उत्तर प्रदेश में पुलिस महानिदेशक(DGP ) की नियुक्ति के लिए नए नियम

पाठ्यक्रम: GS2/ राजव्यवस्था और शासन व्यवस्था

सन्दर्भ

  • उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल ने पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश चयन एवं नियुक्ति नियमावली, 2024 को मंजूरी दे दी।

परिचय

  • नए नियम 2006 के पुलिस सुधारों पर प्रकाश सिंह मामले में उच्चतम न्यायालय के निर्णय के अनुपालन में हैं। 
  • नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, एक समिति राज्य के नए पुलिस प्रमुख का निर्णय करेगी।
  •  इससे पहले, राज्य सरकार को पात्र अधिकारियों की सूची UPSC को भेजनी होती थी, जो तीन नामों को शॉर्टलिस्ट करके राज्य को भेजती थी, जिसके बाद वह उनमें से किसी एक का चुनाव कर सकती थी।

चयन समिति

  • प्रमुख: सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली चयन समिति।
  • सदस्य: इसमें मुख्य सचिव, UPSC द्वारा नामित व्यक्ति, यूपी लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या उनके द्वारा नामित व्यक्ति, एक अतिरिक्त मुख्य सचिव या प्रमुख सचिव (गृह) और एक सेवानिवृत्त DGP शामिल होंगे।

भारत में पुलिस प्रणाली से संबंधित मुद्दे

  • औपनिवेशिक विरासत और संरचना: 1861 का पुलिस अधिनियम अभी भी पुलिस प्रणाली को नियंत्रित करता है, जिसे आधुनिक लोकतांत्रिक शासन के बजाय औपनिवेशिक नियंत्रण के लिए डिज़ाइन किया गया था।
  • राजनीतिक हस्तक्षेप: राजनेताओं द्वारा बार-बार हस्तक्षेप करने से कानून प्रवर्तन में निष्पक्षता बाधित होती है।
  • हिरासत में मृत्यु: हिरासत में मृत्यु के विभिन्न मामले हैं, जिसका तात्पर्य है पुलिस/न्यायिक हिरासत में यातना/दबाव से मृत्यु।
    • 1996-1997 के दौरान डी.के.बसु के निर्णय में, उच्चतम न्यायालय (SC) ने भारत में हिरासत में मृत्यु के विरुद्ध एक दिशानिर्देश जारी किया।
  • प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण: प्रशिक्षण कार्यक्रम पुराने हो चुके हैं और उनमें सॉफ्ट स्किल, नैतिकता और सामुदायिक जुड़ाव पर बल नहीं दिया जाता है।
  • सुधारों को लागू करने में देरी: प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ मामले (2006) में उच्चतम न्यायालय द्वारा की गई सिफारिशों सहित विभिन्न सुधार सिफारिशों का सीमित कार्यान्वयन देखा गया है।

आगे की राह

  • सुधारों को लागू करना: 2006 के आदर्श पुलिस अधिनियम और दूसरे प्रशासनिक सुधार आयोग की सिफारिशों को अपनाना। 
  • सामुदायिक पुलिसिंग कार्यक्रम: समुदायों के साथ बेहतर संबंधों के लिए महिला सुरक्षा समितियों और सामुदायिक संपर्क समूहों जैसी पहलों को प्रोत्साहित करना। 
  • स्वतंत्र निरीक्षण तंत्र: जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए राज्य और केंद्रीय स्तर पर निरीक्षण निकायों की स्थापना करना।
पुलिस सुधार पर प्रकाश सिंह का निर्णय
– वर्ष 2006 में उच्चतम न्यायालय ने एक ऐतिहासिक निर्णय में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पुलिस सुधार लाने का निर्देश दिया था। 
– इस निर्णय में विभिन्न उपाय जारी किए गए थे, जिन्हें सरकारों को यह सुनिश्चित करने के लिए करना था कि पुलिस किसी भी राजनीतिक हस्तक्षेप की चिंता किए बिना अपना कार्य कर सके।
क्या निर्णय हुए?
– DGP का कार्यकाल और चयन तय करना ताकि ऐसी स्थिति न आए कि कुछ महीनों में रिटायर होने वाले अधिकारियों को पद दे दिया जाए।
1. राजनीतिक हस्तक्षेप न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए पुलिस महानिरीक्षक के लिए न्यूनतम कार्यकाल की मांग की गई ताकि राजनेताओं द्वारा उन्हें कार्यकाल के बीच में स्थानांतरित न किया जाए।
पुलिस स्थापना बोर्ड (PEB): पुलिस अधिकारियों और वरिष्ठ नौकरशाहों से मिलकर बने पुलिस स्थापना बोर्ड द्वारा अधिकारियों की पोस्टिंग की जाती है ताकि पोस्टिंग और स्थानांतरण की शक्तियों को राजनीतिक नेताओं से अलग रखा जा सके।
राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण (SPCA): पुलिस कार्रवाई से पीड़ित सामान्य लोगों को एक मंच देने के लिए राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण (SPCA) की स्थापना की सिफारिश की गई थी।
राज्य सुरक्षा आयोग (SSC): पुलिसिंग में बेहतर सुधार के लिए जांच और कानून व्यवस्था के कार्यों को अलग करना, SSC की स्थापना जिसमें नागरिक समाज के सदस्य होंगे और राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग का गठन करना।

Source: IE

 

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