कृत्रिम बुद्धिमत्ता द्वारा भारत की विधिक पारिस्थितिकी का तीव्र  रूपांतरण

पाठ्यक्रम: GS2/शासन; GS3/विज्ञान और प्रौद्योगिकी

संदर्भ

  • हाल ही में सम्पन्न इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 ने प्रदर्शित किया कि किस प्रकार कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) भारत की विधिक पारिस्थितिकी को AI-संचालित शोध उपकरणों के माध्यम से तीव्र गति से रूपांतरित कर रही है।

भारत की न्याय प्रणाली में AI का उपयोग

  • सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालयों और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) में AI उपकरण अब विभिन्न कार्यों में सहायक हो रहे हैं, जैसे:
    • मौखिक तर्कों का लिप्यंतरण,
    • निर्णयों का अनुवाद,
    • ई-फाइलिंग में त्रुटियों की पहचान,
    • विधिक शोध, और
    • मेटाडाटा निष्कर्षण।
  • विगत दशक में न्यायालयों ने साधारण कंप्यूटरीकरण से लेकर राष्ट्रीय स्तर के डिजिटल प्लेटफॉर्म, वास्तविक समय डेटा प्रणाली, वर्चुअल कोर्ट और बहुभाषी निर्णय उपलब्धता तक प्रगति की है।
  • नवीनतम तकनीकें जैसे AI और इसके उप-क्षेत्र मशीन लर्निंग (ML), ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन (OCR), नैचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (NLP) का उपयोग ई-कोर्ट्स परियोजना के अंतर्गत विकसित सॉफ़्टवेयर अनुप्रयोगों में किया जा रहा है।

भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली में AI का उपयोग

  • ई-कोर्ट्स परियोजना: भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा न्यायिक कार्यों का आधुनिकीकरण डिजिटल नवाचार के माध्यम से करने हेतु प्रारंभ।
    • चरण III: उन्नत AI समाधानों का एकीकरण, जिससे मामलों के प्रबंधन और न्यायालयों की प्रशासनिक दक्षता में सुधार।
  • विधिक अनुवाद एवं भाषा सुलभता हेतु AI: भारत की न्यायिक प्रणाली मुख्यतः अंग्रेज़ी में संचालित होती है, जिससे गैर-अंग्रेज़ी भाषी वादियों के लिए बाधाएँ उत्पन्न होती हैं।
    • AI-संचालित विधिक अनुवाद उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है ताकि विधिक दस्तावेज़ और निर्णय सुलभ हो सकें।
  • कानून प्रवर्तन एवं अपराध रोकथाम में AI:
    • अपराध पहचान, निगरानी और आपराधिक जांच को सुदृढ़ करने हेतु।
    • अपराध स्थल की निगरानी और संदिग्धों की ट्रैकिंग हेतु स्वचालित ड्रोन।
    • राष्ट्रीय आपराधिक डेटाबेस से एकीकृत चेहरे की पहचान प्रणाली।
    • साक्ष्य और डिजिटल अपराध मार्गों की जांच हेतु AI-संचालित फॉरेंसिक विश्लेषण।
    • वास्तविक समय में FIR दर्ज करने और मामले के दस्तावेज़ीकरण हेतु AI-संचालित स्पीच-टू-टेक्स्ट उपकरण।
    • गवाहों की गवाही के विश्लेषण और न्यायालयीन साक्ष्य मूल्यांकन में सुधार।

भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली (CJS) में AI उपयोग का महत्व

  • मामलों का लंबित बोझ: भारत की न्यायिक प्रणाली में लंबित मामलों का भार समय पर न्याय में जनविश्वास को कमजोर करता है।
    • AI मामले प्रबंधन को सुव्यवस्थित कर सकता है, लंबित मामलों को कम कर सकता है और न्यायिक प्रक्रियाओं को तीव्र कर सकता है।
  • कारागारों में भीड़भाड़: भारतीय कारागार दशकों से अपनी क्षमता से अधिक कैदियों को समायोजित कर रहे हैं।
    • AI शिकायत पंजीकरण प्रक्रिया को सुव्यवस्थित कर सकता है, जांचों को ट्रैक कर सकता है, आवश्यक कार्रवाइयों को चिन्हित कर सकता है और जांच की गुणवत्ता का आकलन कर सकता है।
  • संचालन हेतु पूर्वानुमान मॉडल: AI अपराध स्थल डेटा, गश्ती पैटर्न और अपराधियों के मार्गों का विश्लेषण कर पुलिस संचालन को प्रभावी ढंग से मार्गदर्शन दे सकता है।
  • संसाधन अनुकूलन: AI प्रशासनिक कार्यों को संभाल सकता है, जिससे पुलिसकर्मी जांच, कानून प्रवर्तन और यातायात प्रबंधन जैसे जन-सामना कार्यों के लिए मुक्त हो सकें।
  • सटीकता में वृद्धि: AI महत्वपूर्ण साक्ष्यों की उपेक्षा को रोक सकता है और अधिक सूक्ष्म एवं विश्वसनीय आपराधिक न्याय प्रक्रिया सुनिश्चित कर सकता है।

चिंताएँ/चुनौतियाँ

  • गोपनीयता संबंधी चिंताएँ: AI निगरानी अतिरेक और व्यक्तिगत गोपनीयता अधिकारों के उल्लंघन का कारण बन सकता है।
  • पक्षपात एवं भेदभाव: AI प्रणालियाँ निर्णय-निर्माण में पक्षपात को बनाए रख सकती हैं, जिससे हाशिए पर रहने वाले समुदायों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
  • पारदर्शिता का अभाव: AI एल्गोरिद्म प्रायः अस्पष्ट होते हैं, जिससे निर्णय कैसे लिए जाते हैं यह समझना कठिन हो जाता है और जवाबदेही कमजोर हो सकती है।
  • प्रौद्योगिकी पर निर्भरता: AI पर अत्यधिक निर्भरता आपराधिक न्याय प्रणाली में मानवीय विवेक और निर्णय क्षमता को कमजोर कर सकती है।
  • डेटा सुरक्षा: संवेदनशील आपराधिक न्याय डेटा का AI द्वारा संग्रहण और प्रसंस्करण डेटा उल्लंघन एवं दुरुपयोग के जोखिम बढ़ाता है।
  • नैतिक चिंताएँ: सजा और पैरोल निर्णय जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में AI का उपयोग निष्पक्षता एवं न्याय पर नैतिक प्रश्न उठाता है।
  • खुली न्याय प्रणाली के सिद्धांतों के विपरीत: अस्पष्टता खुली न्याय, उचित प्रक्रिया और विधि के शासन के सिद्धांतों के विरुद्ध जा सकती है।
  • मानवीय अंतर्दृष्टि का बहिष्कार: AI उन सूक्ष्म कारकों को नज़रअंदाज़ कर सकता है जिनमें मानवीय सहानुभूति और विवेक की आवश्यकता होती है।

आगे की राह

  • एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है ताकि AI उपकरण गोपनीयता, नागरिक स्वतंत्रताओं और नैतिक मानकों का सम्मान करें तथा दुरुपयोग को रोका जा सके।
  • AI का लाभ उठाकर भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली अधिक दक्ष, सुलभ और न्यायसंगत बन सकती है, बशर्ते चुनौतियों का समाधान करने हेतु आवश्यक सुरक्षा उपाय लागू किए जाएँ।

स्रोत: AIR

 

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