- हाल ही में प्रकाशित रिपोर्ट “भारत का जनसांख्यिकीय भविष्य: राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए जनसंख्या प्रक्षेपण 2021–2051” यह रेखांकित करती है कि भारत एक संरचनात्मक जनसांख्यिकीय संक्रमण का सामना कर रहा है, जिसका शासन, अर्थव्यवस्था और सामाजिक क्षेत्रों पर गहरा प्रभाव पड़ेगा।
- घटती प्रजनन दर: भारत की कुल प्रजनन दर (TFR) लगभग प्रतिस्थापन स्तर 2.1 तक घट गई है, जो जनसंख्या स्थिरीकरण की ओर संकेत करती है।
- धीमी जनसंख्या वृद्धि: भारत की जनसंख्या 2021 में लगभग 1.35 अरब से बढ़कर 2051 तक 1.59 अरब होने की संभावना है, जो स्थिर किंतु धीमी वृद्धि को दर्शाता है।
- क्षेत्रीय असमानताएँ: दक्षिणी और पश्चिमी राज्यों में प्रतिस्थापन स्तर से नीचे की प्रजनन दर दर्ज हो चुकी है, जिससे शीघ्र वृद्धावस्था की स्थिति उत्पन्न हो रही है। वहीं उत्तरी और पूर्वी राज्यों में अपेक्षाकृत उच्च प्रजनन दर बनी हुई है, जो जनसंख्या वृद्धि को बनाए रखती है। Read More
भारत का जनसांख्यिकीय संक्रमण: लाभांश से वृद्धावस्था की चुनौती तक
संदर्भ
भारत में प्रमुख जनसांख्यिकीय प्रवृत्तियाँ