से 30–50% प्रकाश ऊपर या किनारे की ओर व्यर्थ जाता है, जिससे स्काईग्लो बढ़ता है।
- वाहनों से उत्पन्न प्रकाश प्रदूषण: वाहनों की संख्या में वृद्धि से हेडलाइट्स की चमक और सड़क प्रकाश बढ़ता है। भारत में 30 करोड़ से अधिक पंजीकृत वाहन हैं, जो शहरी रात की चमक में योगदान करते हैं।
- शिफ्ट आधारित कार्य: आईटी, स्वास्थ्य, परिवहन और विनिर्माण जैसे 24×7 क्षेत्रों के विस्तार से निरंतर प्रकाश की माँग बढ़ रही है।
प्रभाव
- मानव स्वास्थ्य: रात में कृत्रिम प्रकाश के संपर्क से मेलाटोनिन उत्पादन दब जाता है, जिससे अनिद्रा और अन्य स्वास्थ्य समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।
- दीर्घकालिक संपर्क तनाव और संज्ञानात्मक क्षमता में कमी से जुड़ा है।
- पर्यावरण और पारिस्थितिकी: निशाचर जीव, प्रवासी पक्षी और कीट प्राकृतिक प्रकाश चक्र पर निर्भर होते हैं। कृत्रिम प्रकाश उनके प्रवास, भोजन एवं प्रजनन पैटर्न को बाधित करता है। जुगनुओं जैसी प्रजातियों में संचार प्रभावित होता है।
- खगोल विज्ञान और अनुसंधान: रात का आकाश उज्ज्वल होने से खगोलीय अवलोकन कठिन हो जाता है, विशेषकर शहरी क्षेत्रों के पास।
- ऊर्जा अपव्यय: गलत दिशा में रोशनी से प्रत्येक वर्ष अरबों यूनिट विद्युत व्यर्थ होती है, जिससे कार्बन उत्सर्जन बढ़ता है।
प्रकाश प्रदूषण रोकने हेतु सरकारी पहल
- ऊर्जा संरक्षण भवन संहिता (2017): भारत की ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE) द्वारा नई वाणिज्यिक इमारतों में ऊर्जा खपत 25–50% तक घटाने हेतु मानक।
- राष्ट्रीय स्ट्रीट लाइटिंग कार्यक्रम (2015): पारंपरिक स्ट्रीट लाइटों को स्मार्ट और ऊर्जा-कुशल LED लाइटों से बदलने की पहल।
- स्मार्ट सिटी मिशन: वास्तविक समय यातायात और समय की स्थिति के आधार पर स्ट्रीट लाइट की तीव्रता को समायोजित कर ऊर्जा खपत और प्रकाश प्रदूषण कम करना।
- पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986: केंद्र सरकार को सभी प्रकार के प्रदूषण को नियंत्रित करने का अधिकार देता है। यद्यपि प्रकाश प्रदूषण स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं है, इसे पर्यावरणीय व्यवधान के रूप में नियंत्रित किया जा सकता है।
निष्कर्ष
- प्रकाश प्रदूषण एक उभरती हुई पर्यावरणीय चुनौती है, जो तीव्र शहरीकरण और अनियंत्रित कृत्रिम प्रकाश से प्रेरित है।
- ALAN को औपचारिक रूप से एक पर्यावरणीय प्रदूषक के रूप में मान्यता देने की आवश्यकता है।
- प्रकाश प्रदूषण मानकों को शहरी नियोजन, पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) और जैव विविधता संरक्षण ढाँचों में शामिल करना चाहिए।
- विकास और पारिस्थितिक संरक्षण के बीच संतुलित दृष्टिकोण आवश्यक है, ताकि रात का आकाश साझा प्राकृतिक धरोहर बना रहे तथा मानव स्वास्थ्य व जैव विविधता सुरक्षित रह सके।
स्रोत: TOI
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संक्षिप्त समाचार 13-04-2026