पाठ्यक्रम: GS3/ अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- जनवरी 2026 में भारत के डिजिटल भुगतान तंत्र ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया, जब 21.70 अरब लेन-देन दर्ज किए गए जिनका मूल्य ₹28.33 लाख करोड़ रहा। यह अब तक का सबसे उच्चतम स्तर है।
पृष्ठभूमि
- प्रारंभिक डिजिटल परिवर्तन: 2000 के दशक की शुरुआत में RTGS (2004) और IMPS (2010) जैसी प्रणालियों की शुरुआत हुई।
- इन प्रणालियों ने तीव्र लेन-देन संभव किए, परंतु इनका लाभ केवल औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जुड़े लोगों तक सीमित रहा।
- भारत की बड़ी जनसंख्या औपचारिक वित्तीय सेवाओं (बैंकिंग, ऋण, बीमा, बचत) से वंचित थी।
JAM ट्रिनिटी
- भारत की डिजिटल भुगतान क्रांति की रीढ़ JAM ट्रिनिटी(जन धन, आधार, मोबाइल) रही।
- जन धन योजना: शून्य-बैलेंस खातों के माध्यम से करोड़ों लोगों को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा गया।
- आधार: सटीक पहचान और लक्षित सेवा वितरण सुनिश्चित किया।
- मोबाइल कनेक्टिविटी: वास्तविक समय में लेन-देन और संचार का माध्यम बना।
- JAM ढाँचे ने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) को सक्षम किया, मध्यस्थों को कम किया, दक्षता बढ़ाई और कल्याणकारी योजनाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित की।
UPI प्रणाली
- विकास: यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) का विकास 2016 में भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) द्वारा किया गया।
- विशेषताएँ:
- वर्चुअल पेमेंट एड्रेस के माध्यम से तुरंत धन हस्तांतरण।
- खाता संख्या या IFSC साझा करने की आवश्यकता नहीं।
- लेन-देन वास्तविक समय में, 24×7 उपलब्ध और सभी बैंकों व ऐप्स में अंतःक्रियाशील।
- वैश्विक सफलता: यह विश्व का सबसे सफल वास्तविक समय भुगतान तंत्र है।
- UPI Lite X: NFC समर्थित उपकरणों पर ऑफलाइन धन भेजने और प्राप्त करने की सुविधा।
डिजिटल भुगतान के लाभ
- नकदी पर निर्भरता में कमी।
- लेन-देन समय घटा और आर्थिक दक्षता बढ़ी।
- छोटे व्यवसायों को ग्राहक आधार बढ़ाने और आय के अवसर सुधारने में सहायता।
- पारदर्शिता बढ़ी, भ्रष्टाचार और रिसाव कम हुआ।
- सुरक्षा में वृद्धि: RBI ने दो-स्तरीय प्रमाणीकरण (PIN, बायोमेट्रिक्स, OTP) लागू किया।
- सुविधा: कहीं भी, कभी भी लेन-देन संभव।
वैश्विक पहुँच
- भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली को IMF और विश्व बैंक जैसी संस्थाओं से वैश्विक मान्यता मिली है।
- UPI को UAE, सिंगापुर, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, फ्रांस, मॉरीशस और क़तर जैसे देशों में अपनाया गया या जोड़ा गया है।
भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI)
- स्थापना: 2008 में खुदरा भुगतान और निपटान प्रणालियों के संचालन हेतु एक छत्र संगठन के रूप में।
- कानूनी आधार: भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 के अंतर्गत RBI एवं भारतीय बैंक संघ की संयुक्त पहल।
- संरचना: कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 8 के अंतर्गत “नॉट फॉर प्रॉफिट” कंपनी के रूप में पंजीकृत।
- उत्पाद: NPCI ने रूपे कार्ड, IMPS, UPI, भीम, भीम आधार, भारत बिलपे आदि लॉन्च किए।
स्रोत: TH
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