पाठ्यक्रम: GS2/अंतर्राष्ट्रीय संबंध
संदर्भ
- कनाडा के प्रधानमंत्री की हालिया भारत यात्रा ने भारत–कनाडा द्विपक्षीय संबंधों में एक महत्वपूर्ण मोड़ को चिह्नित किया। इसने दोनों देशों के बीच विश्वास पुनर्स्थापना, आर्थिक संबंधों को सुदृढ़ करने और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक हितों को संरेखित करने के व्यापक प्रयास को प्रतिबिंबित किया।
भारत–कनाडा संबंधों के बारे में
- भारत और कनाडा का संबंध लोकतांत्रिक मूल्यों, राष्ट्रमंडल सदस्यता, आर्थिक पूरकताओं और सुदृढ़ जन–जन संपर्क पर आधारित है।
- हालाँकि, द्विपक्षीय संबंधों ने सहयोग, ठहराव और पुनः संलग्नता के विभिन्न चरणों का अनुभव किया है।
- आज भारत–कनाडा संबंध व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, महत्त्वपूर्ण खनिज, प्रौद्योगिकी और इंडो-पैसिफिक सहयोग के इर्द-गिर्द विकसित हो रहे हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
- प्रारंभिक राजनयिक संबंध: भारत की स्वतंत्रता के बाद 1947 में राजनयिक संबंध स्थापित हुए।
- दोनों देश राष्ट्रमंडल के सदस्य हैं।
- प्रारंभिक सहयोग विकास सहायता, कृषि और शिक्षा पर केंद्रित था।
- प्रमुख प्रारंभिक विकास:
- कनाडा ने 1950 के दशक में कोलंबो योजना के माध्यम से भारत का समर्थन किया।
- नागरिक परमाणु ऊर्जा में सहयोग, जिसमें कनाडा द्वारा प्रदत्त CIRUS रिएक्टर शामिल था।
- तनाव का काल (1974–1998): भारत के परमाणु परीक्षणों के बाद संबंध खराब हुए।
- 1974 पोखरण परीक्षण में कनाडाई रिएक्टर से प्राप्त प्लूटोनियम का उपयोग हुआ।
- कनाडा ने परमाणु सहयोग निलंबित कर दिया।
- कई दशकों तक राजनयिक संबंध सीमित रहे।
- क्रमिक सामान्यीकरण (2000–2015): 21वीं सदी की शुरुआत में संबंधों सुधार हुआ।
- 2009: नागरिक परमाणु सहयोग समझौता।
- 2013: Cameco (कनाडा) और भारत के बीच यूरेनियम आपूर्ति समझौता।
- 2015: भारत के प्रधानमंत्री की कनाडा यात्रा ने रणनीतिक संलग्नता को पुनर्जीवित किया।
- सहयोग के क्षेत्र: नागरिक परमाणु ऊर्जा, शिक्षा एवं छात्र गतिशीलता, कृषि एवं प्राकृतिक संसाधन, व्यापार एवं निवेश।
संबंधों का समकालीन चरण
- आर्थिक एवं रणनीतिक संबंधों की मज़बूती: हाल के वर्षों में भारत और कनाडा ने आर्थिक कूटनीति एवं इंडो-पैसिफिक सहयोग पर ध्यान केंद्रित किया है।
- व्यापार एवं निवेश: द्विपक्षीय व्यापार 10 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक है।
- व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) पर वार्ता जारी है।
- CEPA से शुल्क में कमी, बाज़ार तक बेहतर पहुँच और निवेश प्रवाह में वृद्धि की अपेक्षा है।
- ऊर्जा सहयोग: कनाडा भारत के परमाणु रिएक्टरों के लिए यूरेनियम आपूर्ति करता है। स्वच्छ ऊर्जा, जलविद्युत और छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों में भी सहयोग है।
- महत्त्वपूर्ण खनिज एवं प्रौद्योगिकी: कनाडा लिथियम, कोबाल्ट, निकेल और यूरेनियम जैसे महत्त्वपूर्ण खनिजों से समृद्ध है।
- ये खनिज ईवी बैटरियों, नवीकरणीय ऊर्जा और सेमीकंडक्टरों के लिए आवश्यक हैं।
- भारत, चीन पर निर्भरता कम करने हेतु संसाधन-समृद्ध देशों जैसे कनाडा से साझेदारी चाहता है।
- इंडो-पैसिफिक सहयोग: कनाडा की इंडो-पैसिफिक रणनीति (2022) में भारत को एक महत्त्वपूर्ण साझेदार माना गया है। दोनों देश समुद्री सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन और प्रौद्योगिकी साझेदारी में सहयोग करते हैं।
- व्यापार एवं निवेश: द्विपक्षीय व्यापार 10 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक है।
- भारतीय प्रवासी समुदाय की भूमिका: कनाडा में भारतीय मूल के 18 लाख से अधिक लोग रहते हैं।
- राजनीति, व्यवसाय और शिक्षा जगत में उनका महत्त्वपूर्ण प्रभाव है।
- यह जन–जन संपर्क को सुदृढ़ करता है, व्यापार एवं निवेश को सुगम बनाता है और सांस्कृतिक आदान–प्रदान को बढ़ावा देता है।
- वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता एवं भू-राजनीतिक परिवर्तन: भारत और कनाडा दोनों मध्यम शक्ति वाले राष्ट्र हैं, जो आर्थिक स्थिरता, तकनीकी प्रगति एवं विविधीकृत साझेदारी की खोज में हैं।
- अमेरिका की शुल्क नीतियाँ वैश्विक व्यापार को प्रभावित कर रही हैं।
- यूरोप और पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित कर रहे हैं।
- महत्त्वपूर्ण खनिजों और रणनीतिक प्रौद्योगिकियों के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है।
- कुछ देशों पर निर्भरता कम करने हेतु आपूर्ति श्रृंखला विविधीकरण की आवश्यकता है।
- प्रौद्योगिकी एवं नवाचार सहयोग: ऑस्ट्रेलिया–कनाडा–भारत प्रौद्योगिकी एवं नवाचार साझेदारी के अंतर्गत एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।
- उद्देश्य: नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देना; इंडो-पैसिफिक प्रौद्योगिकी सहयोग को सुदृढ़ करना; उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग बढ़ाना।
- यह इंडो-पैसिफिक में सुदृढ़ प्रौद्योगिकी आपूर्ति श्रृंखला बनाने की व्यापक पहल के अनुरूप है।
- साझेदारी का रणनीतिक महत्त्व
- भारत के लिए: विश्वसनीय यूरेनियम आपूर्ति सुनिश्चित करना।
- महत्त्वपूर्ण खनिजों तक पहुँच।
- प्रौद्योगिकी साझेदारी को सुदृढ़ करना।
- ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाना।
- कनाडा के लिए: अमेरिका से परे व्यापार का विविधीकरण।
- इंडो-पैसिफिक संलग्नता को सुदृढ़ करना।
- एक प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्था के साथ सहयोग का विस्तार।
- भारत के लिए: विश्वसनीय यूरेनियम आपूर्ति सुनिश्चित करना।
भारत–कनाडा संबंधों की चुनौतियाँ
- प्रवासी समुदाय से जुड़ी राजनीतिक संवेदनशीलताएँ; खालिस्तानी गतिविधियों और निज्जर मामले से संबंधित राजनयिक तनाव।
- व्यापार वार्ताओं की जटिलताएँ और क्रियान्वयन संबंधी चुनौतियाँ।
- इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा।
- तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम में धीमी प्रगति; परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं की उच्च लागत; और सीमित घरेलू यूरेनियम उत्पादन।
- तथापि, हालिया कूटनीति एक व्यावहारिक दृष्टिकोण का संकेत देती है, जिसमें आर्थिक सहयोग को प्राथमिकता दी गई है।
भारत की परमाणु ऊर्जा रणनीति
- SHANTI विधेयक, 2025: भारत ने सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (SHANTI) विधेयक, 2025 पारित किया, जिसका उद्देश्य परमाणु ऊर्जा विकास को गति देना है।
- भारत के परमाणु लक्ष्य: 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता प्राप्त करना।
- जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करना।
- शुद्ध-शून्य उत्सर्जन लक्ष्यों को प्राप्त करना।
- कनाडा जैसे साझेदारों से स्थिर यूरेनियम आपूर्ति भारत को इन उद्देश्यों को पूरा करने में सहायक होगी।
निष्कर्ष
- कनाडा की हालिया भारत यात्रा ने भारत–कनाडा संबंधों में एक महत्त्वपूर्ण राजनयिक पुनर्संरेखण को चिह्नित किया। व्यापार, प्रौद्योगिकी, महत्त्वपूर्ण खनिज और परमाणु ऊर्जा पर हुए समझौते एक व्यावहारिक एवं परस्पर लाभकारी साझेदारी की ओर संकेत करते हैं।
- ऊर्जा सुरक्षा और उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में भारत–कनाडा सहयोग तीव्रता से रणनीतिक होता जा रहा है, विशेषकर ऐसे समय में जब विश्व भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं एवं आपूर्ति श्रृंखला व्यवधानों से प्रभावित है।
| मुख्य परीक्षा दैनिक अभ्यास प्रश्न [प्रश्न] भारत और कनाडा के बीच हालिया राजनयिक संवाद द्विपक्षीय संबंधों को पुनः स्थापित करने के एक नवीकृत प्रयास का संकेत देते हैं। नवीकृत भारत–कनाडा साझेदारी के महत्व की विवेचना कीजिए। |
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