पाठ्यक्रम: GS III/ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी – स्वदेशीकरण और अनुसंधान एवं विकास
समाचार / संदर्भ
- इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में व्यापक भागीदारी और उच्च उत्साह देखा गया। तथापि, विवाद तब उत्पन्न हुआ जब कथित रूप से आयातित प्रौद्योगिकी उत्पादों को स्वदेशी नवाचार के रूप में प्रदर्शित किया गया, जिससे भारत के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र की गुणवत्ता और प्रामाणिकता पर प्रश्नचिह्न उठे।
भारत की नवाचार आकांक्षाएँ
- भारत का लक्ष्य है कि वह 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था और वैश्विक उच्च-प्रौद्योगिकी केंद्र बने।
- इंडियाएआई मिशन: कंप्यूटर अवसंरचना, डाटासेट्स और एआई स्टार्टअप्स पर केंद्रित।
- डिजिटल इंडिया: जिसने डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (UPI, आधार, ONDC) का निर्माण किया।
- स्टार्टअप इंडिया: अब विश्व का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र, जिसमें 1 लाख से अधिक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स हैं।
- आत्मनिर्भर भारत: घरेलू विनिर्माण और स्वदेशीकरण पर बल।
- भारत ने ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स (GII) 2025 में 38वाँ स्थान प्राप्त किया, जो 2015 के 81वें स्थान से एक बेहतर प्रगति है।
- भारत अब ट्रेडमार्क्स में चौथे और पेटेंट दाखिल करने में छठे स्थान पर है।
- सरकार ने ₹1 लाख करोड़ का अनुसंधान, विकास एवं नवाचार (RDI) कोष तथा अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF) को क्रियान्वित किया है, ताकि “विकसित भारत 2047” की संस्कृति को प्रोत्साहित किया जा सके।
भारत के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र की संरचित कमियाँ
- फाइलिंग-टू-ग्रांट सफलता अंतराल: IITs और NITs की सफलता दर 40–65% है, जबकि निजी विश्वविद्यालयों की दर 3% से भी कम। उदाहरणतः LPU और गलगोटियास जैसे संस्थान IITs से अधिक पेटेंट दाखिल करते हैं, परंतु ग्रांट नगण्य।
- रैंकिंग आर्बिट्राज: NIRF में पेटेंट दाखिलों को 30% भार दिया जाता है। संस्थानों को दाखिला शुल्क में 80% छूट मिलती है, जिससे सस्ते पेटेंट दाखिल कर रैंक बढ़ाना और फिर अधिक छात्र/राजस्व आकर्षित करना एक चक्र बन जाता है।
- कमज़ोर व्यावसायीकरण: पेटेंट मिलने पर भी उद्योग में हस्तांतरण सीमित, स्टार्टअप स्पिन-ऑफ्स कम और तकनीकी लाइसेंसिंग से राजस्व नगण्य।
- निम्न R&D प्रोत्साहन: भारत का R&D व्यय GDP का केवल 0.64–0.7% है, जबकि अमेरिका (3–4%), इज़राइल (5.7%) और दक्षिण कोरिया (4.8%) कहीं अधिक निवेश करते हैं। निजी क्षेत्र की कम भागीदारी गहन-प्रौद्योगिकी नवाचार को और कमजोर करती है।
- प्रदर्शन संस्कृति बनाम सार्थकता: सार्वजनिक सम्मेलनों और आयोजनों में प्रोटोटाइप एवं घोषणाएँ प्रदर्शित होती हैं, परंतु कठोर सत्यापन तथा बाज़ार परीक्षण के अभाव में नवाचार प्रतीकात्मक रह जाता है।
