पाठ्यक्रम: GS2/स्वास्थ्य; GS3/विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
संदर्भ
- भारत ने राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस (16 मार्च) मनाया, ताकि टीकाकरण में हुई उपलब्धियों को उजागर किया जा सके। यह दिवस 1995 में पल्स पोलियो कार्यक्रम के अंतर्गत दी गई ओरल पोलियो वैक्सीन की प्रथम खुराक की स्मृति में मनाया जाता है।
परिचय
- टीकाकरण ने भारत में जनस्वास्थ्य सुधारने में परिवर्तनकारी भूमिका निभाई है। देश ने चेचक (1977) का उन्मूलन किया, पोलियो (2011 का अंतिम मामला), यॉज़ तथा मातृ एवं नवजात टिटनेस को समाप्त किया।
- इससे बाल मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आई और खसरा-रूबेला तथा क्षय रोग जैसी बीमारियों का भार घटा।
- COVID-19 के दौरान भारत “विश्व की फार्मेसी” के रूप में उभरा, जहाँ 200 करोड़ से अधिक टीके लगाए गए और वैश्विक स्तर पर आपूर्ति की गई। उल्लेखनीय है कि भारत वैश्विक टीका उत्पादन में लगभग 60% योगदान देता है।


परिणाम
- पोषण, स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के साथ टीकाकरण ने भारत में मातृ एवं शिशु जीवित रहने की दर को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाया।
- पूर्ण टीकाकरण कवरेज 2015 में 62% से बढ़कर जनवरी 2026 में 98.4% हो गया।
- जीरो-डोज़ बच्चों का प्रतिशत 2023 में 0.11% से घटकर 2024 में 0.06% हो गया।
- प्रतिवर्ष 1.3 करोड़ से अधिक टीकाकरण सत्र आयोजित किए जाते हैं।
- भारत को बड़े पैमाने पर जनस्वास्थ्य वितरण के लिए वैश्विक स्तर पर एक आदर्श मॉडल के रूप में मान्यता मिली है।
सरकारी पहलें
- सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (UIP): 1985 में शुरू किया गया, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा संचालित। इसका उद्देश्य बच्चों और गर्भवती महिलाओं को विभिन्न बीमारियों के विरुद्ध निःशुल्क टीके उपलब्ध कराना है। यह कार्यक्रम प्रतिवर्ष लगभग 2.9 करोड़ गर्भवती महिलाओं एवं 2.54 करोड़ नवजातों तक पहुँचता है।
- मिशन इंद्रधनुष (2014): उन बच्चों और गर्भवती महिलाओं तक पहुँचने के लिए शुरू किया गया जो टीकाकरण से वंचित या आंशिक रूप से टीकाकृत हैं।
- हाल की पहलें (2026)
- HPV टीकाकरण अभियान: लगभग 1.15 करोड़ 14 वर्षीय लड़कियों को गर्भाशय ग्रीवा कैंसर की रोकथाम हेतु लक्षित।
- स्वदेशी Td वैक्सीन: सीआरआई, कसौली में निर्मित; ~55 लाख खुराक आपूर्ति हेतु नियोजित।
- डिजिटल पहलें:
- eVIN: वास्तविक समय में टीका भंडार और तापमान की निगरानी।
- U-Win: डिजिटल टीकाकरण रजिस्ट्री और ट्रैकिंग प्लेटफ़ॉर्म।
- CoWIN: 220+ करोड़ COVID टीका खुराक प्रशासन में सक्षम।
चुनौतियाँ
- टीका संकोच और भ्रांतियाँ: उच्च कवरेज के बावजूद कुछ क्षेत्रों में गलत जानकारी और सांस्कृतिक मान्यताओं के कारण प्रतिरोध बना हुआ है, जिससे जीरो-डोज़ बच्चों की उपस्थिति (2024 में ~0.06%) बनी रहती है।
- अंतिम छोर तक वितरण की कमी: दूरस्थ, आदिवासी और संघर्ष-प्रभावित क्षेत्रों तक पहुँचना कठिन है, यद्यपि भारत UIP के अंतर्गत प्रतिवर्ष 1.3 करोड़ से अधिक टीकाकरण सत्र आयोजित करता है।
- कोल्ड चेन रखरखाव की समस्या: भारत लगभग 30,000 कोल्ड चेन पॉइंट्स और 1.06 लाख उपकरण इकाइयों के साथ विश्व की सबसे बड़ी टीका कोल्ड चेन प्रणालियों में से एक संचालित करता है। कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में तापमान बनाए रखना एक बड़ी लॉजिस्टिक चुनौती है।
- शहरी झुग्गियों में कवरेज की कमी: उच्च जनसंख्या गतिशीलता और अनौपचारिक बस्तियों के कारण कई बच्चे टीकाकरण से वंचित या आंशिक रूप से टीकाकृत रह जाते हैं, जिससे सार्वभौमिक कवरेज प्राप्त करने में कठिनाई होती है।
Source: PIB
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