भारत की एआई महत्वाकांक्षा पर प्रभाव
- यदि नवाचार प्रक्रियात्मक ही रहा और समस्या-समाधान उन्मुख न हुआ, तो भारत के एआई लक्ष्यों को गंभीर जोखिम होंगे:
- विदेशी हार्डवेयर पर निर्भरता: “रोबोडॉग” मामले की तरह भारत केवल विदेशी हार्डवेयर पर “सॉफ्टवेयर त्वचा” बनकर रह सकता है।
- प्रमाण-पत्र मुद्रास्फीति: तुच्छ पेटेंटों की अधिकता “भारतीय नवाचार” की ब्रांडिंग को कमजोर करती है, जिससे वास्तविक गहन-प्रौद्योगिकी स्टार्टअप्स के लिए वैश्विक वेंचर कैपिटल आकर्षित करना कठिन हो जाता है।
- विश्वास का क्षरण: अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में मिथ्या प्रस्तुति भारत की विश्वसनीयता को नुकसान पहुँचाती है।
- फिर भी भारत के पास सुदृढ़ आधार हैं—विशाल एआई प्रतिभा, विस्तृत डिजिटल अवसंरचना और विशाल घरेलू डेटा।
चीन और विश्व से सीख
- चीनी मॉडल: दो दशक पूर्व “मेड इन चाइना” सस्ते नकली उत्पादों का पर्याय था। परंतु सतत पुनरावृत्ति और प्रक्रिया नवाचार पर ध्यान देकर चीन ने 6G, EVs और हाई-स्पीड रेल में प्रभुत्व प्राप्त किया। उन्होंने “अनुशासित प्रगति” पर बल दिया, न कि “असमय घोषणा” पर।
- दक्षिण कोरियाई मॉडल: उच्च R&D-to-GDP अनुपात के साथ प्रयोगशाला और बाज़ार के बीच सेतु का कार्य करने वाले ट्रांसलेशनल रिसर्च सेंटर्स(TRCs) पर ध्यान।
- सिलिकॉन वैली मॉडल: वेंचर कैपिटल पारिस्थितिकी तंत्र, गहन विश्वविद्यालय-उद्योग संबंध और विफलता के प्रति सहिष्णुता, परंतु कठोर बाज़ार सत्यापन।
आवश्यक व्यापक सुधार
- परिणाम-आधारित प्रोत्साहन: सरकारी प्रतिपूर्ति को दाखिल चरण से हटाकर ग्रांट और व्यावसायीकरण चरण से जोड़ना।
- NIRF सुधार: “दाखिल पेटेंट” से “प्राप्त पेटेंट” और उससे भी अधिक “आईपी लाइसेंसिंग से राजस्व” पर ध्यान।
- ऑडिटिंग और जवाबदेही: असामान्य फाइलिंग-टू-ग्रांट अनुपात वाले संस्थानों का नियामक ऑडिट, ताकि तुच्छ IPR गतिविधि रोकी जा सके।
- निजी R&D निवेश बढ़ाना: गहन-प्रौद्योगिकी क्षेत्रों (एआई हार्डवेयर, सेमीकंडक्टर, बायोटेक) हेतु कर प्रोत्साहन और जोखिम पूंजी।
निष्कर्ष
- भारत को वास्तविक एआई महाशक्ति बनने के लिए मात्रात्मक अनुपालन से हटकर सार्थक उत्कृष्टता की ओर बढ़ना होगा। “मेड इन इंडिया” का लेबल तभी विश्वसनीय होगा जब वह कठोर अनुसंधान का प्रतीक बने, न कि केवल “देशभक्ति की रोशनी” का।
| यूपीएससी मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न [प्रश्न] बौद्धिक संपदा (Intellectual Property – IP) दाखिलों में अभूतपूर्व वृद्धि के बावजूद, भारत अपने नवाचार जीवनचक्र में ‘वैली ऑफ़ डेथ’ (Valley of Death) की चुनौती का सामना कर रहा है। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के परिप्रेक्ष्य में, शैक्षणिक अनुसंधान को व्यावसायिक सफलता में रूपांतरित करने की प्रणालीगत चुनौतियों पर चर्चा कीजिए। |
Source: BL
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